JNU Violence: दिल्ली पुलिस ने माना- हमले के वक्त जेएनयू कैंपस में थे, अभी तक नहीं हुई कोई गिरफ्तारी
नई दिल्ली। जवाहरलाल नेहरू विश्वविद्यालय में 5 जनवरी को नकाबपोश हमलावरों ने कई छात्रों की पिटाई की थी। इस हमले में कुछ शिक्षकों को भी चोट आई थी। इस हमले के बाद दिल्ली पुलिस के रवैए पर लगातार सवाल उठ रहे हैं क्योंकि एफआईआर दर्ज होने के बाद भी पुलिस अभी तक किसी भी आरोपी को गिरफ्तार नहीं कर सकी है। कार्यशैली पर उठ रहे सवालों के बीच दिल्ली पुलिस ने ये माना है कि हिंसा के वक्त उनकी टीम जेएनयू में थी।

पुलिस को देखकर भागे थे उपद्रवी, FIR
एनडीटीवी की खबर के मुताबिक, एफआईआर में कहा गया है कि 5 जनवरी को एक इंस्पेक्टर और कुछ अन्य पुलिसकर्मियों की एडमिनिस्ट्रेटिव ब्लॉक में तैनाती थी। पुलिस को दोपहर 3.45 बजे पेरियार हॉस्टल में हिंसक झड़प की सूचना मिली और उनकी टीम वहां पहुंची। पुलिस ने वहां 40-50 नकाबपोशों को छात्रों की पिटाई करते और संपत्ति को नुकसान पहुंचाते देखा। एफआईआर में कहा गया है कि पुलिस को देखकर नकाबपोश वहां से भाग गए।

साबरमती हॉस्टल के पास हुई जमकर तोड़फोड़
एफआईआर में कहा गया है कि पुलिस को शाम 7 बजे साबरमती हॉस्टल में हमले की सूचना मिली। इसके बाद पुलिस मौके पर पहुंची तो देखा कि 50-60 उपद्रवी तोड़फोड़ कर रहे थे और वे पुलिस को देखकर भाग गए। हिंसा की सबसे बड़ी घटना साबरमती हॉस्टल के पास बताई जा रही है जहां वीडियो में नकाबपोश छात्रों पर हमला करते और संपत्ति को नुकसान पहुंचाते देखे गए। इस हमले में 30 लोग घायल हुए जिनमें जेएनयू फैकल्टी के 4 लोग भी शामिल हैं।

3.45 बजे पेरियार हॉस्टल के पास हमले की सूचना दी गई थी
इस एफआईआर में कहा गया है कि 3.45 बजे पेरियार हॉस्टल के पास हो रहे उपद्रव को काबू करने के लिए जेएनयू प्रशासन की तरफ पुलिस को पत्र लिखा गया था। जेएनयू प्रशासन के इस अनुरोध पर और अधिक पुलिस बल को मौके पर बुलाया गया और हालात को काबू में करने की कोशिश की गई। पुलिस द्वारा छात्रों से शांति बनाए रखने की अपील भी की गई।

दिल्ली पुलिस के पीआरओ ने क्या कहा था
इसके पहले, दिल्ली पुलिस के पीआरओ एमएस रंघावा ने मंगलवार को बताया था कि आमतौर पर पुलिस एडमिनिस्ट्रेटिव ब्लॉक पर तैनात रहती है, लेकिन झड़प वहां से कुछ दूरी पर हुई थी। जेएनयू प्रशासन ने पुलिस से शाम 7.45 बजे हालात को काबू में करने का आग्रह किया था, जिसके बाद कैंपस में फ्लैग मार्च किया गया। जेएनयू में हिंसा की घटना को लेकर सवाल उठ रहे हैं कि अभी तक पुलिस आरोपी हमलावरों की पहचान क्यों नहीं कर सकी है और उनको गिरफ्तार क्यों नहीं कर पाई है।
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