Menstrual Leave: पीरियड्स में महिलाओं को मिलेगी छुट्टी? जानिए सुप्रीम कोर्ट ने सुनवाई में क्या-क्या कहा?
Menstrual Leave: देश में मासिक धर्म अवकाश यानी पीरियड्स के दौरान महिलाओं को छुट्टी दी जाए या नहीं, इसपर लंबे वक्त से बहस छिड़ी हुई है। अब सुप्रीम कोर्ट ने सोमवार (8 जुलाई) को इस मामले पर सुनवाई की है। आइए जानें सुप्रीम कोर्ट ने सुनवाई के दौरान क्या कहा है?
सुप्रीम कोर्ट ने मासिक धर्म (पीरियड्स) अवकाश को लेकर केंद्र और राज्यों से पूछा कि क्या देशभर में छात्राओं और कामकाजी महिलाओं के लिए अनिवार्य मासिक धर्म अवकाश के संबंध में संबंधित हितधारकों के साथ चर्चा के बाद कोई रूपरेखा तैयार की जा सकती है। अगर की जा सकती है कि मासिक धर्म अवकाश पर एक आदर्श नीति तैयार करे।

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मासिक धर्म अवकाश को लेकर आदर्श नीति बनाना सरकार का काम है: सुप्रीम कोर्ट
भारत के मुख्य न्यायाधीश डीवाई चंद्रचूड़ की अगुवाई वाली पीठ ने छात्राओं और पेशेवर महिलाओं के लिए मासिक धर्म अवकाश की मांग करने वाली याचिका पर विचार करने से इनकार करते हुए यह बयान दिया है। सुप्रीम कोर्ट ने कहा है कि पीरियड्स में महिलाओं को छुट्टी मिलनी चाहिए या नहीं, ये तय करना सरकार का काम है। पीठ ने कहा है कि इस मामले में एक आदर्श नीति बनाना सरकार का काम है। सरकार को जल्द इसपर सोचना चाहिए।
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चीफ जस्टिस डीवाई चंद्रचूड़ बोले- हो सकता है कंपनियां महिलाओं को नौकरी ना दे
चीफ जस्टिस डीवाई चंद्रचूड़ ने कहा कि, ''मासिक धर्म अवकाश अनिवार्य करने से देश के कार्यबल में महिलाओं की भागीदारी बढ़ सकती है। लेकिन अगर महिलाओं के लिए ऐसी छुट्टी दिए जाने का फैसला कोर्ट करती है तो इसका असर महिलाओं पर गलत भी पड़ सकता है...क्योंकि प्राइवेट कंपनियां उन्हें नौकरी देने से बचना चाहेगी।''
चीफ जस्टिस डीवाई चंद्रचूड़ ने आगे कहा कि, ''कभी-कभी महिलाओं की सुरक्षा के लिए किए गए उपाय उनके लिए नुकसानदेह हो सकते हैं। यह वास्तव में सरकार की नीति का पहलू है और अदालतों को इस पर गौर नहीं करना चाहिए।''
मासिक धर्म अवकाश को लेकर क्यों छिड़ी है बहस?
मासिक धर्म अवकाश को लेकर सुप्रीम कोर्ट में 8 जुलाई को सुनवाई अधिवक्ता शैलेंद्र मणि त्रिपाठी द्वारा दायर याचिका पर की गई है। इस याचिका में केंद्र और राज्य सरकारों को देश भर में छात्राओं और कामकाजी महिलाओं को मासिक धर्म के दौरान मासिक अवकाश देने के निर्देश देने की मांग की गई थी।
याचिकाकर्ता ने सुप्रीम कोर्ट को बताया कि हालांकि उन्होंने मई 2023 में केंद्र को एक अभ्यावेदन प्रस्तुत किया था, लेकिन अभी तक कोई प्रतिक्रिया नहीं मिली है। इस पर चीफ जस्टिस डीवाई चंद्रचूड़ ने कहा कि चूंकि मुद्दे "राज्य नीति के विविध उद्देश्यों" को उठाते हैं, इसलिए अदालत के लिए अपने पिछले आदेश के आलोक में "हस्तक्षेप" करने का कोई कारण नहीं है।
सुप्रीम कोर्ट ने मामले तो महिला एवं बाल विकास मंत्रालय के पास भेजा
सुप्रीम कोर्ट ने याचिकाकर्ता को महिला एवं बाल विकास मंत्रालय के सचिव और अतिरिक्त सॉलिसिटर जनरल (एएसजी) ऐश्वर्या भाटी के पास जाने की अनुमति दी।
डीवाई चंद्रचूड़ ने कहा, "हम सचिव से अनुरोध करते हैं कि वे नीति स्तर पर मामले को देखें और सभी हितधारकों से परामर्श करने के बाद निर्णय लें और देखें कि क्या एक आदर्श नीति तैयार की जा सकती है।"
इन देशों में महिलाओं को मिलता है मासिक धर्म अवकाश
फरवरी 2023 को सुप्रीम कोर्ट ने शैलेंद्र मणि त्रिपाठी की याचिका पर विचार करने से इनकार कर दिया था और इसे सरकारी मामला बताया था। इस याचिका में कहा गया है कि चीन, वेल्स, जापान, इंडोनेशिया, यूके, स्पेन, जाम्बिया और दक्षिण कोरिया जैसे देशों में महिलाओं को मासिक धर्म अवकाश दिया जाता है।












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