सलवार और सिलेंडरों में छिपाकर, पाक से लाई गई हवाला की रकम

श्रीनगर। जम्‍मू कश्‍मीर में हवाला के जरिए पैसा आना कोई नई बात नहीं है। कश्‍मीर में पिछले 53 दिनों से जारी हिंसा के बीच ही अब ऐसे छह बैंक अकाउंट्स की जांच हो रही है जिनमें हिंसा को बढ़ाने के पैसा सीमा पार से आया। खास बात है ऐसे तरीके जिनका प्रयोग पाकिस्‍तान हवाला की रकम को भेजने में कर रहा है।

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कैसे सामने आया सच

आप जानकर हैरान हो जाएंगे जब आपको पता लगेगा कि पाक समर्थक गैस सिलेंडर से लेकर सलवार कमीज तक का प्रयोग कर रहे हैं, चोरी-छिपे पैसा भेजने में। इसके अलावा कई और भी रास्‍ते हैं जिनके जरिए पाक से पैसा आ रहा है।

घाटी में अलगाववादी नेता सैयद अली शाह गिलानी के करीबी गुलाम मोहम्‍मद भट्ट के पास आई रकम के केस की जब पड़ताल हुई तो पता लगा कि उसे गैस सिलेंडर के जरिए हवाला की रकम भेजी गई थी। भट्ट को दो बार घाटी में पैसे इधर से उधर करने की वजह से गिरफ्तार किया जा चुका है।

पाक ने दिए हैं निर्देश

पाक की ओर से घाटी में पैसे भेजने को लेकर दिशा-निर्देश दिए जा चुके हैं। पाक पहले दुनियाभर में अपने कार्यकर्ताओं को सक्रिय कर देता है और फिर अलगाववादी नेताओं के एकाउंट में पैसा भेजना शुरू हो जाता है।

कई मौके ऐसे भी देखे गए हैं जब हवाला की रकम पहले दिल्‍ली आई और फिर इसी रकम को किसी खास आदमी ने ले लिया।

55 लाख रुपए गैस सिलेंडर में छिपे

गुलाम भट्ट वाले केस में ऐसा ही हुआ था। उसने पहले दिल्‍ली में 55 लाख रुपए एक व्‍यक्ति से लिए और फिर इस रकम को एक गैस सिलेंडर में छिपा दिया।

जब व‍ह जम्‍मू कश्‍मीर में दाखिल होने की कोशिश कर रहा था तभी पकड़ा गया। भट्ट को वर्ष 2011 में भी पकड़ा गया था और उस समय वह 25 लाख रुपए के साथ पकड़ा गया था।

सलवार में सिले 48 लाख रुपए

वर्ष 2002 में जब एक केस की जांच हुई तो पता लगा कि करीब 48 लाख रुपए की रकम को कश्‍मीरी महिलाओं की ओर से पहनी जाने वाली सलवार में सिलकर भेजे गए थे।

एक महिला को उस समय जम्‍मू-श्रीनगर हाइवे पर अरेस्‍ट किया गया था। बात में पता लगा कि इस रकम को यासीन मलिक तक भेजा जा रहा था।

80 करोड़ रुपए की रकम

वहीं इंटेलीजेंस ब्‍यूरों की एक रिपोर्ट की मानें तो पाक के लिए नेटवर्क को हिजबुल मुजाहिदीन और लश्‍कर-ए-तैयबा की ओर से नियंत्रित किया जाता है।

दोनों ही संगठनों की ओर से चार-चार व्‍यक्तियों की नियुक्ति की गई है जो आपस में एक दूसरे के साथ संपर्क में रहते हैं। ये इस बात को सुनिश्चित करते हैं कि घाटी में पैसा आता रहे।

कैसे पीओके पहुंचते हैं आतंकी

हिजबुल ने ट्रक ड्राइवर्स की मदद से करीब 80 करोड़ रुपए की रकम इकट्ठा की थी।हिजबुल मुजाहिदीन अपने ऑपरेटिव्‍स को ट्रक ड्राइवर्स के साथ पीओके भेजता है।

ऑपरेटिव्‍स व्‍यापारियों की तरह पेश आते हैं और इस तरह से बॉर्डर से बाहर निकल जाते हैं। फिर पीओके से पैसा लेकर घाटी में वापस लौट आते हैं।

इंटेलीजेंस ब्‍यूरोंं के मुताबिक हिजबुल रकम का एक बड़ा हिस्‍सा घाटी में अशांति के लिए अलगाववादी नेताओं को देता है।

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