J&K Elections: NC, PDP दोनों के लिए पहले 'परिवार'! वंशवाद की राजनीति में किसने मारी बाजी?
Jammu Kashmir Chunav: जम्मू और कश्मीर विधानसभा चुनाव में भी परिवारवादियों और वंशवादियों का जलवा नजर आ रहा है। दोनों प्रमुख क्षेत्रीय पार्टियों- अब्दुल्ला परिवार की नेशनल कांफ्रेंस (NC) और मुफ्ती परिवार की पीपुल्स डेमोक्रेटिक पार्टी (PDP) दोनों ही दलों ने कई ऐसे उम्मीदवारों को टिकट दिए हैं, जो राजनीतिक रसूख वाले परिवारों से ताल्लुक रखते हैं।
पीडीपी ने पार्टी सुप्रीमो महबूबा मुफ्ती के परिवार की तीसरी पीढ़ी को इस चुनाव में डंके की चोट पर लॉन्च कर दिया है। लेकिन, पीडीपी की ओर से परिवार के नाम पर टिकट पाने वाली इल्तिजा मुफ्ती अकेले नहीं हैं। पार्टी में और भी कई ऐसे प्रत्याशी हैं, जो किसी न किसी सियासी घराने से जुड़े हैं। इसी तरह से नेशनल कांग्रेस के उम्मीदवारों में भी परिवारवादियों की लिस्ट काफी लंबी है।

हिलाल अकबर लोन
हिलाल अकबर लोन जम्मू-कश्मीर विधानसभा के पूर्व स्पीकर मोहम्मद अकबर लोन के बेटे हैं। नेशनल कांफ्रेंस ने हिलाल को उनकी सोनावारी सीट से ही प्रत्याशी बनाया है। मीडिया रिपोर्ट के मुताबिक 2020 में भड़काऊ बयानों की वजह से इनके खिलाफ यूएपीए की भी धाराएं लगी थीं और एक महीने जेल में भी रहना पड़ा था। आर्टिकल 370 हटने का बाद भी इन्हें हिरासत में लिया गया था।
यावर शफी बंदे
शोपियां से पीडीपी उम्मीदवार यावर शफी बंदे भी राजनीति में अपने परिवार की तीसरी पीढ़ी हैं। उनके दादा मोहम्मद माजीद बंदे शोपियां से ही दो बार एमएलए रह चुके हैं। वे 1962 में कांग्रेस के टिकट पर और 1972 में निर्दलीय चुनाव जीते थे। यावर के पिता मोहम्मद शफी बंदे ने भी कांग्रेस के टिकट पर 2008 में चुनाव लड़ा था, लेकिन हार गए थे।
सज्जाद शफी
नेशनल कांफ्रेंस ने उरी से सज्जाद शफी को टिकट दिया है। ये मोहम्मद शफी के बेटे हैं, जो पहले प्रदेश के वित्त मंत्री भी रह चुके हैं और सांसद भी चुने जा चुके हैं।
मोहम्मद रफीक नाइक
मोहम्मद रफीक नाइक को पीडीपी ने त्राल से प्रत्याशी बनाया है। ये भी जम्मू-कश्मीर विधानसभा के पूर्व स्पीकर और पूर्व मंत्री अली मोहम्मद नाइक के बेटे हैं। रफीक हाल ही में पीडीपी में शामिल हुए हैं।
सलमान सागर
सलमान सागर को नेशनल कांफ्रेंस ने श्रीनगर की हजरतबल सीट से उम्मीदवार बनाया है। वे पूर्व मंत्री और नेशनल कांफ्रेंस के महासचिव अली मोहम्मद सागर के बेटे हैं। अली मोहम्मद खुद भी खानयार से प्रत्याशी हैं, जहां का प्रतिनिधित्व वे 1996 से कर रहे हैं। पिता-पुत्र का अब्दुल्ला की पार्टी में ऐसा रसूख है कि दोनों को श्रीनगर के ही विधानसभा सीटों से टिकट मिल गया है।
एहसान परदेसी
एहसान परदेसी श्रीनगर के ही लाल चौक से नेशनल कांफ्रेंस प्रत्याशी हैं। इनके पिता गुलाम कादिर परदेसी नेशनल कांफ्रेंस और पीडीपी दोनों से बारी-बारी से राजनीति करते रहे हैं।
मियां मेहर अली
नेशनल कांफ्रेंस ने मियां मेहर अली को कंगन सीट से उतारा है, जो कि उनके परिवार का गढ़ माना जाता है। वे श्रीनगर से नेशनल कांफ्रेंस सांसद मियां अल्ताफ के बेटे हैं। 1987 से 2014 तक यहां से मियां अल्ताफ ही चुनाव जीतते रहे। 1983 के अलावा कंगन सीट का प्रतिनिधित्व हमेशा मियां परिवार ने ही किया है। 1983 में इस परिवार का कोई भी सदस्य मैदान में नहीं था।
इल्तिजा मुफ्ती
परिवारवादी उम्मीदवारों में सबसे ज्यादा चर्चा महबूबा मुफ्ती की बेटी इल्तिजा मुफ्ती की हो रही है। वो अपना पहला चुनाव ही बिजबेहरा से लड़ रही हैं,जो कि 1996 से उनके परिवार का गढ़ रहा है। 1996 में यहां से महबूबा कांग्रेस के टिकट पर चुनाव जीती थीं।
इरशाद रसूल कर
डोडा से नेशनल कांफ्रेंस प्रत्याशी इरशाद रसूल कर कश्मीर के बड़े नेता गुलाम रसूल कर के बेटे हैं, जो कांग्रेस, पीडीपी और नेशनल कांफ्रेंस में भी रह चुके हैं।
महबूब बेग
पीडीपी ने अनंतनाग सीट से मिर्जा अफजल बेग के बेटे महबूब बेग को उतारा है। मिर्जा नेशनल कांफ्रेंस सरकार में मंत्री भी रह चुके हैं। महबूब बेग 2014 से पीडीपी में हैं।
इस तरह से ऊपर जिन 10 परिवारवादी उम्मीदवारों के नाम सामने आए हैं, उनमें से 6 नेशनल कांफ्रेंस और चार पीडीपी से चुनाव लड़ रहे हैं।












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