जावेद अख्तर ने फिर साधा भाजपा पर निशाना, कहा- ये कंवल के फूल कुम्हलाने लगे हैं

नई दिल्ली। लोकसभा चुनाव 2019 (Lok Sabha Election 2019) के पांच चरण के मतदान हो चुके हैं और अब दो चरण के मतदान बाकी हैं, एक तरह से चुनाव अपने अंतिम दौर पर है लेकिन नेताओं के विवादित बयान चरम अवस्था पर, विरोधी दल ही नहीं बल्कि देश की कुछ चुनिंदा हस्तियों ने भी इस वक्त विवादित बयान को लेकर मोर्चा खोला हुआ है, जिसमें सबसे बड़ा नाम मशहूर गीतकार और लेखक जावेद अख्तर(Javed Akhtar) का है।

जावेद अख्तर ने फिर साधा भाजपा पर निशाना

जिन्होंने पत्रकार स्वाति चतुर्वेदी के ट्वीट पर रिप्लाई करके लोगों को एक बहस का मौका दे दिया है, दरअसल स्वाति ने अपने ट्वीट में भाजपा के पू्र्व मंत्री का जिक्र करते हुए लिखा था कि हम बतौर एक पार्टी आज क्या बन गए हैं, हमने संदिग्ध आतंकी प्रज्ञा ठाकुर को चुनाव मैदान में उतारा जिसने शहीद हेमंत करकरे का अपमान किया और अब हमारे प्रधानमंत्री नरेंद्र मोदी (PM Narendra Modi) राजीव गांधी का अपमान कर रहे हैं, जिनकी हत्या हुई थी, क्या वाकई वोटर को यह सब बातें पसंद हैं?'

जावेद अख्तर ने कसा तंज

भाजपा की ओर से तो इस ट्वीट पर कोई रिएक्शन नहीं आया लेकिन जावेद अख्तर ने इस पर जरूर अपनी प्रतिक्रिया दी, उन्होंने दुष्यंत कुमार की दो पंक्तियों के साथ रिप्लाई किया, 'अब तो इस तालाब का पानी बदल दो/ ये कंवल के फूल कुम्हलाने लगे हैं, जावेद के इस ट्वीट के बाद सोशल मीडिया पर एक बार फिर से भाजपा को लेकर बहस छिड़ गई है, कुछ ने जावेद अख्तर को सही ठहाराया है तो कुछ उनके विरोध में ट्वीट कर रहे हैं।

जावेद अख्तर की होने लगी आलोचना

गौरतलब है कि हाल ही में जावेद अख्तर को करणी सेना की ओर से धमकी दी गई थी, महाराष्ट्र करणी सेना के प्रमुख जीवन सिंह सोलंकी ने वीडियो जारी कर जावेद अख्तर से माफी मांगने कहा था और धमकी दी थी कि अगर जावेद ऐसा नहीं करते हैं तो करणी सेना उन्हें घर में घुसकर मारेगी, दरअसल करणी सेना जावेद अख्तर से बुरी तरह नाराज है क्योंकि जावेद अख्तर ने कहा था कि देश में बुर्का पहनने पर प्रतिबंध लगाने पर उन्‍हें कोई आपत्ति नहीं है, लेकिन केंद्र सरकार राजस्थान में होने वाले लोकसभा सीटों के लिए मतदान से पहले घूंघट प्रथा पर भी प्रतिबंध लगाए।

जावेद अख्तर ने दी थी सफाई लेकिन

हालांकि बवाल मचने पर जावेद अख्तर ने ट्विटर पर सफाई देते हुए लिखा था कि कुछ लोग मेरे बयान को तोड़-मरोड़कर गलत मतलब निकाल रहे हैं। मैंने कहा था कि शायद श्रीलंका में सुरक्षा कारणों से प्रतिबंध किया गया है लेकिन बुर्के या घूंघट को प्रतिबंधित करना महिला सशक्तीकरण के लिए जरूरी है।

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