केंद्र में क्या किसी देवेगौड़ा की आहट है, चंद्रशेखर राव की इस मुलाकात से बढ़ी हलचल

नई दिल्ली- 5 चरणों में 424 सीटों पर चुनाव हो चुके हैं। अगले दो दौर में 119 लोकसभा सीटों पर चुनाव होने हैं। नतीजे 23 मई को आएंगे, लेकिन उससे पहले ही नई सरकार के लिए संभावित सियासी समीकरणों की खिचड़ी पकनी शुरू हो गई है। इसके सूत्रधार बने हैं, फेडरल फ्रंट वाले विचार के अगुवा तेलंगाना के मुख्यमंत्री और टीआरएस (TRS) प्रमुख के चंद्रशेखर राव (KCR)। उन्होंने सबसे पहले केरल के मुख्यमंत्री पिनराई विजयन से मुलाकात करके नई सियासी जुगलबंदी के चर्चे को काफी रोचक बना दिया है। दरअसल, दक्षिण भारत के पांच राज्यों की 123 लोकसभा सीटों पर केसीआर (KCR) की नजर है और उन्हें लगता है कि यहां की क्षेत्रीय पार्टियों का सहयोग मिल गया, तो एक बार फिर दक्षिण भारत देश को प्रधानमंत्री दे सकता है।

एनडीए-यूपीए के विकल्प की तलाश

एनडीए-यूपीए के विकल्प की तलाश

तेलंगाना के सीएम केसीआर (KCR)की केरल के मुख्यमंत्री पिनराई विजयन (Pinarayi Vijayan) से मुलाकात इस समय देश का सबसे हॉट पॉलिटिकल टॉपिक है। इस मुलाकात के बारे में विजयन ने कहा है,"केसीआर के साथ कल की बैठक बहुत ही महत्वपूर्ण है। हमनें राष्ट्रीय राजनीतिक स्थिति पर चर्चा की। केसी राव के मुताबिक, दोनों फ्रंट को बहुमत नहीं मिलेगा। इसलिए, क्षेत्रीय पार्टियां मुख्य भूमिका निभाएंगी। प्रधानमंत्री उम्मीदवार के बारे में कोई चर्चा नहीं हुई।" यह भी दिलचस्प बात है कि केसीआर ने देश की भावी राजनीति पर सीपीएम नेतृत्व से सीधे बात न करके अपने समकक्ष विजयन से मुलाकात करना ज्यादा सही समझा है। इसकी वजह ये है कि सीपीएम की जड़ें अब बंगाल और त्रिपुरा से उखड़ चुकी हैं और फिलहाल वह केरल में ही सत्ता में है, जिसके विजयन बहुत ताकतवर नेता हैं। जबकि, पार्टी का केंद्रीय नेतृत्व का झुकाव यूपीए की ओर ही दिखता रहा है। वैसे, यह अलग बात है कि सबरीमाला (Sabarimala) विवाद के बाद हुए चुनाव में विजयन राज्य में पार्टी को कितनी सीटें दिला पाते हैं। क्योंकि, वहां 23 अप्रैल के चुनाव में महिलाओं ने भारी तादाद में वोटिंग की है।

केसीआर बने सूत्रधार

केसीआर बने सूत्रधार

पिनराई विजयन (Pinarayi Vijayan) से मुलाकात के अलावा अगले कुछ दिनों में केसीआर (KCR) की कुछ और नेताओं से मिलने की योजना है। चर्चा तो उनके डीएमके (DMK) अध्यक्ष एमके स्टालिन (M K Stalin) से भी मिलने की है, लेकिन खबरें हैं कि वह फिलहाल उनसे मुलाकात से कन्नी काट रहे हैं। इसका कारण यह भी हो सकता है कि डीएमके का तमिलनाडु में कांग्रेस के साथ गठबंधन है और वह चुनाव परिणाम आने से पहले किसी तरह की जल्दबाजी से बचना चाहते हों। गौरतलब है कि केसीआर (KCR) ने एक साल पहले ही फेडरल फ्रंट (federal front) का आइडिया दिया था। उन्होंने तब इस सिलसिले में ममता बनर्जी (Mamata Banerjee), देवगौड़ा (Deve Gowda), एम के स्टालिन (M K Stalin), अखिलेश यादव (Akhilesh Yadav) और वाईएस जगन मोहन रेड्डी (Y S Jagan Mohan Reddy) से मुलाकात भी की थी, लेकिन, तब सिर्फ जगन मोहन रेड्डी ने ही उनकी आइडिया का समर्थन किया था।

