जेएनयू छात्र उमर खालिद की नजरों में बुरहान वानी क्रांतिकारी!
नई दिल्ली। देशद्रोह के आरोप में घिरे जेएनयू के छात्र उमर खालिद अब एक नए विवाद में हैं। खालिद ने कश्मीर में मारे गए हिजबुल मुजाहिद्दीन के आतंकी और जम्मू कश्मीर कमांडर बुरहान वानी को एक क्रांतिकारी बताया है। अपनी
फेसबुक पोस्ट में खालिद ने वानी की तुलना मार्क्सवादी क्रांतिकारी चे ग्वेरा से कर डाली है।

क्या लिखा है खालिद ने
खालिद ने अपने फेसबुक अकाउंट पर लिखा, 'चे ग्वेरा ने कहा था- अगर मैं मर जाऊं और कोई दूसरा मेरी बंदूक उठाकर गोलियां चलाता रहे तो मुझे परवाह नहीं, लेकिन ऐसे ही शब्द बुरहान वानी के भी रहे होंगे।'
खालिद यहीं नहीं रुके और उन्होंने लिखा, 'बुरहान को मौत से डर नहीं था। वह बंदिशों में जीने वाली जिंदगी से डरता था। उसने इसका विरोध किया। उसने एक आजाद शख्स के तौर पर जिंदगी को जिया और आजाद होकर ही मर गया।
फिर भारत विरोधी बातें
खालिद ने एक बार फिर भारत विरोधी बात करते हुए लिखा, ' भारत! तुम उन लोगों को किस तरह हराओगे जिन्होंने अपने डर को हरा दिया है?' खालिद ने अपनी पोस्ट- 'रेस्ट इन पावर बुरहान! कश्मीर के लोगों के साथ पूरी सहानुभूति,' इसके साथ खत्म की है।
खालिद ने कसा तंज
एक दूसरी पोस्ट में उमर खालिद ने तंज कसा है। उमर ने लिखा, 'सिर्फ बुरहान वानी का ही क्यों, मैं मौतों का, बलात्कार का, टॉर्चर का, लापता होने का और अफ्सपा का, हर बात का जश्न मनाउंगा। मैं समीर राह की मौत पर भी सफाई दूंगा। वह 12 साल का लड़का जिसे वर्ष 2010 में पीट पीटकर मार दिया गया। आयशा और नीलोफर का शोपियां में कभी रेप कर मारा ही नहीं किया। वह हकीकत में नहर में डूब गई थीं।'
क्या बदलेगी जमीनी हकीकत
खालिद ने लिखा- आज से मैं शुतुरमुर्ग बन जाउंगा, मैं एक कायर बन जाउंगा जिसे सत्ता में काबिज लोगों से कायरों को दबाने के लिए खूब तारीफें मिलती हैं लेकिन राष्ट्रवादियों से मेरा एक छोटा सवाल भी है, क्या ऐसा करने से कश्मीर की जमीनी हकीकत बदल जाएगी?












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