Strait of Hormuz में आधी रात को भारतीय जहाज का किसने दिया साथ? हमले के डर से तैयार थे लाइफ राफ्ट
Iran Guides Indian Tanker Strait of Hormuz: मिडिल ईस्ट में जारी खौफनाक तनाव के बीच होर्मुज के 'डेथ जोन' से एक ऐसी खबर आई है जिसने पूरी दुनिया को चौंका दिया है। जहां दुनिया का कोई भी जहाज जाने की हिम्मत नहीं जुटा पा रहा, वहां भारतीय तिरंगा शान से लहराता नजर आया। ये महज एक सफर नहीं था, बल्कि समंदर के सीने पर भारत की कूटनीति की सबसे बड़ी जीत थी।
आइए जानते हैं जब चारों तरफ मिसाइलें और ड्रोन मंडरा रहे थे, तब किस देश की नौसेना ने खुद आगे बढ़कर भारत के विशालकाय गैस टैंकर का हाथ थामा?

दरअसल, यह घटना तब हुई जब पिछले कुछ हफ्तों में कई जहाजों पर मिसाइल और ड्रोन हमले हुए हैं। ब्लूमबर्ग की रिपोर्ट के अनुसार, ईरानी नौसेना ने एक भारतीय गैस टैंकर (LNG) को गुजरने की अनुमति दी। ईरानी नौसेना ने न केवल रास्ता दिया बल्कि जहाज की सुरक्षा भी की।
जहाज पर मौजूद एक वरिष्ठ अधिकारी ने बताया कि यह उन दो भारतीय जहाजों में से एक था जिन्हें इस बेहद संवेदनशील क्षेत्र को पार करने की अनुमति मिली थी।
हमले के डर से तैयार थे लाइफ राफ्ट
ट्रांजिट के दौरान, भारतीय जहाज लगातार ईरानी नौसेना के साथ रेडियो संपर्क में था। ईरान ने जहाज के झंडे, चालक दल की राष्ट्रीयता और गंतव्य (Destination) जैसी विस्तृत जानकारी ली।
- भारतीय क्रू: जहाज के सभी सदस्य भारतीय थे।
- सुरक्षा प्रोटोकॉल: हमले के डर से चालक दल ने लाइफ राफ्ट तैयार रखे थे।
- तकनीकी चुनौतियां: यात्रा के दौरान जीपीएस (GPS) व्यवधान का सामना करना पड़ा और पहचान छुपाने के लिए ऑटोमैटिक आइडेंटिफिकेशन सिस्टम को बंद रखा गया।
भारतीय नौसेना का सुरक्षा कवच
जैसे ही यह टैंकर ओमान की खाड़ी में पहुंचा, वहां पहले से मौजूद भारतीय नौसेना के युद्धपोतों ने इसे अपनी सुरक्षा में ले लिया। वर्तमान में, भारत ने इस क्षेत्र में अपने ऊर्जा आपूर्ति मार्गों की सुरक्षा के लिए नौसैनिक संपत्तियां तैनात की हैं।
स्ट्रेट ऑफ होर्मुज दुनिया के कुल तेल शिपमेंट का लगभग पांचवां हिस्सा संभालता है। युद्ध के कारण इस रास्ते पर मिसाइल और ड्रोन हमलों का खतरा बढ़ गया है, जिससे बीमा लागत में भारी उछाल आया है। ऐसे में ईरान का भारतीय जहाजों को रास्ता देना भारत की मजबूत विदेश नीति का संकेत है।












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