जम्‍मू कश्‍मीर: पिछले वर्ष सबसे ज्‍यादा पत्‍थरबाजों को किया गया है गिरफ्तार

श्रीनगर। जम्‍मू कश्‍मीर में सुरक्षाबलों पर पत्‍थरबाजी करने वाले लोगों की गिरफ्तारी में पिछले वर्ष तेजी से इजाफा हुआ है। सरकार की ओर से जारी आंकड़ों पर अगर यकीन करें तो साल 2018 में, 2017 की तुलना में 1,458 ज्‍यादा पत्‍थरबाजों को गिरफ्तार किया गया है। गौरतलब है हाल ही में गृहमंत्री अमित शाह कश्‍मीर के दौरे से लौटे हैं। गृहमंत्री यहां पर सुरक्षा व्‍यवस्‍था का जायजा लेने गए थे। राज्‍यसभा में गृह राज्‍यमंत्री जी किशन रेड्डी की ओर से पिछले दिनों कश्‍मीर से जुड़े कुछ आंकड़ें पेश किए गए।

stone-pelters

सबसे ज्‍यादा स्‍थानीय आतंकी भी ढेर

सरकार की ओर से राज्‍यसभा में पेश आंकड़ों में बताया गया है कि घाटी में लगातार पत्‍थरबाजों को गिरफ्तार किया जा रहा है। सरकार की ओर से बताया गया है कि साल 2018 में कश्‍मीर में कुल गिरफ्तार पत्‍थरबाजों की संख्‍या 3,797 रही। जबकि साल 2017 में यह संख्‍या 2,838 थी। इसमें से 65 पत्‍थरबाजों को जेल भेज गया था। जबकि साल 2017 में 63 शरारती तत्‍वों को जेल में डाला गया था। वहीं साल 2017 और 2018 में पत्‍थरबाजी की घटनाओं में भी कमी आई। साल 2016 में जब हिजबुल मुजाहिद्दीन के कमांडर बुरहान वानी को एनकाउंटर में ढेर किया गया तो पत्‍थरबाजी की 2,653 घटनाएं हुई। इस वर्ष इन घटनाओं से जुड़ी 10,571 पत्‍थरबाजों को गिरफ्तार किया गया था। एक और महत्‍वपूर्ण आंकड़ा जो सरकार की तरफ से सदन में पेश किया उसमें जम्‍मू कश्‍मीर में उन मारे गए आतंकियों की संख्‍या के बारे में बताया गया था जो स्‍थानीय थे। सरकार की ओर से बताया गया कि साल 2018 में कुल 257 आतंकी मारे गए और इनमें से 146 आतंकी स्‍थानीय नागरिक थे।

सुरक्षाबलों के कितने जवान शहीद

साल 2016 और 2017 में एनकाउंटर में मारे गए विदेशी आतंकियों की संख्‍या ज्‍यादा थी। साल 2016 में घाटी में 127 विदेशी आतंकी और 86 स्‍थानीय आतंकी मारे गए तो वहीं 2016 में यह आंकड़ा 86 आौर 64 था। दूसरी तरफ घाटी में इस वर्ष मई अर्धसैनिक बलों के जवानों की शहादत में भी इजाफा हुआ है। साल 2018 में अर्धसैनिक बलों के नौ जवान शहीद हुए थे। लेकिन इस वर्ष मई में ही आंकड़ा 43 पहुंच गया। हालांकि इसकी एक वजह 14 फरवरी को हुआ पुलवामा आतंकी हमला भी है। इस हमले में ही सीआरपीएफ के 40 जवान शहीद हो गए थे। अगर नागरिकों की मौत की बात करें तो इस वर्ष 16 जून तक आंकड़ा 18 था। जबकि साल 2018 में 39, 2017 में 40 और 2016 में 15 नागरिक मारे गए थे।

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