PM मोदी की खुलकर तारीफ करने वाले जस्टिस अरुण मिश्रा हुए सेवानिवृत्त, कई फैसलों के लिए किए जाएंगे याद

नई दिल्ली। सुप्रीम कोर्ट के जस्टिस अरुण मिश्रा आज अपने पद से रिटायर हो गए, पंरपरा के मुताबिक आज वो चीफ जस्टिस एस ए बोबडे के साथ बेंच में शामिल हुए, इस दौरान सीजेआई बोबडे ने जस्टिस अरुण मिश्रा की दिल खोलकर तारीफ की, उन्होंने कहा कि सहकर्मी के रूप में जस्टिस अरुण मिश्रा के साथ काम करना सौभाग्य की बात है, वो अपने कर्तव्यों का निर्वहन करने में साहस और धैर्य के प्रतीक रहे हैं। जस्टिस अरूण मिश्रा बहुत सारे अहम फैसलों के लिए जाने जाएंगे।

आइए एक नजर डालते हैं जस्टिस अरुण मिश्रा के अब तक के सफर पर...

आइए एक नजर डालते हैं जस्टिस अरुण मिश्रा के अब तक के सफर पर...

  • जस्टिस अरुण मिश्रा, तीन सदस्यीय खंडपीठ की अध्यक्षता कर रहे थे, इस खंडपीठ में जस्टिस बीआर गवई और जस्टिस कृष्ण मुरारी भी शामिल थे।
  • जस्टिस अरुण कुमार मिश्रा मूलरूप से मध्य प्रदेश के जबलपुर के रहने वाले हैं।
  • इन्होंने विज्ञान में परास्नातक लेने के बाद लॉ की पढ़ाई की।
  • अरूण मिश्रा के पिता रगोविंद मिश्रा जबलपुर हाई कोर्ट के जज थे।
  • ख़ुद उनकी बेटी भी दिल्ली हाई कोर्ट की वकील हैं।
ग्वालियर के जीवाजी विश्वविद्यालय में पढ़ाया भी

ग्वालियर के जीवाजी विश्वविद्यालय में पढ़ाया भी

  • लगभग 21 सालों तक वकालत करते रहने के बावजूद अरुण मिश्रा ने ग्वालियर के जीवाजी विश्वविद्यालय में कानून पढ़ाने का भी काम किया है।
  • साल 1999 में वो एमपी हाईकोर्ट के अतिरिक्त जज बने थे।
  • साल 2010 में उन्हें राजस्थान हाई कोर्ट शिफ्ट कर दिया गया।
  • साल 2010 में ही राजस्थान हाई कोर्ट के पूर्णकालिक मुख्य न्यायाधीश भी नियुक्त कर दिया गया।
  • वर्ष 2012 में वो कोलकाता हाई कोर्ट के मुख्य न्यायाधीश बने।
  • वर्ष 2014 में उन्हें सुप्रीम कोर्ट का जज बनाया गया।
प्रधानमंत्री नरेंद्र मोदी की खुलकर की थी तारीफ

प्रधानमंत्री नरेंद्र मोदी की खुलकर की थी तारीफ

प्रधानमंत्री नरेंद्र मोदी की खुलकर तारीफ करने की वजह से अरुण मिश्रा की काफी आलोचना हुए थी। न्यायमूर्ति मिश्रा ने इसी साल फरवरी के महीने में पीएम मोदी को अंतरराष्ट्रीय स्तर पर स्वीकृत दार्शनिक की संज्ञा देते हुए उन्हें सदाबहार ज्ञानी कहा था, जिसके बाद वो राजनीतिक पार्टियों के निशाने पर आ गए थे, उनके लिए मांग भी उठी थी कि उन्हें अदालत में सरकार के संबंधित चल रहे मामलों से खुद को अलग कर लेना चाहिए।

अरुण मिश्रा निम्नलिखित फैसलों के लिए याद किए जाएंगे

अरुण मिश्रा निम्नलिखित फैसलों के लिए याद किए जाएंगे

  • प्रशांत भूषण अदालत की अवमानना केस: सुप्रीम कोर्ट के वरिष्ठ वकील प्रशांत भूषण को अदालत की अवमानना केस में 1 रुपये का जुर्माना भरने की सजा दी गई है, ये सजा जस्टिस अरुण मिश्रा और जस्टिस बीआर गवई की बेंच ने ही सुनाया है, भूषण को 15 सितंबर तक जुर्माना भरने को कहा गया है, जुर्माना नहीं देने पर उन्हें तीन महीने की सजा होगी और 3 साल तक के लिए वकालत पर रोक लगा दी जाएगी।
  • शिवलिंग का संरक्षण: उज्जैन के महाकालेश्वर मंदिर मामले में सुप्रीम कोर्ट ने कहा है कि मंदिर के शिवलिंग पर कोई भी भक्त पंचामृत नहीं चढ़ाएगा, बल्कि वह शुद्ध दूध से पूजा करेंगे।
  • टेलीकॉम कंपनियों को दी राहत: टेलीकॉम कंपनियों को 31 मार्च, 2021 तक कुल बकाया का 10% भुगतान करना होगा।
  • रीयल एस्टेट कंपनी आम्रपाली: जस्टिस अरुण मिश्रा अरुण मिश्रा की अगुवाई वाली खंडपीठ ने रीयल एस्टेट कंपनी आम्रपाली की रुकी हुई परियोजनाओं को नैशनल बिल्डिंग्स कंस्ट्रक्शन कॉर्पोरेशन लिमिटेड के जिम्मे सौंप दिया।

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