J&K:दुनिया का सबसे ऊंचा रेलवे पुल अगले साल होगा तैयार, एफिल टावर से भी इतनी अधिक ऊंचाई
नई दिल्ली- जम्मू-कश्मीर में चिनाब नदी के ऊपर बन रहा दुनिया का सबसे ऊंचा रेलवे पुल अगले साल तक तैयार हो जाएगा। अधिकारियों के मुताबिक 2022 तक पुल कश्मीर घाटी को बाकी देश से रेलवे के माध्यम से सीधा जोड़ देगा। दरअसल, जम्मू-कश्मीर में पिछले एक साल में विकास के कार्यों में बहुत ही तेजी आई है। वजह ये है कि कई तरह की रुकावटें दूर हुई हैं और केंद्र सरकार विकास की सभी परियोजनाओं पर सीधी नजर रख रही है। जम्मू-कश्मीर के रियासी जिले में चिनाब नदी पर बनने वाले इस पुल का राज्य के लोगों को बेसब्री से इंतजार है, क्योंकि इसके बनते ही हर मौसम में कश्मीर घाटी पहुंचने वाला रास्ता मिल जाएगा।

चिनाब नदी पर बन रहा है दुनिया का सबसे ऊंचा पुल
जम्मू-कश्मीर के रियासी जिले में बन रहे इस रेलवे पुल का सेंट्रल स्पैन 467 मीटर है और यह चिनाब नदी की सतह से 359 मीटर की ऊंचाई पर बनाया गया है। बता दें कि दिल्ली के कुतुब मीनार की ऊंचाई महज 72 मीटर है और पेरिस के चर्चित एफिल टावर की ऊंचाई भी मात्र 324 मीटर है। यानि यह रेलवे पुल विश्व प्रसिद्ध एफिल टावर से भी 35 मीटर ज्यादा ऊंचा है। एक वरिष्ठ सरकारी अधिकारी ने बताया कि 'यह दुनिया का सबसे ऊंचा रेलवे पुल है और इसे इस तरह से डिजाइन किया गया है कि 266 किलोमीटर प्रति घंटे की रफ्तार वाले हवा को भी आसानी से झेल सकता है।' अधिकारी ने यह भी बताया कि पिछले एक साल में केंद्र सरकार के अधिकारियो की सीधी निगरानी के चलते इस पुल का निर्माण कार्य बहुत तेजी से आगे बढ़ा है।

2022 तक देश के रेल नेटवर्क से जुड़ जाएगा कश्मीर
अधिकारियों के मुताबिक योजना के तहत 2022 के दिसंबर तक कश्मीर पूरी तरह से देश के बाकी हिस्सों से रेल नेटवर्क से पूरी तरह जुड़ जाएगा। गौरतलब है कि उधमपुर-कटरा (25 किलोमीटर), बनिहाल-काजीगुंड (18 किलोमीटर) और काजीगुंड-बारामुला (118 किलोमीटर) सेक्शन को पहले ही खोला जा चुका है। अभी कटरा-बनिहाल (111 किलोमीटर) आखिरी सेक्शन पर काम चल रहा है। इस सेक्शन को दिसंबर 2022 तक चालू करने की तैयारी है। इस सेक्शन में 174 किलोमीटर की सुरंगें हैं, जिनमें से 126 किलोमीटर का काम पहले ही पूरा हो चुका है। दरअसल, पिछले एक साल में 7 नवंबर, 2015 को घोषित 80,068 करोड़ रुपये प्राइम मिनिस्टर डेवलपमेंट पैकेज के तहत कई सारी योजनाओं पर काम की गति बहुत तेजी से आगे बढ़ा है।

केंद्र की निगरानी के चलते तेजी से हो रहा काम
पिछले साल जम्मू-कश्मीर के पुनर्गठन के बाद पीएमडीपी के तहत 58,627 करोड़ रुपये के 54 प्रोजेक्ट संघ शासित प्रदेश जम्मू-कश्मीर में रह गए और 21,441 करोड़ रुपय के 9 प्रोजेक्ट संघ शासित प्रदेश लद्दाख के खाते में चले गए। अधिकारी ने कहा कि, 'पीएमडीपी के तहत काम 2018 की जून से ही चल रहा है और खासकर पिछले एक साल में यह बहुत ही तेजी से और अविश्वसनीय रूप से आगे बढ़ा है।' इसकी वजह ये है कि प्रोजेक्ट के आगे बढ़ने में जो रुकावटें थीं, उन्हें दूर कर लिया गया है। मसलन, इस प्रोजेक्ट के तहत श्रीनगर के रामबाग फ्लाइओवर का काम जो 5 साल की देरी से चल रहा था, वह खोला जा चुका है। आज की तारीख में पूरे हुई प्रोजेक्ट की संख्या 7 से बढ़कर 17 हो चुकी है।












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