क्या महाराष्ट्र के चुनावी मैदान में उतरने से पहले ही हार चुकी है कांग्रेस?

नई दिल्ली- शुक्रवार को महाराष्ट्र विधानसभा चुनाव के लिए नामांकन दाखिल करने की समय-सीमा खत्म हो गई। 21 अक्टूबर को चुनाव होने हैं। लेकिन, महाराष्ट्र कांग्रेस के नेताओं ने एक-एक करके जिस तरह से पार्टी नेतृत्व पर सवाल उठाते हुए मोर्चा खोला है, उससे पार्टी के लिए बीजेपी-शिवसेना गठबंधन का मुकाबला कर पाना बहुत ही कठिन चुनौती बन गई है। यही वजह है कि बीजेपी अध्यक्ष अमित शाह सार्वजनिक तौर पर कह चुके हैं कि अगर पार्टी तैयार हो जाए तो एक-दो को छोड़कर महाराष्ट्र के सारे कांग्रेस नेता भाजपा में आने को उतावले बैठे हैं। पिछले महीने भर में ही लगभग आधा दर्जन नेता कांग्रेस छोड़ चुके हैं और कई सही मौके की तलाश में बैठे हैं। आलम ये चुका है कि अब प्रदेश के कद्दावर नेताओं ने ही कहना शुरू कर दिया है कि टिकट बंटवारे में जिस तरह की मनमानी कई गई है, उससे ज्यादातर कांग्रेस उम्मीदवारों की जमानतें जब्त होनी तय हैं।

Recommended Video

    Sanjay Nirupam के बागी सुर , बोले Sonia Gandhi के इर्द-गिर्द बैठे हैं चापलूस लोग | वनइंडिया हिंदी
    निरुपम ने चुनाव से पहले जमानत जब्त होने की कही बात

    निरुपम ने चुनाव से पहले जमानत जब्त होने की कही बात

    पिछले महीने भर में ही महाराष्ट्र कांग्रेस के कई नेता पार्टी को टाटा कह चुके हैं। कुछ ने बीजेपी ज्वाइन कर ली है तो कुछ अपनी भविष्य की नई राजनीतिक पारी शुरू करने के लिए मौजूद विकल्पों की तलाश में जुट गए हैं। लगता है कि इस लिस्ट में जल्द ही मुंबई कांग्रेस के पूर्व अध्यक्ष और अपने बयानों के चलते चर्चित रहने वाले संजय निरुपम का नाम भी जुड़ने की आशंका वे मुंबई कांग्रेस में खुद की अनदेखी से इतने बौखलाए हुए हैं कि उन्होंने बिना नाम लिए पार्टी आलाकमान को ही निशाना बनाना शुरू कर दिया है और एक तरह से उन्होंने अब पार्टी को नोटिस पर रख छोड़ा है। उनका दावा है कि वे महाराष्ट्र कांग्रेस के प्रभारी महासचिव मल्लिकार्जुन खड़गे से मुंबई की वर्सोवा, गोरेगांव, अंधेरी ईस्ट और डिंडोसी सीटों के लिए चार दावेदारों को उनसे मिलवाकर आए थे। लेकिन, टिकट तो दूर खड़गे ने उनसे बात तक नहीं की। अपने दबदबे वाले उत्तर मुंबई की इन सीटों पर नजरअंदाज किए जाने से वे इतने नाराज हैं कि उन्होंने यहां तक दिया है कि, "मुंबई में 3-4 सीटें छोड़कर शायद हर जगह हमारी जमानत जब्त हो सकती है। बगैर किसी प्रक्रिया, बगैर किसी रिसर्च, बगैर किसी सर्वे के, बगैर किसी ग्राउंड फीडबैक के, ग्रासरूट के फीडबैक के अपने पसंद-नापसंद के आधार पर नाम तय कर दिए गए।" उन्होंने पार्टी में जारी एक और मतभेद को यह कहकर जाहिर किया कि राहुल गांधी के समर्थकों को जानबूझकर किनारा किया जा रहा है। वे गुरुवार से ही पार्टी छोड़ने की धमकी दे रहे हैं। अब सवाल उठता है कि जब कांग्रेस का बड़ा नेता खुद ही पार्टी उम्मीदवारों की जमानत जब्त करने के दावे कर रहा है तो नेता मतदाताओं के सामने क्या कहने की स्थिति में होगी?

