13 साल से अनशन कर रही इरोम शर्मिला को नहीं मिली मतदान की अनुमति

Human rights activist Irom Sharmila Chanu
इंफाल। मणिपुर में सशस्त्र बल (विशेष शक्तियां) अधिनियम, 1958 (एएफएसपीए) के खिलाफ 13 वर्षो से अनशन कर रहीं इरोम शर्मिला चानू को कानून के मुताबिक गुरुवार के लोकसभा चुनाव में मतदान करने की अनुमति नहीं मिली। निर्वाचन आयोग के एक अधिकारी ने बताया कि जनप्रतिनिधित्व अधिनियम,1951 की धारा 62 (5) के तहत जेल में कैद व्यक्ति मतदान नहीं कर सकता।

उन्होंने बताया कि शर्मिला ने पहले वोट डालने की इच्छा जाहिर करते हुए एक प्रार्थना पत्र लिखा था। लेकिन कानून के मुताबिक हम उनकी प्रार्थना स्वीकार नहीं कर सकते। शर्मिला ने हाल ही में इंफाल में मतदाताओं से कहा था कि मैंने कभी मतदान नहीं किया क्योंकि लोकतंत्र से मेरा विश्वास उठ गया था, लेकिन भ्रष्टाचार विरोधी नया दल 'आम आदमी पार्टी' (आप) के उदय ने मेरी सोच बदल दी।

राज्य की दूसरी लोकसभा सीटी आंतरिक मणिपुर के लिए गुरुवार को मतदान हो रहा है, जबकि जनजाति आरक्षित बाह्य मणिपुर लोकसभा सीट के लिए नौ अप्रैल को मतदान हुआ था। शर्मिला चार नवंबर 2000 से अनिश्चित कालीन उपवास पर हैं। वह सशस्त्र बल (विशेष शक्तियां) अधिनियम, 1958 (एएफएसपीए) को निरस्त करने की मांग कर रही हैं।

शर्मिला पर आत्महत्या का प्रयास करने का आरोप लगाया गया था। इस आरोप के तहत उन्हें लगातार एक साल तक हिरासत में रखा जा सकता है। शर्मिला की बीमार हालत के कारण इस समय उन्हें इंफाल में जवाहर लाल नेहरू चिकित्सा विज्ञान संस्थान में रखा गया है, जिसे उनकी उप-जेल घोषित किया गया है।एएफएसपीए के तहत सुरक्षा बलों को किसी को देखते ही गोली मार देने, बिना वारंट और बिना जांच के किसी को भी गिरफ्तार करने जैसे असीमित अधिकार मिल जाते हैं। यह अधिनियम सुरक्षा बलों को इसके तहत की गई किसी भी कर्रवाई के खिलाफ कानूनी प्रकिया से भी बचाता है।

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