Jabalpur Gondia Project: उत्तर-दक्षिण के बीच पुल बनेगा यह प्रोजेक्ट, 5,236 करोड़ होंगे खर्च
Jabalpur Gondia Project: सेवा तीर्थ की पहली बैठक में जबलपुर-गोंदिया प्रोजेक्ट को लेकर बड़ा फैसला आया है। केंद्रीय मंत्री अश्विनी वैष्णव ने बताया कि इस प्रोजेक्ट को मंजूरी दे दी गई है। उन्होंने बताया कि यह परियोजना उत्तरी क्षेत्र, विशेषकर पूर्वांचल को सीधे दक्षिण भारत से जोड़ेगी। इससे देश के दो अहम छोर के बीच कनेक्टिविटी मजबूत होगी।
केंद्रीय मंत्री ने बताया कि यह प्रोजेक्ट प्रयागराज, वाराणसी, काशी, बिहार, छत्तीसगढ़ और झारखंड-को कवर करती है। यह 231 किलोमीटर लंबी एक बेहद महत्वपूर्ण परियोजना है। इस रेल लाइन के लिए 5,236 करोड़ रुपये का निवेश किया जाएगा।

Jabalpur Gondia Project: अंतिम चरण में चल रहा काम
- जबलपुर-गोंदिया ब्रॉडगेज प्रोजेक्ट (करीब 285 किमी) अब अपने अंतिम चरण में पहुंच चुका है और विस्तार मोड में तेजी से आगे बढ़ रहा है। साउथ ईस्ट सेंट्रल रेलवे (SECR) के तहत इस महत्वपूर्ण रेलखंड पर विद्युतीकरण का काम तेजी से चल रहा है।
- इस मार्ग के कुछ हिस्से वन्यजीव क्षेत्रों से होकर गुजरते हैं, इसलिए उनके संरक्षण को ध्यान में रखकर लेटेस्ट टेक्नोलॉजी का इस्तेमाल किया गया है।
- वन्यजीवों की सुरक्षा के लिए कई अंडरपास और फेंसिंग की व्यवस्था की जाएगी। यह परियोजना उत्तर से दक्षिण तक सीधी कनेक्टिविटी देगी।
Jabalpur Gondia Project Update: वंदे भारत समेत कई ट्रेन चलेंगी
केंद्रीय मंत्री अश्विनी वैष्णव ने बताया कि नैनपुर-बालाघाट जैसे प्रमुख सेक्शन पर दोहरीकरण काम तेजी से चल रहा है। रेल मंत्रालय ने इस रूट पर ट्रेनों की अधिकतम गति 110 से 130 किमी प्रति घंटा तक बढ़ाने का लक्ष्य तय किया है। इसके पूरा होने पर उत्तर और दक्षिण भारत के बीच यात्रा समय में 4 से 5 घंटे तक की कमी आ सकती है। जबलपुर और गोंदिया के बीच बेहतर और तेज कनेक्टिविटी की मांग को देखते हुए नई इंटरसिटी और वंदे भारत एक्सप्रेस चलाने के प्रस्ताव पर भी विचार हो रहा है। फिलहाल इस रूट पर जबलपुर-चांदा फोर्ट सुपरफास्ट जैसी ट्रेनें ही चल रही हैं।
उत्तर-दक्षिण के बीच बनेगी मजबूत विकल्प
यह रेल लाइन महाकौशल (मध्य प्रदेश) और विदर्भ (महाराष्ट्र) को जोड़ने के साथ-साथ दक्षिण भारत जाने वाले यात्रियों के लिए भी अहम बन गई है। चेन्नई, बेंगलुरु और हैदराबाद की ओर जाने वाले यात्रियों के लिए यह मार्ग इटारसी होकर जाने वाले लंबे रूट का मजबूत विकल्प बन रहा है। इस प्रोजेक्ट के पूरा होने से क्षेत्रीय अर्थव्यवस्था को भी बड़ा फायदा हुआ है। कान्हा और पेंच नेशनल पार्क जैसे प्रमुख पर्यटन स्थलों तक पहुंच पहले से आसान हो गई है।












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