जावेद अख्तर बोले- 'तालिबान के विचार किसी भी भारतीय को सही नहीं लग सकते', RSS पर भी कसा तंज
जावेद अख्तर बोले- 'तालिबान के विचार किसी भी भारतीय को सही नहीं लग सकते', RSS पर भी कसा तंज
मुंबई, 04 सितंबर: मशहूर कवि और गीतकार जावेद अख्तर ने अफगानिस्तान में तालिबान के कब्जे और उनके विचारों की आलोचना की है। गीतकार जावेद अख्तर ने कहा है कि तालिबान के विचार किसी भी भारतीय को सही नहीं लग सकते हैं। जावेद अख्तर ने कहा, देश में मुस्लिमों का एक बहुत ही छोटा हिस्सा है, जो तालिबान के समर्थन में है लेकिन देश के मुसलमानों की सोच ये नहीं है। कोई भी भारतीय तालिबान के विचारों का समर्थन नहीं कर सकता है। जावेद अख्तर ने तालिबान की आलोचना के साथ-साथ आरएसएस, विश्व हिंदू परिषद और बजरंग दल पर तंज किया और कहा कि इनके समर्थन करने वाले भी कुछ ऐसा ही करते हैं। उन्होंने कहा कि दक्षिणपंथियों की विचारधारा भी दमनकारी है।

दक्षिणपंथी खुद को प्रमोट करने के लिए कर रहे हैं इसका इस्तेमाल: जावेद अख्तर
एनडीटीवी न्यूज चैनल के मुताबिक जावेद अख्तर ने कहा, तालिबान और तालिबान की तरह बनने की चाहत रखने वालों के बीच अजीबोगरीब और असाधारण समानता है। विडंबना यह है कि दक्षिणपंथी इसका इस्तेमाल खुद को बढ़ावा देने और प्रमोट करने के लिए करते हैं ताकि वे ठीक उसी तरह बन सकें, जिसका वह विरोध कर रहे हैं। ये एक दिलचस्प बात है।

तालिबान का समर्थन करने वाले मुस्लिमों पर क्या बोले जावेद अख्तर?
देश के मुस्लिमों जो तालिबान का समर्थन कर रहे हैं, इस मामले पर जावेद अख्तर ने कहा, ''मुझे उनका बयान शब्दशः याद नहीं है, लेकिन कुल मिलाकर यह भावना थी कि उन्होंने अफगानिस्तान में तालिबान की वापसी का स्वागत किया। लेकिन ये लोग हमारे देश की मुस्लिम आबादी का एक बहुत छोटा सा हिस्सा हैं। मैंने भारत के जिन मुसलमानों से बात की उनमें से अधिकांश हैरान थे कि कुछ लोगों ने इस तरह का बयान कैसे दिया है।''

'भारत का मुसलमान अच्छी शिक्षा और नौकरी चाहता है'
जावेद अख्तर ने कहा, ''आज भारत में अधिकांश युवा मुसलमान चाहते हैं कि उनके बच्चे अच्छे स्कूलों में पढ़ें, अच्छी शिक्षा हो और अच्छी नौकरी मिले। लेकिन दूसरी ओर कुछ ऐसे भी हैं जो इस तरह की प्रतिगामी सोच में विश्वास करना चाहते हैं। जहां महिला और पुरुषों स अलग-अलग व्यवहार होता है, वहीं प्रतिगामी मानसिकता को बढ़ावा मिलता है। लेकिन जैसा मैंने कहा, ये लोग मुट्ठी भर हैं, इसलिए उन्हें जो चाहिए वो कहने दें, वे इसे हासिल नहीं करेंगे।''

'दक्षिणपंथी हिंदू राष्ट्र चाहते हैं'
जावेद अख्तर ने कहा, ''दुनियाभर में दक्षिणपंथी समान चीजें चाहते हैं। जैसे तालिबान एक इस्लामिक स्टेट चाहता है, वैसे ही दक्षिणपंथी हिंदू राष्ट्र चाहते हैं। ये लोग एक ही मानसिकता के हैं - चाहे वह मुस्लिम, ईसाई, यहूदी या हिंदू हो। यह पूर्ण तालिबान की तरह बनने के लिए एक तरह का ड्रेस-रिहर्सल है। इसमें कोई शक नहीं है कि तालिबान बर्बर है और उनकी हरकतें निंदनीय हैं, लेकिन आरएसएस, वीएचपी और बजरंग दल का समर्थन करने वाले सभी एक जैसे हैं।''

''भारत कभी तालिबानी देश नहीं बनेगा''
जावेद अख्तर ने कहा, ''भारत मूल रूप से एक धर्मनिरपेक्ष देश है। तालिबान का विचार किसी भारतीय को आकर्षित नहीं कर सकता है। भारत एक धर्मनिरपेक्ष राष्ट्र है और लोग, जनसंख्या काफी हद तक धर्मनिरपेक्ष है, लेकिन आरएसएस और वीएचपी जैसे संगठनों का समर्थन करने वाले और गोलवलकर आदि जैसे लोग हैं, जिनकी विचारधारा 1930 के दशक के नाजियों के समान है। लेकिन फिर भी मैं कह सकता हूं कि भारत कभी तालिबानी देश नहीं बनेगा।''












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