तो उतर जाएं: क्या कमलनाथ के इसी बयान ने भड़काई सिंधिया के दिल की आग?

नई दिल्ली। मध्य प्रदेश में कांग्रेस के भीतर की कलह ने पार्टी के लिए मुश्किल खड़ी कर दी है। ज्योतिरादित्य सिंधिया को कांग्रेस का वरिष्ठ नेता माना जाता था। लेकिन जिस तरह से प्रदेश में उनकी अनदेखी की गई और मुख्यमंत्री कमलनाथ के साथ उनकी तनातनी सामने आई उसने हालात को काफी खराब दिया। सिंधिया ने पहले ही अपनी ही सरकार के खिलाफ बागी तेवर दिखाते हुए मोर्चा खोलने की बात कही थी। हालांकि उस वक्त माना जा रहा था कि पार्टी के भीतर की यह अंतर्कलह खत्म हो गई लेकिन अंदरखाने में नाराजगी बनी रही, जो आखिरकार खुलकर सामने आई।

कमलनाथ ने कहा था तो उतर जाएं

कमलनाथ ने कहा था तो उतर जाएं

ज्योतिरादित्य सिंधिया ने हाल ही में टीकमगढ़ जिले में कुडीला गांव में एक सभा को संबोधित करते हुए कहा था कि अगर मध्यप्रदेश सरकार घोषणापत्र में किए वादे को पूरा नहीं करती तो वह सड़क पर उतरेंगे। उनके इस बयान के बाद कमलनाथ ने पलटवार करते हुए कहा था कि तो उतर जाएं। पत्रकारों ने जब सिंधिया के बयान पर कमलनाथ से सवाल पूछा तो उन्होंने कहा कि, तो उतर जाएं।

सड़क पर उतरने की बात कही थी

सड़क पर उतरने की बात कही थी

ज्योतिरादित्य सिंधिया ने कहा था कि असंभव है कि कांग्रेस पार्टी कोई वादा करे और उसे पूरा न करे। अगर कांग्रेस ने कुछ वादा किया है, तो उसे पूरा करना बहुत जरूरी है। सिंधिया ने कहा था, 'उस दौरान भी मैंने आपकी आवाज उठाई थी और आज भी आपको विश्वास दिलाना चाहता हूं कि अगर मध्य प्रदेश की कांग्रेस सरकार घोषणा पत्र में अंकित बातों को पूरा नहीं करती तो आपके साथ ज्योतिरादित्य सिंधिया भी सड़क पर उतरेगा।'

सब्र रखने की बात कही थी

सब्र रखने की बात कही थी

मध्य प्रदेश में सरकार बनने के बाद ज्योतिरादित्य सिंधिया ने कहा था, 'सरकार अभी बनी है, थोड़ा सब्र रखने की जरूरत हैं। हमारी बारी भी आएगी और अगर ना आए तो चिंता मत करना, आपकी ढाल भी मैं बनूंगा और आपका तलवार भी मैं बनूंगा। इसके पहले भी ज्योतिरादित्य सिंधिया ने दिल्ली चुनाव में कांग्रेस के खराब प्रदर्शन पर निराशा जताई थी। सिंधिया ने कहा था कि दिल्ली चुनाव के नतीजे हमारे लिए बेहद निराशाजनक हैं। हमारी पार्टी को नई विचारधारा और नई कार्यशैली की सख्त जरूरत है। देश बदल चुका है, लिहाजा हमे भी बदलने की जरूरत है और नए रास्तों और विकल्पों पर विचार करना चाहिए ताकि देश के लोगों से हम संपर्क स्थापित कर सके।

विधानसभा में 230 सीटें

विधानसभा में 230 सीटें

दरअसल इस वक्त एमपी में 230 विधानसभा सीटें हैं लेकिन दो विधायकों के निधन हो जाने के चलते विधानसभा की मौजूदा सीट 228 हो गई है, किसी भी पार्टी को सरकार बनाने के लिए मैजिक नंबर 115 चाहिए होता है और जो तस्वीर इस वक्त विधानसभा में है उसके मुताबिक कांग्रेस के पास 114 विधायक हैं, जिसमें से 4 निर्दलीय, 2 बहुजन समाज पार्टी और एक समाजवादी पार्टी विधायक का समर्थन मिला हुआ है, जबकि बीजेपी के पास 107 विधायक हैं।

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