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इसरो को मिली बड़ी सफलता, अब सैटेलाइट लॉन्च करने के बाद स्पेस में नहीं बिखरेगा कचरा

भारतीय अंतरिक्ष अनुसंधान संगठन इसरो ने अंतरिक्ष के क्षेत्र में एक अहम उपलब्धि हासिल कर ली है। पीएसएलवी ने शून्य कक्षीय मलबा मिशन पूरा कर लिया है। इसका मतलब ये है कि अब इसरो कोई भी सैटेलाइट लॉन्च करेगा तो उसका मलबा अंतरिक्ष में नहीं बिखरेगा।

इसरो की उपलब्धियों के क्रम में यह कदम एक और मील का पत्थर बताया जा रहा है। इसरो ने यह उपलब्धि ऐसे समय में हासिल की है जब अंतरिक्ष में सैटेलाइट का बढ़ता मलबा एक बड़ी चुनौती बन चुका है।

PSLV enter witn zero debris orbit

इसरो ने बताया कि इस मिशन को 21 मार्च को हासिल कर लिया गया था, जब पीएसएलवी ऑर्बिटल एक्सपेरिमेंटल मॉड्यूल -3 (पीओईएम-3) ने पृथ्वी के वायुमंडल में दोबारा प्रवेश के माध्यम से अपने अभियान को पूरा किया

इसरो ने सोमवार को बताया कि 1 जनवरी को लॉन्च किए गए XPoSat मिशन ने कक्षा में व्यावहारिक रूप से शून्य मलबा छोड़ा। इसरो के अनुसार, सभी उपग्रहों को उनकी वांछित कक्षाओं में स्थापित करने के प्राथमिक मिशन को पूरा करने के बाद, पीएसएलवी के टर्मिनल चरण को 3-अक्ष स्थिर मंच, पीओईएम-3 में बदल दिया गया है।

इसरो के मुताबिक सैटेलाइटो को वांछित कक्षा में पहुंचाने के अपने मुख्य उद्येश्य के बाद पीएसएलवी तीन भागों में बंट जाता है। इसे ही पीओईएम 3 नाम दिया गया है। इसमें सबसे पहले चरण में पीएसएलवी को 650 किलोमीटर की ऊंचाई वाली कक्षा से 350 किलोमीटर वाली कक्षा में लाया गया। इससे पीएसएलवी को शीघ्र कक्षा में पहुंचने अवसर मिल गया और कक्षा में जल्दी प्रवेश हो गया। इससे कक्षा परिवर्तन के दौरान एक्सिडेंट का खतरा कम हो गया।

पीओईएम -3 में 9 विभिन्न तरह के प्रायोगिक पेलोड लगाए गए हैं। इससे कई तरह के वैज्ञानिक प्रयोग किए जाने हैं। इनमें से 6 पेलोड को गैर-सरकारी संस्थाओं द्वारा दिया गया है। इन पेलोड को एक महीने के अंदर बनाए गए थे. हालांकि इसमें बहुत अधिक खर्च आता है। इसलिए इसरो ने इसमें निजी भागीदारी को प्रोत्साहित करने का फैसला किया है।

आपको बता दें कि इसरो ने हाल के कुछ महीनों में कई नवीनतम प्रयोग किए है। ISRO ने 22 मार्च को रीयूजेबल लॉन्च व्हीकल (RLV LEX-02) की स्कसेसफुल लैंडिंग कराई थी। इस स्वदेशी स्पेस शटल का नाम पुष्पक रखा गया है। ISRO का कहना है कि इस टेक्नोलॉजी से रॉकेट लॉन्चिंग अब पहले से सस्ती होगी। अंतरिक्ष में अब उपकरण पहुंचाने में लागत काफी कम आएगी।

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