केसीआर बनना चाहते हैं किंगमेकर

केसीआर बनना चाहते हैं किंगमेकर

केरल के मुख्यमंत्री ने भले ही कहा हो कि दोनों नेताओं की मुलाकात में प्रधानमंत्री के उम्मीदवार पर चर्चा नहीं हुई, लेकिन एनडीटीवी ने सूत्रों के हवाले से कहा है कि केसीआर (KCR) ने 'दक्षिण भारत से' प्रधानमंत्री के उम्मीदवार का सुझाव दिया था, लेकिन किसी का नाम नहीं लिया। वैसे, अगर इस खबर को कुछ दिनों पहले केसीआर (KCR) की बेटी के बयान से जोड़कर देखें, तो तस्वीर ज्यादा स्पष्ट हो जाती है। निजामाबाद की मौजूदा लोकसभा सांसद के कविथा (K Kavitha) ने तब दावा किया था कि इस चुनाव में गैर-कांग्रेसी और गैर-बीजेपी क्षेत्रीय पार्टियों को 120 से ज्यादा सीटें मिलेंगी और वही सत्ता की प्रबल दावेदार होंगी। गौरतलब है कि तेलंगाना में लोकसभा की 17 सीटें हैं और उनमें से अधिकतर पर केसीआर (KCR) की पार्टी टीआरएस (TRS) की संभावना बेहतर है। ऐसे में अगर उनके पास नंबर रहे, तो वह खुद को भी पीएम के दावेदार के तौर पर पेश कर सकते हैं, क्योंकि विधानसभा में उनके पास बंपर बहुमत है और वह परिवार के जिस सदस्य को चाहें मुख्यमंत्री बना सकते हैं। अगर यह नहीं हो पाया तो भी कम से कम किंगमेकर तो बन ही सकते हैं।

माया-ममता भी रेस में?

माया-ममता भी रेस में?

बीएसपी सुप्रीमो मायावती (Mayawati) अब तक प्रधानमंत्री के मसले पर चुप थीं, लेकिन सोमवार को उन्होंने भी बिना बोले अपने दिली ख्वाहिश का संकेत जाहिर कर दिया है। उन्होंने यूपी के अंबेडकर नगर के लोगों से कहा कि, "अगर सब कुछ ठीक रहा तो मुझे यहां से चुनाव लड़ना पड़ सकता है, क्योंकि राष्ट्रीय राजनीति की राह अंबेडकर नगर से होकर गुजरती है।" इससे साफ है कि मायावती खिचड़ी सरकार बनने की परिस्थितियों में अपनी संभावना कहां तक देखती हैं। वहीं, टीएमसी नेता ममता बनर्जी के पास बंगाल की 42 सीटों का हौसला है। 2014 में उनकी पार्टी को 36 सीटें मिली थीं। अगर इस बार उन्होंने बीजेपी की चुनौतियों को खारिज कर दिया, तो पीएम पद के लिए रिंग में वह अपना दावा ठोंकने से भी पीछे नहीं हटेंगी।

फिर से देवगौड़ा हो सकते हैं विकल्प?

फिर से देवगौड़ा हो सकते हैं विकल्प?

जिस लाइन पर केसीआर (KCR) सोच रहे हैं, उसमें जेडीएस के एच डी देवगौड़ा (H D Devegowda) बेहतर तरीके से फिट बैठते हैं। उनके पास प्रधानमंत्री बनने का अनुभव भी है और वह दक्षिण भारत से भी हैं। शायद इन्हीं उम्मीदों के चलते वह इस बार के चुनाव में भी अपना भाग्य आजमा रहे हैं। ऑल इंडिया मजलिस-ए-इस्तेहादुल मुसलमीन (AIMIM) के असदुद्दीन ओवैसी पहले ही पीएम पद के दावेदार के तौर पर उनका नाम उछाल चुके हैं। अब केसीआर (KCR) के मूवमेंट को देखकर उनके बेटे और कर्नाटक के मुख्यमंत्री एचडी कुमारस्वामी (H D Kumaraswamy) को भी इसकी संभावना नजर आने लगी है। खबरों के मुताबिक उन्हें जैसे ही केसीआर (KCR) के केरल जाने की भनक लगी, उन्होंने उनसे फौरन फोन पर बात करके मौजूदा राजनीतिक हालात पर चर्चा की।

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