तिब्बती बच्चों को मोहरा बना रहा है ड्रैगन ? अरुणाचल से सटे इलाके में चीन की खतरनाक चाल
धर्मशाला, 8 अगस्त: चीन की ओर से तिब्बत में 8 साल से 16 साल के बच्चों को नए मिलिट्री एजुकेशन कैंपों में भेजा जा रहा है। जानकारी के मुताबिक ऐसे कैंप इसी साल से अरुणाचल प्रदेश की सीमा से सटे चीन के कब्जे वाले तिब्बत स्वायत्त क्षेत्र में स्थापित किए गए हैं। मीडिया रिपोर्ट के मुताबिक ये मिलिट्री-स्टाइल वाले कैंप न्यिंगत्री शहर के उन इलाकों में बनाए गए हैं, जो पहले से ही चीन की सैन्य गतिविधियों के लिए संवेदनशील माने जाते हैं। गौरतलब है कि पिछले महीने ही चीन के राष्ट्रपति शी जिनपिंग इस इलाके का औचक, लेकिन संदिग्ध दौरा कर चुके हैं।

तिब्बती बच्चों के दिमाग में जहर घोल रहा है चीन ?
तिब्बत केंद्रित मीडिया संस्थान फायूल ने खबर दी है कि तिब्बत में चीन की सेना के प्रभाव वाले इलाकों में स्कूली बच्चों के लिए मिलिट्री एजुकेशन कैंप स्थापित करने के पीछे का मकसद कम्युनिस्ट पार्टी ऑफ चाइना की सत्ता के प्रति दिलचस्पी और रुझान बढ़ाना है। हालांकि, चीन की ओर से दावा किया गया है कि इन कैंपों का लक्ष्य 'देशभक्ति की भावना और देशभक्ति की भावना को बढ़ाना, राष्ट्र की रक्षा करना, शारीरिक शक्ति बढ़ाना, मानसिक शक्ति और सहनशक्ति में इजाफा करना; और बच्चों में एकता की भावना को भी बढ़ाना' है। फायूल ने ये रिपोर्ट चीन की सरकारी मीडिया के हवाले से दी है। गौर करने वाली बात ये है कि चीन लंबे समय से इस तरह हथकंडों का इस्तेमाल लोगों के विचारों को उस तरह से आकार देने के लिए करता रहा है, जिस तरह से वह शासन चलाने के लिए करना चाहता है।

अनुशासन की पाठशाला या ड्रैगन की डोज ?
रिपोर्ट के मुताबिक इस साल गर्मियों की छुट्टी के दौरान जून और जुलाई में इन तिब्बती बच्चों को ड्राक्सम त्सो झील के किनारे यंग तिब्बती स्नो हॉक मिलिट्री समर कैंप और तिब्बत रोंग हे मिलिट्री ट्रेनिंग कैंप में ट्रेनिंग और फिजिकल एक्सरसाइज के जरिए अनुशासन का पाठ पढ़ाया गया है। ये कैंप उसी तरह के हैं, जिस तरह के वोकेशनल स्किल ट्रेनिंग सेंटर न्यिंगत्री शहर में तिब्बती किसानों, खानाबदोशों और राजनीतिक कैदियों के लिए चलाए जाते हैं। इस रिपोर्ट में फ्री तिब्बत की उस रिपोर्ट का जिक्र किया गया है, जिसमें 2008 से तिब्बतियों के विद्रोह बढ़ने की बात कही गई है, जिसके बाद से कम्युनिस्ट पार्टी ऑफ चीन ने निगरानी के लिए आर्टिफिशियल इंटेलिजेंस पर फोकस किया है और (तिब्बतियों के)संबंधों, वंश, जीवन शैली और वफादारी (दलाई लामा के प्रति) को तोड़ने वाली अपनी नीतियों पर नए सिरे से जोर दिया है। (ऊपर की तस्वीरें- प्रतीकात्मक)

शिंजियांग प्रांत में भी चीन ऐसे ही कर रहा है खेल
चीन के शिजियांग प्रांत का उदाहरण हमारे सामने है। जिसमें वह कई तरह के ऐसे ही कैंप चलाता है, जिसे वह नागरिकों के लिए सुधारगृह या शिक्षा केंद्र होने का दावा करता है। लेकिन, दुनियाभर की कई ऐसी अंतरराष्ट्रीय रिपोर्ट सामने आ चुकी हैं, जिससे जाहिर होता है कि ये कैंप असल में नजरबंदी के ठिकानों के अलावा कुछ भी नहीं है, जैसा कि चीन की ओर से उनके शिक्षा केंद्र होने का दावा किया जाता है। वहां लोगों को उसी तरह से सोचने को मजबूर किया जाता है, जिस तरह से शी जिनपिंग की सरकार और उनकी कम्युनिस्ट पार्टी ऑफ चाइना चाहती है।

नजरबंदी कैंप हैं चीन के प्रातड़ना केंद्र
पश्चिमी मीडिया रिपोर्ट के मुताबिक शिंजियांग के कैंपों में शिक्षा के नाम पर मानवाधिकारों का बहुत ही ज्यादा उल्लांघन किया जाता है, जिसमें बलात्कार से लेकर, प्रताड़ना और योजनाबद्ध तरीके से यौन शोषण शामिल हैं। कुछ महीने पहले ही अमेरिका ने चीन से कहा था कि मनमाने ढंग से हिरासत में लिए गए सभी लोगों को तुरंत रिहा करने और नजरबंदी शिविरों को बंद करने पर ध्यान दे। यही नहीं ड्रैगन से कहा गया था कि वह शिंजियांग प्रांत में उइगर मुसलमानों और बाकी धार्मिक अल्पसंख्यकों का सफाया करने के लिए जबरिया नसबंदी कराना बंद करे और लोगों को सताना रोक दे।












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