    पिछले महीने कई नेताओं ने छोड़ी कांग्रेस

    पिछले महीने कई नेताओं ने छोड़ी कांग्रेस

    संजय निरुपम अकेले नहीं है। इससे पहले महाराष्ट्र के पूर्व मंत्री और मुंबई कांग्रेस के पूर्व अध्यक्ष कृपाशंकर सिंह भी पार्टी में चापलूसों की ही चलने का आरोप लगाकर पार्टी छोड़ चुके हैं। उन्होंने कांग्रेस महासचिव केसी वेणुगोपाल को भेजे कारण बताओ नोटिस के जवाब में लिखा था, "यह जानकर बहुत दुख हुआ कि पार्टी नेताओं के एक के बाद इस्तीफे की वजहों का पता लगाने की कोशिशों की बजाय, पार्टी नेतृत्व सिर्फ दूतों की हत्या करने पर ही अपनी ऊर्जा बर्बाद कर रहा है। " उन्होंने आरोप लगाया था कि अब कांग्रेस में सिर्फ क्षत्रपों और चापलूसों का ही बसेरा है। उन्होंने पार्टी नेतृत्व पर ये भी आरोप लगाया था कि जमीनी कार्यकर्ताओं को नजरअंदाज किया जा रहा है। दरअसल, वेणुगोपाल ने इनपर मौकापरस्त होने का आरोप लगा दिया था, जिसके बाद उन्होंने खत लिखकर अपनी भड़ास निकाली थी। पिछले महीने ही अभिनेत्री से नेता बनीं उर्मिला मातोंडकर ने लगभग ऐसे ही आरोप लगाते हुए पार्टी को अलविदा कह दिया था। वे पांच महीने पहले ही कांग्रेस में आईं थीं और लोकसभा चुनाव में पार्टी की उम्मीदवार भी बनीं थीं। चुनाव हारने के तत्काल बाद उन्होंने आरोप लगाना शुरू कर दिया था कि उनके साथ भीतरघात किया गया है। सितंबर में कांग्रेस छोड़कर बीजेपी में शामिल होने वाले नामों में वरिष्ठ कांग्रेसी नेता और राज्य के पूर्व मंत्री हर्षवर्धन पाटिल का भी नाम शामिल है।

    गुटबाजी को रोकने में नाकाम रहा नेतृत्व

    गुटबाजी को रोकने में नाकाम रहा नेतृत्व

    लोकसभा चुनाव में बुरी तरह हारने के बाद संभलने के लिए कांग्रेस को लंबा वक्त मिला। लेकिन, शायद पार्टी उसपर सही तरीके से काम नहीं कर सकी, इसलिए लोकसभा चुनाव के बाद से ही नेताओं के पार्टी छोड़ने का सिलसिला जो शुरू हुआ, वह खत्म होने का नाम ही नहीं ले रहा है। मसलन, आम चुनाव के तत्काल बाद महाराष्ट्र विधानसभा में नेता विपक्ष राधाकृष्ण विखे पाटिल कांग्रेस छोड़कर भाजपा में शामिल हो गए थे। उनके बेटे तो पहले ही बीजेपी में शामिल होकर अहमदनगर से जीत भी दर्ज कर ली थी। राधाकृष्ण विखे पाटिल के बाद अब्दुल सत्तार ने भी बीजेपी को ही अपना ठिकाना बनाया। जानकारी के मुताबिक कई कांग्रेसी नेता अभी भी भाजपा के संपर्क में बने हुए हैं। इसका अंदाजा 1 सितंबर को सोलापुर में महाजनसंदेश यात्रा के दौरान अमित शाह का दिया ये बयान भी है, "अगर बीजेपी अपना दरवाजा पूरी तरह खोल दे तो शरद पवार और पृथ्वीराज चव्हाण को छोड़कर अपनी पार्टियों में कोई भी नहीं बचेगा।" लेकिन, इस स्पष्ट चुनौती के बावजूद कांग्रेस पार्टी में जारी मतभेद और गुटबाजी को रोकने में नाकाम रही है।

    चुनाव में क्या होगा पार्टी का अंजाम?

    चुनाव में क्या होगा पार्टी का अंजाम?

    ऐसा नहीं है कि पार्टी नेतृत्व को इन सब चीजों के बारे में पता नहीं है। महाराष्ट्र कांग्रेस के अध्यक्ष बालासाहेब थोराट खुद ही कार्यकर्ताओं से अपील कर चुके हैं कि बीजेपी के खिलाफ लड़ने के लिए एकजुट रहने की आवश्यकता है। लेकिन, वे भी हालात को दुरुस्त कर पाने में नाकाम रहे हैं। ऊपर से मुंबई कांग्रेस के एक और पूर्व अध्यक्ष मिलिंद देवड़ा के हाल के दो-तीन बयान पार्टी कैडरों को कन्फ्यूज्ड अलग कर रहा है। अमेरिकी यात्रा के दौरान वे लगातार दो-दो बार प्रधानमंत्री नरेंद्र मोदी की तारीफ करने के लिए भी कांग्रेस के एक वर्ग के निशाने पर रह चुके हैं। इससे पहले वे आर्टिकल-370 पर भी खुलकर सरकार का साथ देकर नेतृत्व को अंदर ही अंदर नाखुश कर चुके हैं। हालांकि, उन्होंने अपना पक्ष यह कहकर अच्छी तरह से रखा है कि देशहित के मामले में उन्होंने जो भी कहा है वे इसपर कायम हैं और एक तरह से उन्होंने बाकियों को भी नसीहत देने की कोशिश की है। मतलब साफ है कि महाराष्ट्र कांग्रेस पर आलाकमान की पकड़ ढीली पड़ चुकी है। कोई किसी की सुनने को तैयार नहीं है। प्रदेश नेताओं का कहना है कि राज्य की जमीनी हालात से वे तो वाकिफ हैं, लेकिन फैसले दिल्ली से थोपे जा रहे हैं।

    Notifications
    Settings
    Clear Notifications
    Notifications
    Use the toggle to switch on notifications
    • Block for 8 hours
    • Block for 12 hours
    • Block for 24 hours
    • Don't block
    Gender
    Select your Gender
    • Male
    • Female
    • Others
    Age
    Select your Age Range
    • Under 18
    • 18 to 25
    • 26 to 35
    • 36 to 45
    • 45 to 55
    • 55+