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Lok Sabha Election: क्या जम्मू कश्मीर में गुलाम नबी आजाद बिगाड़ेंगे 'इंडिया' का गेम?

Lok Sabha Election Jammu and Kashmir: जम्मू और कश्मीर में पूर्व कांग्रेसी दिग्गज गुलाम नबी आजाद की पार्टी डेमोक्रेटिक प्रोग्रेसिव आजाद पार्टी(DPAP) की वजह से इंडिया ब्लॉक की मुश्किलें और बढ़ सकती हैं। डीपीएपी की अगुवाई में वहां एक गैर-इंडिया ब्लॉक और गैर-बीजेपी गठबंधन की तैयारी शुरू हो चुकी है।

जम्मू और कश्मीर में अभी तक इंडिया ब्लॉक की तीनों ही पार्टियों- नेशनल कांफ्रेंस (NC), पीडीपी और कांग्रेस के बीच सीटों का बंटवारा नहीं हुआ है। इन तीनों के बीच सीटों का तालमेल हो पाना फिलहाल मुमकिन भी नहीं लग रहा है। ऐसे में अगर गुलाम नबी आजाद की पहल पर तीसरा मोर्चा बनता है तो ज्यादा नुकसान इंडिया ब्लॉक के ही होने की आशंका लग रही है।

j k india and azad

आजाद देंगें थर्ड फ्रंट वाली चुनौती!
दरअसल, गुलाम नबी आजाद की पार्टी डीपीएपी की अगुवाई में अल्ताफ बुखारी की जम्मू कश्मीर 'अपनी पार्टी' और सज्जाद लोन की 'जम्मू कश्मीर पीपुल्स पार्टी' के बीच एक तीसरा मोर्चा बनाने की तैयारी है। इसमें कुछ और छोटी पार्टियां भी शामिल हो सकती हैं।

इंडियन एक्सप्रेस की एक रिपोर्ट के मुताबिक इन तीनों ही दलों के बीच इस केंद्र शासित प्रदेश की पाचों सीटों पर आम सहमति से गठबंधन का साझा उम्मीदवार उतारने को लेकर बात हो रही है। इनमें तीन सीटें कश्मीर घाटी में और दो जम्मू इलाके में हैं। कश्मीर की तीनों सीटें अभी नेशनल कांफ्रेंस के पास है और जम्मू की दो सीटों पर बीजेपी का कब्जा है।

डीपीएपी मुख्य प्रवक्ता सलमान निजामी के मुताबिक, 'सामान्य-विचारधारा वाले दलों के बीच यह चर्चा शुरुआती दौर में है। आने वाले दिनों में डीपीएपी के चेयरमैन गुलाम नबी आजाद इसको लेकर आखिरी फैसला लेंगे।'

इंडिया ब्लॉक से नेताओं का पहले से ही हो रहा है दूसरी पार्टियों में पलायन
अगर जम्मू और कश्मीर में आजाद की पहल पर इस तरह का तीसरा मोर्चा बन गया तो इससे पहले से ही यहां संकट झेल रहे इंडिया ब्लॉक के सहयोगियों की मुश्किलें और बढ़नी तय हैं। आर्टिकल 370 हटने और पहाड़ियों को अनुसूचित जनजाति (ST) का दर्जा दिए जाने के बाद पहले ही इन दलों के कई नेता बीजेपी, अपनी पार्टी औ डीपीएपी में शामिल हो चुके हैं।

थर्ड फ्रंट बिगाड़ेगा इंडिया ब्लॉक का गेम!
जहां तक बीजेपी का सवाल है तो जम्मू में वह पहले से ही बहुत मजबूत स्थिति में है। लेकिन, परिसीमन के बाद और पहाड़ियों को अनुसूचित जनजाति का दर्जा देने की वजह से वह इस बार अनंतनाग-राजौरी लोकसभा सीट को लेकर काफी उम्मीदें पाल रही है। ऐसे में अगर थर्ड फ्रंट बीजेपी-विरोधी वोट का थोड़ा सा हिस्सा भी काटने में सफल रहा तो पहले से ही परेशान इंडिया ब्लॉक की पार्टियों की स्थिति और कमजोर हो सकती है।

इंडिया ब्लॉक में आपस में ही उलझा है मामला
नेशनल कांफ्रेंस ने पहले ही ताल ठोक रखा है कि वह अनंतनाग, श्रीनगर और बारामुला की सीटें किसी सहयोगी के लिए नहीं छोड़ेगा। जबकि, पीडीपी कम से कम अनंतनाग सीट पार्टी चीफ महबूबा मुफ्ती के लिए चाहती है। वहीं, कांग्रेस पार्टी को भी कश्मीर घाटी की एक सीट चाहिए। इसलिए, बात बन नहीं पा रही है। दूसरी तरफ, जम्मू में कम से कम पीडीपी और नेशनल कांफ्रेंस अपने लिए कोई संभावना नहीं देख पा रही।

एक वरिष्ठ पीडीपी नेता ने कहा भी है, 'अगर नेशनल कांफ्रेंस अपने फैसले के मुताबिक घाटी की तीनों सीटों पर लड़ेगा तो हम भी इन सभी सीटों पर अपने उम्मीदवार उतारेंगे।'

अनंतनाग-राजौरी सीट पर बीजेपी का काम हो सकता है आसान
2019 के लोकसभा चुनाव में अनंतनाग सीट से नेशनल कांफ्रेंस के हसनैन मसूदी कांग्रेस के जीए मीर से मात्र 6,676 वोटों से जीते थे। बदले हालात में अगर इंडिया ब्लॉक बंट के लड़ा और गुलाम नबी की अगुवाई वाला तीसरा मोर्चा भी उतरा तो बदले समीकरण का फायदा बीजेपी को मिलना तय है। इसके बारे में माना जा रहा है कि पार्टी यहां किसी पहाड़ी उम्मीदवार पर दांव लगा सकती है।

हालांकि, पिछली बार श्रीनगर और बारामुला सीट पर नेशनल कांफ्रेंस के उम्मीदवारों की जीत का अंतर अनंतनाग से बड़ा था, लेकिन बदले हुए समीकरण और पूरी तरह से अलग हालात की वजह से यहां भी चुनावों में थर्ड फ्रंट की मौजूदगी की वजह से परिणामों में बड़ा अंतर देखने को मिल सकता है।

जहां तक जम्मू की दोनों लोकसभा सीटों-जम्मू और उधमपुर का सवाल है तो भाजपा यहां मजबूती से स्थापित हो चुकी है। 2014 और 2019 दोनों ही चुनावों में पार्टी के उम्मीदवारों की जीत का अंतर 3 लाख वोट से भी ज्यादा वोटों का रहा था।

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