15 करोड़ किमी दूर सूरज...लेकिन 15 लाख KM पर ही रुककर सूर्य के रहस्य खोलेगा ISRO का आदित्य एल-1
चंद्रयान-3 की सफलता के बाद देश की नजर अब इसरो के आदित्य एल-1 मिशन पर है। इसके तहत सूर्य पर रिसर्च के लिए एक यान अंतरिक्ष में भेजा जा रहा, जिसको लेकर पूरा देश उत्साहित है। वैसे लोगों को लग रहा ये यान सूर्य के करीब जाएगा, लेकिन ऐसा नहीं होने वाला है।
दरअसल पृथ्वी से सूर्य की दूरी करीब 15 करोड़ किमी है। इसरो अपने आदित्य यान को हमसे 15 लाख किमी दूर भेजेगा। वहीं से ये यान सूर्य और उससे जुड़े रहस्यों को सुलझाएगा।

वैज्ञानिकों के मुताबिक सूर्य का न्यूनतम तापमान भी 5600 डिग्री सेल्सियस है। वो इतनी ज्यादा गर्मी उत्पन्न करता है कि उसके करीब किसी भी तरह के उपग्रह का जान संभव नहीं है। वहीं पृथ्वी की सतह से अगर किसी टेलीस्कोप को आप सीधे सूर्य की ओर घूमा दें, तो वो पूरी तरह से खराब हो जाएगा।
आदित्य यान को इसरो पृथ्वी से करीब 15 लाख किमी भेजेगा। ये यान वहां पर स्थिर हो जाएगा। ये ऐसी जगह होगी, जहां से सूर्य हर वक्त यान को नजर आएगा। ऐसे में उस पर रिसर्च आसान हो जाएगी। इस यान से सूर्य की दूसरी 14.80 करोड़ किमी के आसपास होगी, ऐसे में उसको नुकसान भी नहीं पहुंचेगा।
इसरो के मुताबिक आदित्य को लैग्रेंज बिंदु-1 (एल-1) के चारों ओर एक प्रभामंडल कक्षा (होलो ऑर्बिट) में रखा जाएगा। इसी वजह से आदित्य यान के नाम के आगे एल-1 जोड़ा गया है। ये एक ऐसी जगह है, जहां ग्रहण का भी असर नहीं पड़ेगा। साथ ही सूर्य और यान के बीच कोई भी चीज नहीं आएगी।
कब होगा लॉन्च?
इस मिशन पर इसरो लंबे वक्त से काम कर रहा है। इसका ज्यादातर काम पूरा हो गया है। वैसे अभी लॉन्चिंग की तारीख नहीं घोषित की गई है, लेकिन माना जा रहा कि ये सितंबर के पहले हफ्ते में लॉन्च होगा। इसकी लॉन्चिंग के लिए भी आंध्र प्रदेश के श्रीहरिकोटा में सतीश धवन स्पेस सेंटर को चुना गया है।
ये होगा मुख्य काम
आदित्य सूर्य की संरचना को समझने की कोशिश करेगा। इसके अलावा वो सूर्य से निकलने वाली किरणों पर भी अध्ययन करेगा। सूर्य का कोरोनल इजेक्शन पृथ्वी को काफी प्रभावित करता है। कई बार इसका सीधा असर सैटेलाइट्स पर भी होता है। ये उससे जुड़े सवालों के जवाब खोजेगा।












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