मध्य प्रदेश के थाने में पत्रकार के कपड़े उतारे गए, क्या है पूरा मामला?

मध्य प्रदेश के सीधी ज़िले में एक पुलिस थाने की एक तस्वीर सोशल मीडिया पर वायरल हो रही है. इस तस्वीर में कुछ अर्धनग्न लोग खड़े नज़र आ रहे हैं. सोशल मीडिया पर दावा किया जा रहा है कि तस्वीर में थाने के भीतर अर्धनग्न खड़े लोग स्थानीय पत्रकार हैं.

Journalists clothes removed in Madhya Pradesh police station

बीबीसी ने इस पूरे घटनाक्रम के बारे में जानकारी जुटाने की कोशिश की.

https://twitter.com/ranvijaylive/status/1511992571614007304

क्या है पूरा मामला?

ये तस्वीर 2 अप्रैल, शाम क़रीब साढ़े आठ बजे सीधी कोतवाली की है. तस्वीर में दिख रहे आठ अर्धनग्न लोगों में से दो स्थानीय पत्रकार हैं और बाकी लोग नाट्यकर्मी हैं.

आरोप है कि ये लोग एक स्थानीय रंगकर्मी की गिरफ़्तारी का विरोध कर रहे थे जिसके बाद पुलिस ने इन सभी को पकड़ कर उनके कपड़े उतरवाए और थाने में इनकी परेड निकाली.

हालांकि पुलिस ने इस तरह के सभी आरोपों को ख़ारिज किया है.

तस्वीर में दिख रहे पत्रकार कनिष्क तिवारी ने बीबीसी से बात करते हुए कहा, "इस तस्वीर में दिख रहे लोगों में हम दो पत्रकार हैं, एक मैं और एक मेरा कैमरामैन, बाकी सभी स्थानीय नाट्यकर्मी और आरटीआई ऐक्टिविस्ट हैं जो एक मामले में रंगकर्मी नीरज कुंदेर की गिरफ़्तारी का विरोध कर रहे थे."

घटनाक्रम का ब्यौरा देते हुए कनिष्क दावा करते हैं, "स्थानीय पुलिस ने नीरज कुंदेर को फर्ज़ी फ़ेसबुक प्रोफ़ाइल बनाकर स्थानीय विधायक केदारनाथ शुक्ला के ख़िलाफ़ अपमानजनक टिप्पणी करने के आरोप में गिरफ़्तार किया था. नाट्यकर्मी इसी का विरोध कर रहे थे. मैं अपने कैमरामैन के साथ कवरेज करने गया था."

कनिष्क का आरोप है कि वो स्थानीय बीजेपी विधायक केदारनाथ शुक्ला के ख़िलाफ़ ख़बरें चलाते रहे हैं और उन्हीं के इशारे पर पुलिस ने नाट्यकर्मियों के साथ-साथ उन्हें भी हिरासत में लिया और उनके साथ मारपीट की.

कनिष्क आरोप लगाते हैं, "नाट्य कर्मी विरोध प्रदर्शन कर रहे थे. पुलिस ने उन्हें हिरासत में लिया तो मैं उसकी कवरेज कर रहा था. पुलिस ने मेरे कैमरामैन के साथ मुझे भी पकड़ लिया. हम सबको अर्धनग्न करके थाने में जुलूस निकाला गया. बाद में थानाध्यक्ष के कमरे में ये तस्वीर खींची गई."

कनिष्क का कहना है कि इस घटना के बाद उन्होंने कई बार पुलिस के दुर्व्यवहार की शिकायत करने की कोशिश की, लेकिन उनकी कोई सुनवाई नहीं हुई.

वहीं घटनाक्रम की पुष्ट करते हुए सीधी ज़िले के एसएसपी मुकेश कुमार कहते हैं, "नीरज कुंदेर एक रंगकर्मी हैं, उनकी गिरफ़्तारी के बाद लोग प्रदर्शन करने आए थे, थाने के बाहर आपत्तिजनक नारेबाज़ी कर रहे थे. पुलिस ने उन्हें समझाया, लेकिन वो नहीं माने. देर रात में प्रदर्शनकारियों को भी हिरासत में लिया गया था और विधिवत 151 के तहत गिरफ़्तार भी किया गया था."

मुकेश कुमार कहते हैं, "इन लोगों के ख़िलाफ़ एक मुक़दमा भी दर्ज किया गया है."

