झारखंड के लिए वरदान है मोदी सरकार की ये परियोजना, विकास को मिली रफ्तार, रोजगार के भी अवसर बढ़ेंगे
Jharkhand news: झारखंड उद्योग स्थापित करने के लिए बेहतर जगह है। केंद्र सरकार झारखंड की क्षमताओं एवं संभावनाओं में विश्वास दिखाते हुए पिछले कई वर्षों से इस प्रदेश की आर्थिक और औद्योगिक स्थिति संवारने मे जुटी है। केंद्र की ओर से राज्य सरकार को निर्देशों के साथ-साथ हर प्रकार की सहायता भी उपलब्ध करायी जा रही है। परिणामस्वरूप, राज्य में सकारात्मक परिवर्तन दिखने लगे हैं।

राज्य में विकास के स्तर को बनाए रखने के लिए आर्थिक गतिविधियों को बढ़ावा देने की जरूरत है, जिसके लिए झारखंड में आधारभूत संरचना और यातायात संपर्क अर्थात इंफ्रास्ट्रक्चर और कनेक्टिविटी पर विशेष ध्यान दिया जा रहा है। अनेक पथ परियोजनाओं के द्वारा प्रदेश के यात्री एवं माल परिवहन व्यवस्था में अभूतपूर्व विकास हुआ है।
मल्टी-मॉडल टर्मिनल से झारखंड के कनेक्टिविटी में हुआ सुधार
कनेक्टिविटी में सुधार और उत्पादों की आवाजाही के लिए, झारखंड के साहिबगंज क्षेत्र में, गंगा नदी पर केंद्र सरकार द्वारा एक मल्टी-मॉडल टर्मिनल का निर्माण किया गया है जो जलमार्ग, सड़क और रेल, परिवहन के तीनों माध्यमों को प्रोत्साहन देता है। ये मल्टी-मॉडल टर्मिनल, जल मार्ग विकास परियोजना के अंतर्गत बनाए गए हैं, जिससे 1500 से 2000 टन के वजन वाले बड़े जहाज़, आसानी से वाराणसी, साहिबगंज और हल्दिया वाले रूट पर आ-जा सकें।

इस परियोजना का उद्देश्य है अंतर्देशीय जलमार्गों का ज्यादा से ज्यादा उपयोग करना, विशेष रूप से मालवाहक जहाज़ों के लिए। इससे पर्यावरण की सुरक्षा और ईंधन की बचत सुनिश्चित होगी।
साहिबगंज के इस टर्मिनल ने झारखंड और बिहार के उद्योगों का वैश्विक स्तर पर विस्तार किया है साथ ही जलमार्ग के माध्यम से भारत और नेपाल के बीच कार्गो परिवहन को बढ़ााव दिया है।
अब इस टर्मिनल की सहायता से कोयले को आसानी से उन थर्मल पावर प्लाटों तक पहुंचाया जा रहा है, जो इलाहाबाद से हल्दिया के राष्ट्रीय जलमार्ग 1 यानी गंगा-भागीरथी-हुगली नदियों के पास स्थित हैं। कोयले के अलावा, पत्थर के टुकड़े, उर्वरक, सीमेंट और चीनी जैसे उत्पादों को भी टर्मिनल के जरिए भेजा जाता है।
अभी इस ट्रमिनल की सालाना क्षमता है 30 लाख टन, जो आने वाले समय में बढ़ कर 55 लाख टन तक पहुंच सकती है। टर्मिनल की सीमा से लगे 335 एकड़ जमीन पर एक फ्रेट विलेज बनाने का भी प्रस्ताव है, जिससे यहां के स्थानीय लोगों की सामाजिक और आर्थिक स्थिती में भी सुधार आएगा।
साहिबगंज टर्मिनल से भी मिली मदद
गंगा नदी में बने टर्मिनलों में, साहिबगंज दूसरा टर्मिनल है, जो 290 करोड़ रुपये की लागत से, 2 वर्षों में बनकर तैयार हुआ है। वाराणसी-साहिबगंज-हल्दिया, इन तीनों टर्मिनलों के निर्माण के लिए नदी की नौवहन प्रणाली को मजबूत किया गया। संरक्षण कार्य, आधुनिक नदी सूचना प्रणाली, डिजिटल ग्लोबल पोजेश्निंग सिस्टम (जीपीएस), रात के लिए विशेष नौवहन सुविधाएं और चैनल मार्किंग के आधुनिक तरीकों को अपनाया गया है। इसके अलावा नए और अत्याधुनिक नेविगेशनल लॉक का भी निर्माण किया गया है, जिसकी मदद से जहाज़, जलस्तर के अनुसार नदी में खुद को ऐडजस्ट कर सकते हैं।
यह टर्मिनल राजमहल क्षेत्र स्थित स्थानीय खदानों से एनडब्ल्यू-I पर स्थित विभिन्न ताप विद्युत संयंत्रों को घरेलू कोयले की ढुलाई करने में महत्वपूर्ण भूमिका निभाता है। इसके जरिए कोयले के अलावा गिट्टी (स्टोन चिप्स), उर्वरकों, सीमेंट और चीनी की भी ढुलाई होती है।
4000 लोगों को मिलेगा रोजगार
इस मुश्किल परियोजना के निर्माण में सटीक योजना के साथ आपसी तालमेल का होना भी जरूरी है। इस योजना को सफल बनाने के लिए, नरेंद्र मोदी के नेतृत्व वाली केंद्र सरकार ने राज्य सरकार की आर्थिक, तकनीकि और मानव संसाधन के रूप, हर तरह से मदद करी है। आने वाले समय में यह परियोजना झारखंड में करीब 4000 लोगों को प्रत्यक्ष या परोक्ष रूप से रोजगार देने में सहायक होगी। इसके अतिरिक्त, कार्बन उत्सर्जन को कम कर हमारे पर्यावरण को साफ बनाए रखने में भी इस परियोजना का महत्त्वपूर्ण योगदान होगा।
साहिबगंज टर्मिनल की विशेषताएं
- राष्ट्रीय जलमार्ग-1 (गंगा नदी) पर दूसरा मल्टी-मॉडल टर्मिनल
- मल्टी-मॉडल टर्मिनल के प्रथम चरण की लागत : 290 करोड़ रुपये
- जेट्टी: लंबाई 270 मीटर x चौड़ाई 25 मीटर, बर्थिंग और लंगर की सुविधा के साथ।
- एक मोबाइल हार्बर क्रैन












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