'जज का काम लोगों को खुश करना नहीं...', हिजाब बैन पर सुनवाई करने वाले जस्टिस हेमंत गुप्ता ने ऐसा क्यों कहा?
'जज का काम लोगों को खुश करना नहीं...', हिजाब बैन पर सुनवाई करने वाले जस्टिस हेमंत गुप्ता ने ऐसा क्यों कहा?
जस्टिस हेमंत गुप्ता ने सुप्रीम कोर्ट को अलविदा कहते हुए कहा कि कि जजों की भूमिका लोगों को खुश करने की नहीं बल्कि कानून के अनुसार मामलों का फैसला करने की होती है। जस्टिस हेमंत गुप्ता जो 16 अक्टूबर को रिटायर होने वाले हैं। शुक्रवार 14 अक्टूबर को जस्टिस हेमंत गुप्ता के कार्यकाल का आखिरी दिन था। अपने अंतिम वर्किंग डे पर न्यायमूर्ति हेमंत गुप्ता ने कहा कि एक न्यायाधीश लोगों को खुश नहीं कर सकता क्योंकि यह उन्हें सौंपी गई जिम्मेदारी नहीं है। हमारा काम कानून के तहत फैसला करना है। जस्टिम हेमंत गुप्ता, सुप्रीम कोर्ट के उन दो जजों में शामिल थे, जिन्होंने हाल ही में कर्नाटक हिजाब बैन मामले पर सुनवाई की और फैसला दिया। हालांकि दोनों जजों की अलग-अलग राय होने की वजह से हिजाब बैन मामले बड़ी बेंच को भेजा गया है। हेमंत गुप्ता ने शैक्षणिक संस्थानों में हिजाब बैन को उचित ठहराया था।

'एक जज लोगों को खुश नहीं कर सकता है...'
सुप्रीम कोर्ट में लगभग चार साल के कार्यकाल के बाद न्यायमूर्ति हेमंत गुप्ता 16 अक्टूबर को रिटायर हो रहे हैं। सुप्रीम कोर्ट बार एसोसिएशन (एससीबीए) द्वारा आयोजित एक कार्यक्रम में अपना विदाई भाषण देते हुए हेमंत गुप्ता ने कहा, '''एक जज लोगों को खुश नहीं कर सकता है...क्योंकि यह उसे सौंपी गई भूमिका नहीं है। लोगों को खुश करना हमारी जिम्मेदारी नहीं है। ये भूमिका सार्वजनिक जीवन में अन्य लोगों को सौंपी जाती है।''

'हम कोर्ट में सख्त होते हैं...'
न्यायमूर्ति हेमंत गुप्ता ने कहा, ''लोगों को खुश या दुखी करने के इरादे से कोई भी जज की भूमिका का निर्वहन नहीं कर सकता। मैं अदालत में सख्त था, लेकिन मेरी समझ के अनुसार जो भी मैंने फैसला किया, उन्हें पारित किया गया है।''

जस्टिस हेमंत गुप्ता बोले, 'मुझे कोई पछतावा नहीं है'
जस्टिस हेमंत गुप्ता ने कहा कि उन्हें अपने किए गए किसी भी फैसलों का कोई अफसोस या पछतावा नहीं है। उन्होंने कहा कि उन्हें अपने किए सारे कामों से संतुष्टि मिली है। उन्होंने कहा कि उन्होंने संस्थान अपना बेस्ट दिया है। जस्टिस हेमंत गुप्ता बोले, ''मुझे कोई पछतावा नहीं है। मैंने पूरी विनम्रता और ईमानदारी से अपने कर्तव्यों का निर्वहन करने की पूरी कोशिश की है, हालांकि कभी-कभी मैं अपना आपा खो देता हूं। कोई भी एकदम सही नहीं होता। मैं परफेक्ट होने का दावा नहीं करता हूं। जो भी मैंने गलती की या मेरे अंदर जो भी कमियां थीं, वो सब अनजाने में हुई हैं।''

जानिए जस्टिस हमेंत गुप्ता के बारे में?
न्यायमूर्ति हेमंट गुप्ता ने कहा, '' मुझे जो भी भूमिका मिली है, वह बिना किसी डर या पक्षपात के मैंने किया है। मैं बिना डर या पक्षपात के अपनी सर्वश्रेष्ठ क्षमता के प्रदर्शन से संतुष्ट हूं।'' जस्टिस हेमंत गुप्ता को नवंबर 2018 में सुप्रीम कोर्ट में प्रोन्नत किया गया था। इससे पहले हेमंत गुप्ता मध्य प्रदेश हाई कोर्ट के मुख्य न्यायाधीश थे। उन्हें 2002 में पंजाब और हरियाणा हाई कोर्ट में न्यायाधीश के रूप में नियुक्त किया गया था।

'20 साल की मेहनत मायने रखती है....'
जस्टिस गुप्ता के बारे में बात करते हुए, भारत के मुख्य न्यायाधीश उदय उमेश ललित ने कहा कि उन्हें याद है कैसे वह लगभग 12 साल पहले एक वकील के रूप में कोर्ट के सामने पेश हुए थे और वह और जस्टिस गुप्ता के काम से हैरान थे। भारत के मुख्य न्यायाधीश उदय उमेश ललित ने कहा,''इन्होंने बहुत महान काम किए हैं। वो कोई भी फैसला दो सप्ताह में तैयार कर लेते हैं। ये एक ऐसे व्यक्ति हैं जिन्हें तुरंत निर्णय लिखने का समय मिल जाता है। बीस साल की मेहनत बहुत मायने रखती है। वह अपने योगदान से हमेशा हमारे साथ रहेंगे लेकिन उन्हें अपने परिवार और अपने पसंदीदा खेल गोल्फ के साथ कुछ समय बिताने का अब मोका मिलेगा।''












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