'किन नियमों के तहत ऐसा हुआ जांच कर रहे हैं'

हिरासत में लिए गए लोगों को अर्धनग्न किए जाने और उनकी तस्वीरें खींचे जाने के सवाल पर पुलिस अधीक्षक कहते हैं, "ये तस्वीरें मेरे संज्ञान में हैं और इनकी जांच की जा रही है कि किन हालात में ये तस्वीरें खींची गई हैं. डीएसपी को इसकी जांच सौंपी गई है. जांच रिपोर्ट के बाद दंडात्मक कार्रवाई की जाएगी."

जो तस्वीर सोशल मीडिया पर वायरल हुई है उसमें पत्रकार और बाकी लोग अर्धनग्न दिखाई दे रहे हैं. ये तस्वीर मानवीय गरिमा के भी ख़िलाफ़ है. हालांकि सीधी पुलिस अभी ये जांच कर रही है कि 'किन नियमों के तहत' ऐसा हुआ है.

पुलिस अधीक्षक मुकेश कुमार कहते हैं, "किन परिस्थितियों में ऐसा हुआ है, किन नियमों के तहत ऐसा किया गया है हम इसकी जांच करा रहे हैं, यदि ये नियम विरुद्ध हुआ तो हम थाना प्रभारी समेत बाकी पुलिसकर्मियों पर कार्रवाई करेंगे."

पुलिस अधीक्षक कहते हैं, "मैं जांच रिपोर्ट का इंतज़ार कर रहा हूं. यदि पुलिसकर्मी रिपोर्ट में दोषी पाए गए तो हम सख़्त कार्रवाई करेंगे."

कनिष्क को पत्रकार नहीं मान रही पुलिस

क्या तस्वीरों में दिख रहे लोग पत्रकार हैं, इस सवाल पर पुलिस अधीक्षक कहते हैं, "वो बाइट लेते रहते थे लेकिन किसी अधिकृत मीडिया से वो नहीं हैं. जहां तक मेरी जानकारी है वो एक स्थानीय यूट्यूबर हैं जो यूट्यूब पर ख़बरें डालते हैं."

कनिष्क तिवारी का आरोप है कि स्थानीय विधायक के कहने पर पुलिस ने ऐसा किया है. क्या पुलिस ने किसी के प्रभाव में ये कार्रवाई की, इस सवाल पर पुलिस अधीक्षक कहते हैं, "ये आरोप बेबुनियान है. कनिष्क तिवारी के ख़िलाफ़ पहले से ही एक मुक़दमा कायम है जिसकी जांच की जा रही है. 2021 में वो एक हॉस्टल में घुस गए थे, इस घटना के संबंध में आईपीसी 452 का मुक़दमा दर्ज हुआ था जिसकी जांच चल रही है. हालांकि किसी भी मामले में उन्हें गिरफ़्तार नहीं किया गया है."

कनिष्क तिवारी ने स्थानीय बीजेपी विधायक केदारनाथ शुक्ल पर पुलिस को प्रभावित करने के आरोप लगाए हैं. कनिष्क का आरोप है कि वो विधायक के ख़िलाफ़ अपने यूट्यूब चैनल के माध्यम से ख़बरें लिखते रहे हैं, इसलिए ही उन्हें निशाना बनाया गया है.

हालांकि केदारनाथ शुक्ल ऐसे सभी आरोपों को ख़ारिज करते हैं. बीबीसी से बात करते हुए विधायक शुक्ला ने कहा, "पत्रकारों के ख़िलाफ़ कोई घटना नहीं हुई है, किसी पत्रकार ने आरोप नहीं लगाया है, वो व्यक्ति पत्रकार नहीं है, आप उसे पत्रकार न कहें. इससे ज़्यादा मैं इस मामले में कुछ भी नहीं कहूंगा."

जब बीबीसी ने विधायक से पूछा कि क्या थाने में ये घटना हुई है या नहीं तो उन्होंने कहा, "ये घटना हुई है लेकिन किसी पत्रकार के साथ नहीं हुई है."

वहीं कनिष्क का दावा है कि वो 'एमपी संदेश' न्यूज़ के नाम से यूट्यूब चैनल चलाते हैं जिसके एक लाख से अधिक फ़ॉलोवर हैं. कनिष्क का दावा है कि वो राष्ट्रीय मीडिया से भी जुड़े रहे हैं.

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