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इशरत जहां एनकाउंटर केसः डीजी वंजारा और एनके अमीन को आरोपमुक्त करने की अपील सीबीआई कोर्ट में खारिज

By Rizwan
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    नई दिल्ली। गुजरात के अहमदाबाद में इशरत जहां की कथित फर्जी मुठभेड़ मामले में पूर्व आईपीएस डीजी वंजारा और एनके अमीन की आरोपमुक्त करने की अर्जी सीबीआई की विशेष अदालत ने मंगलवार को खारिज कर दी। पुलिस के सेवानिवृत्त अधीक्षक एनके अमीन इस मामले में सह आरोपी हैं। मुठभेड़ मामले में डीजी वंजारा और एनके अमीन को बरी करने की याचिकाओं पर सुनवाई कर रही सीबीआई की विशेष अदालत सात अगस्त को मामले की अगल सुनवाई करेगी।

    नई दिल्ली। गुजरात के अहमदाबाद में इशरत जहां की कथित फर्जी मुठभेड़ मामले में पूर्व आईपीएस डीजी वंजारा और एनके अमीन की आरोपमुक्त करने की अर्जी सीबीआई की विशेष अदालत ने मंगलवार को खारिज कर दी। पुलिस के सेवानिवृत्त अधीक्षक एनके अमीन इस मामले में सह आरोपी हैं। मुठभेड़ मामले में डीजी वंजारा और एनके अमीन को बरी करने की याचिकाओं पर सुनवाई कर रही सीबीआई की विशेष अदालत सात अगस्त को मामले की अगल सुनवाई करेगी। विशेष न्यायाधीश जेके पांड्या ने 30 जून को सुनवाई पूरी कर ली थी। पिछली सुनवाई के दौरान अदालत ने फैसला सुरक्षित रख लिया था। इस मामले में गुजरात पुलिस के पूर्व प्रभारी महानिदेशक पीपी पांडेय को साक्ष्यों के अभाव में आरोपमुक्त कर दिया गया था। वंजारा ने इसी को आधार बनाते हुए खुद को आरोपमुक्त किये जाने की अर्जी दी है। उन्होंने अर्जी में आरोपपत्र को मनगढ़ंत और गवाहों के बयानों को संदिग्ध बताया है। सीबीआई ने इन अधिकारियों की याचिका का विरोध करते हुए अदालत को बताया कि वंजारा और अमीन इस साजिश से अलग नहीं हैं। 15 जून, 2004 को इशरत जहां और तीन दूसरे लोगों को अहमदाबाद में एक मुठभेड़ में मार दिया गया था। सितंबर 2009 में ही अहमदाबाद मेट्रोपोलिटन मजिस्ट्रेट की अदालत ने मुठभेड़ को फर्जी करार दिया। मामला सीबीआई के पास चला गया, सीबीआई ने भी मामले के फर्जी होने की बात कही। सीबीआई के मुताबिक, मारे जाने से पहले ये तमाम लोग पुलिस हिरासत में थे और ये पूरी मुठभेड़ फर्जी तरीके से की गई।

    विशेष न्यायाधीश जेके पांड्या ने 30 जून को सुनवाई पूरी कर ली थी। पिछली सुनवाई के दौरान अदालत ने फैसला सुरक्षित रख लिया था। इस मामले में गुजरात पुलिस के पूर्व प्रभारी महानिदेशक पीपी पांडेय को साक्ष्यों के अभाव में आरोपमुक्त कर दिया गया था। वंजारा ने इसी को आधार बनाते हुए खुद को आरोपमुक्त किये जाने की अर्जी दी है। उन्होंने अर्जी में आरोपपत्र को मनगढ़ंत और गवाहों के बयानों को संदिग्ध बताया है। सीबीआई ने इन अधिकारियों की याचिका का विरोध करते हुए अदालत को बताया कि वंजारा और अमीन इस साजिश से अलग नहीं हैं।

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    15 जून, 2004 को इशरत जहां और तीन दूसरे लोगों को अहमदाबाद में एक मुठभेड़ में मार दिया गया था। सितंबर 2009 में ही अहमदाबाद मेट्रोपोलिटन मजिस्ट्रेट की अदालत ने मुठभेड़ को फर्जी करार दिया। मामला सीबीआई के पास चला गया, सीबीआई ने भी मामले के फर्जी होने की बात कही। सीबीआई के मुताबिक, मारे जाने से पहले ये तमाम लोग पुलिस हिरासत में थे और ये पूरी मुठभेड़ फर्जी तरीके से की गई।

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    English summary
    Ishrat Jahan encounter case Court rejects discharge pleas of DG Vanzara and NK Amin

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