'लिमिट क्रॉस करने की कीमत चुकानी पड़ी', जगदीप धनखड़ के इस्तीफे पर कांग्रेस के दिग्गज नेता ने किया बड़ा दावा
कांग्रेस नेता और राज्यसभा सदस्य पी चिदंबरम (P Chidambaram) ने मंगलवार को एक बड़ा दावा करते हुए कहा कि जगदीप धनखड़ को उपराष्ट्रपति पद से इस्तीफा देना पड़ा क्योंकि उन्होंने 'अपनी सीमा लांघी।' उन्होंने इस मामले को जस्टिस यशवंत वर्मा के खिलाफ प्रस्ताव स्वीकार करने से भी जोड़ा।
इंडिया टुडे टीवी से बातचीत में चिदंबरम ने दावा किया कि इससे सरकार के साथ उनके रिश्ते खराब हो गए होंगे, और यह स्पष्ट है कि दोनों के बीच अब एकमत नहीं रहे। चिदंबरम ने कहा कि, 'जब सरकार ने धनखड़ पर विश्वास खो दिया, तो उन्हें जाना पड़ा।'

'धनखड़ की कोई विदाई नहीं हुई'
चिदंबरम ने राज्यसभा में धनखड़ के इस्तीफे की संक्षिप्त और औपचारिक घोषणा को इस बात का प्रमाण बताया कि दोनों पक्षों के बीच कोई आपसी सम्मान नहीं बचा है। कांग्रेस सांसद ने कहा कि कोई विदाई नहीं हुई, जो इस बात का संकेत है कि धनखड़ के लिए समर्थन खत्म हो गया है।'
'सरकार और धनखड़ के बीच संबंध पूरी तरह से टूट गया'
चिदंबरम ने आगे कहा कि, 'उपसभापति ने राज्यसभा में उपराष्ट्रपति पद की रिक्ति के बारे में एक संक्षिप्त और औपचारिक घोषणा की और कहा कि कार्यक्रम की घोषणा बाद में की जाएगी। इसका मतलब है कि सरकार ने बिना किसी शोर-शराबे या धूमधाम के धनखड़ को अलविदा कह दिया है, जिसका अर्थ है कि दोनों के बीच का विश्वास, संबंध पूरी तरह से टूट गया है।'
धनखड़ ने अगस्त 2022 में पदभार ग्रहण किया था
पूर्व केंद्रीय मंत्री ने न्यायपालिका और कार्यपालिका के बीच बढ़ते तनाव पर भी बात की और कहा कि धनखड़ ने एक साल से ज्यादा समय से न्यायिक मुद्दों पर टकराव का रुख अपनाया हुआ है। 74 वर्षीय धनखड़ ने अगस्त 2022 में पदभार ग्रहण किया था और उनका कार्यकाल 2027 तक था।
चिदंबरम ने बताया सरकार कब तक करती है सपोर्ट
चिदंबरम ने आगे कहा कि 'मोदी सरकार व्यक्तियों का तभी तक सपोर्ट करती है जब तक वे उनकी लाइन पर चलते हैं।, लेकिन जैसे ही वे अपने सोच बदल लेते हैं, सरकार उसे छोड़ देती है।'
हम मोदी सरकार के चरित्र से वाकिफ हैं- चिदंबरम
कांग्रेस नेता ने आगे कहा कि, 'देखिए, हम मोदी सरकार के चरित्र से वाकिफ हैं। जब तक कोई व्यक्ति उनकी बात मानता है, वे किसी से भी दोस्ती कर लेते हैं। लेकिन जैसे ही वह उनकी बात से हटता है, वे अपना समर्थन वापस ले लेते हैं। मैं यह नहीं कह रहा कि धनखड़ के मामले में बिल्कुल यही हुआ। लेकिन कुछ तो हुआ होगा।'
कार्य मंत्रणा समिति की बैठक का भी किया जिक्र
इसके अलावा, चिदंबरम ने कार्य मंत्रणा समिति की एक बैठक का भी जिक्र किया, जिसमें भाजपा नेता जे पी नड्डा और किरण रिजिजू दोपहर 12:30 बजे बैठक में शामिल हुए, लेकिन दोबारा बुलाई गई बैठक में शामिल नहीं हुए, जिसे अन्य लोगों ने बहिष्कार के रूप में देखा।
चिदंबरम ने कहा कि धनखड़ इस घटनाक्रम से नाराज दिखे और उन्होंने बैठक समाप्त कर दी। उन्होंने सवाल किया, 12:30 से 4:30 के बीच क्या हुआ? जब उनसे पूछा गया कि क्या विपक्ष पूर्व उपराष्ट्रपति पर अपना रुख बदल रहा है, तो चिदंबरम ने किसी भी बदलाव से इनकार किया। उन्होंने कहा कि विपक्ष ने महीनों पहले ही धनखड़ पर भरोसा खो दिया था और उन्हें रुकने के लिए नहीं कहा था।
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