पूर्व उपराष्ट्रपति जगदीप धनखड़ फिर क्यों आए चर्चाओं में? इस्तीफे के बाद पहली बार किया ये बड़ा काम
Jagdeep Dhankhar: पूर्व उपराष्ट्रपति जगदीप धनखड़ का नाम एक बार फिर सुर्खियों में है। इस्तीफे के बाद पहली बार उन्होंने अधिकारिक तौर पर कोई काम किया है। इस बार चर्चा का कारण उनके राजस्थान विधानसभा से पेंशन का आवेदन है। 74 साल के धनखड़ ने राजस्थान विधानसभा में विधायक रहने के नाते पेंशन के लिए आवेदन किया है।
साल 1993 में कांग्रेस के टिकट पर अजमेर जिले की किशनगढ़ सीट से विधायक रहे जगदीप धनखड़ क राजस्थान विधानसभा से पेंशन मिलने का अधिकार है। वर्तमान में 74 वर्ष की उम्र पार कर चुके धनखड़ को नियमों के मुताबिक करीब 42 हजार रुपये मासिक पेंशन मिलेगी। पूर्व विधायक के तौर पर जगदीप धनखड़ को जुलाई 2019 तक पेंशन मिल रही थी। जुलाई 2019 में पश्चिमी बंगाल के राज्यपाल बनने के बाद उन्हें पेंशन मिलनी बंद हो गई थी।

विधानसभा अध्यक्ष वासुदेव देवनानी ने पुष्टि की है कि जगदीप धनखड़ का पेंशन आवेदन विधानसभा को मिल चुका है और उस पर प्रक्रिया चल रही है। उपराष्ट्रपति पद से इस्तीफा देने के बाद यह पहला मौका है जब धनखड़ ने किसी मामले में आवेदन किया है। वहीं उन्होंने अब तक अपने आवास को लेकर विभाग में कोई अनुरोध नहीं किया है।
जगदीप धनखड़ के पेंशन का हिसाब
राजस्थान में पूर्व विधायकों के लिए पेंशन की खास व्यवस्था है। राजस्थान में नेताओं के लिए दोहरी और तिहरी पेंशन की भी व्यवस्था है। इसका मतलब अगर कोई व्यक्ति सांसद और विधायक दोनों रहा हो, तो उसे दोनों पदों की पेंशन मिल सकती है।
- सामान्य पेंशन: ₹35,000 प्रति माह
- 70 साल से ऊपर उम्र वालों को 20% अतिरिक्त पेंशन
- 80 साल की उम्र में 30% अतिरिक्त पेंशन
- जगदीप धनखड़ की उम्र 74 साल है, इसलिए उन्हें लगभग ₹42,000 प्रति माह पेंशन मिलेगी।
जगदीप धनखड़ को पूर्व उपराष्ट्रपति, पूर्व सांसद, पूर्व विधायक तीन पेंशन मिलेगी
जगदीप धनखड़ को तीन अलग-अलग पेंशनें मिलेंगी - एक पूर्व उपराष्ट्रपति, एक पूर्व सांसद और एक पूर्व विधायक के तौर पर। हालांकि, पूर्व राज्यपालों को पेंशन का लाभ नहीं मिलता, इसलिए उन्हें पूर्व राज्यपाल के रूप में पेंशन नहीं मिलेगी।
पूर्व उपराष्ट्रपति के रूप में उन्हें लगभग 2 लाख रुपये प्रति माह पेंशन मिलेगी। वहीं, पूर्व विधायक के तौर पर 42 हजार रुपये और पूर्व सांसद के तौर पर 31 हजार रुपये प्रति माह पेंशन मिलेगी। इन तीनों पेंशनों को मिलाकर धनखड़ को हर महीने कुल 2 लाख 73 हजार रुपये मिलेंगे।
पहली बार किया पेंशन के लिए आवेदन
उपराष्ट्रपति पद से इस्तीफा देने के बाद यह पहला मौका है जब धनखड़ ने किसी चीज के लिए आवेदन किया है। जगदीप धनखड़ ने 21 जुलाई को राष्ट्रपति द्रौपदी मुर्मू को पत्र लिखकर स्वास्थ्य कारणों का हवाला देते हुए उपराष्ट्रपति पद से इस्तीफा दिया था। इस कदम ने देश की राजनीति में हलचल मचा दी, क्योंकि उनका कार्यकाल अभी शेष था।
जगदीप धनखड़ का यह कदम और पेंशन आवेदन राजनीतिक और मीडिया जगत में चर्चा का विषय बना हुआ है। उनके स्वास्थ्य, गुमनामी और पेंशन को लेकर सवाल अब भी लोगों के मन में उठ रहे हैं।
विपक्ष ने उठाए सवाल
जगदीप धनखड़ के इस्तीफे और गुमनामी को लेकर विपक्ष लगातार सवाल उठा रहा है। राहुल गांधी ने लोकसभा में कहा कि "राज्यसभा में जिनकी आवाज गूंजती थी, वे अचानक चुप हो गए। पूरा देश जानना चाहता है, पूर्व उपराष्ट्रपति आखिर छिप क्यों गए?"
कपिल सिब्बल ने चुटकी लेते हुए कहा कि पहले 'लापता लेडीज' की बातें सुनी थीं, लेकिन अब 'लापता वाइस प्रेसिडेंट' का मामला सामने आया है। उन्होंने सुरक्षा के प्रति सतर्क रहने की बात भी कही।
धनखड़ की लोकेशन और उनकी मौजूदा गतिविधियों को लेकर अभी तक कोई आधिकारिक जानकारी नहीं मिली है। मीडिया रिपोर्ट के मुताबिक वह उपराष्ट्रपति आवास में ही रह रहे हैं।
जगदीप धनखड़ का राजनीतिक सफर
- जगदीप धनखड़ ने अपने राजनीतिक करियर की शुरुआत जनता दल से की थी।
- 1989-1991: झुंझुनू लोकसभा क्षेत्र से सांसद
- 1993: कांग्रेस के टिकट पर किशनगढ़ से विधायक चुने गए
- 2019-2022: पश्चिम बंगाल के राज्यपाल
- 2022-2025: भारत के उपराष्ट्रपति
- इस दौरान उन्होंने कई महत्वपूर्ण पदों पर सेवाएं दीं और अब राजस्थान विधानसभा से पेंशन लेने की प्रक्रिया में हैं।












Click it and Unblock the Notifications