संघर्ष का सोना: पैरालिंपिक गोल्ड मेडलिस्ट सुमित अंतिल का गोल्डन ब्वॉय 'नीरज चोपड़ा' से खास का रिश्ता
संघर्ष का सोना: पैरालिंपिक गोल्ड मेडलिस्ट सुमित अंतिल का गोल्डन ब्वॉय 'नीरज चोपड़ा' से खास का रिश्ता
नई दिल्ली। टोक्यो पैरालिंपिक मुकाबले में दुनियाभर के एथलिट टोक्यो पहुंचे। घमासान मुकाबले में भारत ने शानदार प्रदर्शन करते 19 मेडल जीत लिए। भारत के गोल्डन ब्वॉय सुमित अंतिल ने जैवलिन थ्रो में देश को सोना दिलाया। सड़क हादसे में सुमित का पैर काटना पड़ गया था। पैर भले कट गए, लेकिन सुमित का हौंसला नहीं टूटा। सुमित पहलवान बनना चाहते थे,लेकिन इस हादसे के बाद उन्होंने अपना खेल बदल दिया। सुमित अंतिल को गुरु विरेंद्र धनखड़ का साथ मिला, वो जान गए थे कि सुमित में कुछ कर गुजरने का जज्बा है। वो लक्ष्य को पाने के लिए कुछ भी कर गुजरने की ताकत रखता है। सुमित ने सफर की शुरुआत की। काफी तकलीफें झेलनी पड़ी, लेकिन सुमित का जज्बा नहीं टूटा। सुमित ने टोक्यो पैरालिंपिक में पुरुषों की एफ64 स्पर्धा में वर्ल्ड रिकॉर्ड बनाते हुए गोल्ड मेडस अपने नाम कर लिया।

वनइंडिया के साथ खास बातचीत में सुमित ने बताया कि वो नीरज चोपड़ा काफी अच्छे दोस्त हैं। नीरज से उन्हें काफी कुछ सीखने को मिलता है। उन्होंने नीरज के साथ जैवलिन की ट्रेनिंग भी की, जिसने उन्हें काफी मदद भी की। सुमित नीरज चोपड़ा को नीरज भाईसा कहकर बुलाते हैं। उन्होंने कहा कि नीरज भाईसा ने हमेशा से मेरा हौंसला बढ़ाया। मेरे खेल की तारीफ करते हुए वो कहते कि बहुत तगड़ा है तू। जब सुमित ने पैरालिंपिक का गोल्ड मेडल अपने नाम किया तो नीरज ने ट्वीट करते हुए इसे खतरनाक खेल बताया। नीरज के लिए सुमित के मन में सम्मान दिखा, उन्होंने कहा कि जब नीरज ने ओलंपिक में जैलविन में गोल्ड मेडल जीता तो उनका उत्साह और भी बढ़ गया। उन्होंने अपनी जीत का श्रेय नीरज चोपड़ा को दिया है। उन्होंने कहा कि नीरज ने मेरी उपलब्धि में सबसे बड़ी भूमिका निभाई। उन्होंने कहा कि जब नीरज चोपड़ा का पदक आया तो उनपर दवाब बढ़ गया था पैरालिंपिक में बेहतर प्रदर्शन करने और मेडल जीतने की। उन्होंने कहा कि नीरज हमेशा से मुझे यह कहकर प्रेरित करते हैं कि आप बहुत मजबूत और फिट हैं। आपमें बहुत कुछ कर गुजरने का जज्बा है।
स्टार की तरह फील करता हूं
मेडल जीतने के बाद सुमित ने कहा कि उनकी जीत का लोगों पर असर पड़ा है। लोगों ने उनके कोच से संपर्क किया है, जैवलिन सीखने के लिए। मुझे मेडल जीतने के बाद लोग पहचानने लगे हैं, मुझे स्टार की तरह फीलिंग आती है। उन्होंने कहा कि इस फीलिंग को मैं कभी अपने ऊपर हावी नहीं होने देना चाहता। मैं लगातार प्रैक्टिस कर रहा हूं। अपना लक्ष्य हासिल करने के लिए। सुमित ने कहा कि वो जीत से खुश हैं और इसकी खुशी को वो जीना चाहत हैं, लेकिन वो अपने टारगेट में जुट गए हैं।












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