Chandrayaan2 के बाद कार्टोसेट-3 की लांचिंग की तैयारी में जुटा इसरो
बंगलुरू। चंद्रयान 2 के सक्सेसफुल रिजल्ट के बाद भारतीय अंतरिक्ष अनुसंधान संगठन (ISRO) अब एक कार्टोसेट-3 सैटेलाइट की लांचिंग की तैयारी में जुट गया है। कार्टोसेट सीरीज की 9वीं सैटेलाइट के अंतरिक्ष में सफल लांच के बाद भारत बॉर्डर पर दुश्मनों की हरकतों को बेहद नजदीकी से देखने में सक्षम हो जाएगा। यह सैटेलाइट इसरो अक्टूबर के अंत में या नवंबर की शुरुआत में प्रक्षेपित करेगा।

इसरो चेयरमैन के सिवन ने उन्नत कार्टोग्राफी उपग्रह कार्टोसैट-3 का ऐलान करते हुए बताया कि पृथ्वी का निरीक्षण करने वाला या रिमोट सेंसिंग उपग्रह कार्टोसैट-3 एक उन्नत संस्करण है, जो कार्टोसैट-2 सीरीज के उपग्रहों की तुलना में बेहतर आकाशीय और वर्णक्रमीय गुणों से लैस है। कार्टोसैट-3 में बेहतर तस्वीरों के साथ रणनीतिक एप्लीकेशंस भी होंगे। कार्टोसैट-3 को पोलर सैटेलाइट लॉन्च व्हीकल (पीएसएलवी) रॉकेट से प्रक्षेपित किया जाएगा।
इससे पहले, गत 22 जुलाई को इसरो ने चंद्रयान-2 श्रीहरिकोटा स्थित प्रक्षेपण केंद्र से सफलतापूर्वक प्रक्षेपित किया था। इस अभियान के साथ ही भारत रूस, अमेरिका और चीन के बाद भारत चंद्रमा की सतह पर रोवर पहुंचाने वाला चौथा देश बन गया है। गत 21 अगस्त को चंद्रयान 2 कामयाबी के साथ चांद की दूसरी कक्षा में प्रवेश कर लिया और 28 अगस्त को चंद्रयान-2 चांद की तीसरी कक्षा में प्रवेश करेगा। इस बीच चंद्रयान 2 ने स्पेस से चांद और पृथ्वी, दोनों की कुछ बेहद शानदार तस्वीरें ली हैं। चंद्रयान 2 पर लगे कैमरे से खींची गई चांद की सतह की फोटो इसरो ने गत 23 अगस्त को शेयर किया।

कार्टौसेट-3 सैटेलाइट की लांचिंग का मुख्य मकसद अंतरिक्ष के जरिए भारत की जमीन पर नजर रखना, आपदाओं में ढांचागत विकास के लिए मदद प्रमुख है, लेकिन इसका उपयोग देश की सीमाओं की निगरानी के लिए सर्वाधिक उपयोगी साबित होने वाला है। क्योंकि आए दिन पाकिस्तान से सटे बॉर्डर पर आंतकी घुसपैठ के जुगत में बैठ रहते हैं, लेकिन कार्टोसैट की लांचिंग के बाद अब ऐसे आंतकियों और आतंकी कैंपों पर नजर रखने में भारतीय सेना को आसानी होगी।

माना जा रहा है कि यह मिशन भारत के विभिन्न देशों से लगे सरहदों की निगरानी के लिए बहुत काम आएगी बल्कि इसके जरिए उन सभी गतिविधियों पर आसानी से नजर रखी जा सकेंगी, जो सरहदों आंखों में धूल झोंकर की जाती रही हैं। कार्टोसैट सैटेलाइन एक तरह से सरहद पर भारत की आंख की तरह काम करेगी और सरहद पर होने वाले किसी भी हलचल की निगरानी में महत्वपूर्ण भूमिका अदा करेगी। इसकी मदद से आंतकी गतिविधियों के खिला भारतीय सेना घर में घुस कर कार्रवाई करने में और सक्षम हो जाएगी।
आपको अगर याद हो, उरी अटैक के दौरान भारतीय सेना ने कार्टोसैट सीरीज की सैटेलाइट की मदद से पीओके में घुसी थीं और आंतकी कैंपों को ध्वस्त करने में कामयाब होकर लौटी थी। लेकिन कार्टोसैट सैटेलाइट सीरीज के सबसे उन्नत किस्म है, जिसका स्थापित किया गया कैमरा इतना ताकतवर है कि वह अंतरिक्ष से जमीन पर 1 फीट से भी कम (9.84 इंच) की ऊंचाई तक की तस्वीर ले सकेगा।

यही नहीं, इस सैटेलाइट की नजर इतनी पैनी होगी कि भारतीय सेनान दुश्मन की कलाई पर बंधी घड़ी पर दिख रहे सही समय की भी सटीक जानकारी देने में सक्षम होगी। कार्टौसेट सीरीज की सैटेलाइट की मदद से ही भारत ने पीओके में सर्जिकल और एयर स्ट्राइक को बखूबी अंजाम दिया था, लेकिन कार्टौसेट सैटेलाइट से अब भारतीय सेना और बेहतर निगरानी में मदद मिलेगी। सरहदों की निगरानी से इतर कार्टोसैट-3 सैटेलाइट की मदद से खराब मौसम में पृथ्वी की तस्वीरें लेने में आसानी होगी, जो प्राकृतिक आपदाओं के दौरान रेस्क्यू ऑपरेशन में काफी उपयोगी साबित होगी।

उल्लेखनीय है अक्टूबर-नवंबर में प्रक्षेपण के लिए तैयार कार्टोसैट-3 सैटेलाइट का कैमरा इतना ताकतवर है कि वह अंतरिक्ष से जमीन पर 0.25 मीटर यानी 9.84 इंच की ऊंचाई तक की स्पष्ट तस्वीरें ले सकता है। संभवतः अभी तक इतनी सटीक रिजल्ट देने वाला सैटेलाइट कैमरा किसी देश ने लॉन्च नहीं किया है। निःसंदेह कार्टौसेट सीरीज का नया सैटेलाइट मील का पत्थर साबित होगा।
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