घाटी के 'पत्थरबाज' को मिले 10 लाख- जम्मू-कश्मीर मानव अधिकार आयोग

जम्मू-कश्मीर मानव अधिकार आयोग ने सूबे की बीजेपी- पीडीपी की साझा सरकार से फारूक अहमद डार को दस लाख रुपए मुआवजे के तौर पर देने को कहा है।

नई दिल्ली। एक बार फिर से कश्मीरी युवक को जीप की बोनट पर बांधने को लेकर विवाद खड़ा हो सकता है। इस मामले में जम्मू-कश्मीर मानव अधिकार आयोग ने सूबे की सरकार से फारूक अहमद डार को दस लाख रुपया मुआवजा देने को कहा है। फारुक अहमद डार वही हैं, जिन्हें पत्थरबाजों से निपटने के लिए सेना जीप के बोनट से बांधकर ढाल की तरह इस्तेमाल किया था।

फारूक अहमद डार मिले को 10 लाख रुपये मुआवजा

फारूक अहमद डार मिले को 10 लाख रुपये मुआवजा

जम्मू-कश्मीर मानव अधिकार आयोग ने सूबे की बीजेपी- पीडीपी की साझा सरकार से फारूक अहमद डार को दस लाख रुपए मुआवजे के तौर पर देने को कहा है। जिसके बाद से ये मामला एक बार फिर से गर्मा सकता है। घाटी में पत्थरबाजों के बीच घिरे सेना के जवानों को बचाने के लिए मेजर नितिन लितुल गोगोई ने डार को जीप के बोनट से बांधने का फैसला लिया था।

फिर शुरू हो सकता है विवाद

फिर शुरू हो सकता है विवाद

आयोग के फैसले से एक बात तो साफ हो गई है कि फारूक अहमद डार पीड़ित है जबकि सेना उसको पत्थरबाज बताती रही है। ऐसे में आयोग के फैसले के बाद से विवाद होना लाजिमी है। सबसे बड़ी बात ये कि इस मामले पर सूबे में सरकार चला रही बीजेपी और पीडीपी की राय अलग-अलग है। बीजेपी मेजर गोगोई के साथ है तो जम्मू-कश्मीर सरकार ने मेजग गोगोई के साथ मुकदमा दर्ज किया था।

 सेना ने गोगोई को किया है सम्मानित

सेना ने गोगोई को किया है सम्मानित

मेजर गोगोई के इस फैसले का उस समय काफी विरोध हुआ था। कई राजनीतिक दलों ने मेजर गोगोई के फैसले पर सवाल उठाया था हांलाकि बीजेपी मेजर गोगोई के साथ थी। बाद में सेना ने मेजर गोगोई को सम्मानित किया था और सेना प्रमुख बिपिन रावत ने गोगोई के फैसले की तारीफ की थी।

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