SC-ST एक्ट के तहत साजिश की बू? बाड़मेर का पत्रकार पटना में गिरफ्तार

नई दिल्ली। एससी-एसटी कानून के तहत बाड़मेर के रहने वाले पत्रकार दुर्ग सिंह राजपुरोहित की गिरफ्तारी हुई है, जिसके बाद अब यह मामला सवालों के घेरे मे आ गया है। इस गिरफ्तारी से एससी-एसटी कानून के दुरुपयोग पर सवाल खड़े हो रहे हैं। पिछले 18 सालों से क्राइम रिपोर्टिंग कर रहे राजस्थान के रहने वाले राजपुरोहित पर राकेश पासवान नाम के एक युवक ने एससी एसटी एक्ट के तहत बिहार के पटना में मामला दर्ज करवाया, जिसके बाद बाड़मेर पुलिस ने उन्हें गिरफ्तार कर बिहार पुलिस को सौंप दिया है। कोर्ट ने राजपुरोहित को 1 सिंतबर तक न्यायिक हिरासत में भी भेज दिया है।

राजस्थान के पत्रकार की पटना में गिरफ्तारी का सच क्या है?

बिहार के रहने वाले एक दलित युवक का आरोप है कि राजपुरोहित ने उसे कथित रूप से प्रताड़ित किया। दलित युवक ने पत्रकार के खिलाफ दुर्गेश सिंह नाम से एफआईआर दर्ज करवाई है। दलित युवक ने अपने बयान में कहा, 'पत्थर तोड़वाने के लिए दुर्गेश सिंह राजस्थान ले गए थे। वहां मैंने (राकेश) 6 माह काम किया और मुझे मजदूरी भी नहीं दी गई।' उसने आरोप लगाया कि वह छह माह काम किया और वापस आ गया, तो दुर्गेश उसे लेने के लिए यहां आए और चलने के लिए बोले। जब उसने अपने पिता की तबीयत खराब होने के कारण बताते हुए जाने से मना कर दिया, तो राजपुरोहित ने उसे जाति सूचक शब्दों का इस्तेमाल किया।

अब इस पूरे मामले में साजिश की बू इसलिए आ रही है क्योंकि 'दैनिक भास्कर' से बात करते हुए दलित युवक राकेश ने कहा कि उसने किसी के खिलाफ एफआईआर दर्ज नहीं करवाई है। राकेश ने दैनिक भास्कर से कहा कि वह दीघा में संजय सिंह की जेसीबी चलाता था। उसने कहा कि दो महीने पहले दीघा में संजय सिंह की किसी ने जेसीबी को जला दी थी। जिसके बाद, संजय सिंह ने उसे शिकायत दर्ज करने के लिए दबाव डाला था। अब एफआईआर और राकेश की बातों में रात-दिन का फर्क दिखाई दे रहा है। राकेश के मुताबिक (दैनिक भास्कर से बात करते वक्त), वह कभी राजस्थान गया ही नहीं।

उधर राजपुरोहित कहना है कि उसने अपनी जिंदगी बिहार की जमीन पर पैर नहीं रखा, तो फिर क्राइम मैंने कैसे कर दिया। एक न्यूज चैनल से बात करते हुए राजपुरोहित के पिता ने भी कहा कि उनका बेटा कभी बिहार गया ही नहीं।

अब सवाल यह उठता है कि कौन वह शख्स है, जिसने राजपुरोहित के खिलाफ मुकदमा दायर किया है और फर्जी गवाहियां भी दी है। फिलहाल यह जांच का विषय जरूर है, लेकिन यह एससी-एसटी एक्ट जो बिना किसी के खिलाफ जांच किए ही एक शख्स को आरोपी घोषित कर देती है, इस पर आने वाले वक्त में विवाद जरूर होने की संभावना है।

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