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रेप करने वाले नाबालिगों को भी नहीं छोड़ते ये देश, तुरंत देते हैं मौत की सजा

नई दिल्ली। भारत में रेप के मामले लगातार बढ़ते जा रहे हैं। यहां पैदा हुई बच्ची तक का रेप हो जाता है। हाल ही में हैदाराबाद और उन्नाव में हुई घटनाओं से देश काफी गुस्से में है। सड़क से लेकर संसद तक इन घटनाओं का विरोध किया जा रहा है। महिलाएं अब अपनी सुरक्षा को लेकर पहले से अधिक डरी हुई हैं।

निर्भया के मामले को सात साल

निर्भया के मामले को सात साल

यूं तो भारत में बलात्कारियों के लिए मौत की सजा का प्रावधान है लेकिन ये अपराधी याचिका पर याचिका दाखिल कर काफी समय बर्बाद कर देते हैं। इसमें हम निर्भया वाले मामले को उदाहरण के तौर पर ले सकते हैं। 16 दिसंबर, 2012 को हुई इस घटना को अब 7 साल हो गए हैं, लेकिन अपराधियों को आज भी फांसी पर नहीं लटकाया गया है। बेशक इन्हें मौत की सजा मिली हुई है।

नाबालिग भी जिम्मेदार

नाबालिग भी जिम्मेदार

इस बीच नाबालिगों को सजा नहीं देने की बात भी हर किसी को चुभ रही है। क्योंकि रेप के बढ़ते मामलों में नाबालिगों का नाम भी सामने आ रहा है। जिन्हें रेप और हत्या जैसे जघन्य अपराध करने के बावजूद भी बाल सुधार गृह में रखने के बाद छोड़ दिया जाता है। जैसा निर्भया के मामले में हुआ था। इस घटना में एक नाबालिग भी शामिल था, जो आज खुली हवा में सांस ले रहा है।

नाबालिगों को भी नहीं बख्शते ये देश

नाबालिगों को भी नहीं बख्शते ये देश

ऐसे में अब ये मांग बढ़ गई है कि नाबालिग बलात्कारियों को भी कड़ी से कड़ी सजा सुनाई जाए। इस बीच हम कुछ ऐसे देशों की बात करते हैं जहां रेप करने वाले अपराधी को फांसी पर लटका दिया जाता है। हैरानी की बात तो ये है कि बलात्कारी अगर नाबालिग है तो भी उसे फांसी पर लटका दिया जाता है।

इन देशों में सबसे प्रमुख नाम हैं, चीन और ईरान। सबसे ज्यादा ईरान में ऐसा होता है। इसके बाद नाबालिगों को फांसी देने के मामले में चीन का नंबर आता है। सबसे दिलचस्प बात ये है कि नाबालिगों को फांसी गुप्त तरीके से दी जाती है, ताकि कोई अन्य देश या संगठन इनपर उंगली ना उठा सके।

बीते साल 253 को फांसी

बीते साल 253 को फांसी

मानवाधिकार संगठन एमनेस्टी की रिपोर्ट के अनुसार बीते साल ऐसे ही अपराध करने वाले 18 साल से कम उम्र के 253 लोगों को फांसी पर लटकाया गया था। वहीं 90 नाबालिग अभी भी ऐसे हैं, जिन्हें मौत की सजा सुना दी गई है। एमनेस्टी का कहना है कि इन्हें फांसी देने से पहले इनके परिवारों को भी सूचित नहीं किया जाता।

अप्रैल माह में दी फांसी

अप्रैल माह में दी फांसी

इसका ताजा उदाहरण हम ईरान का ले सकते हैं। जहां इसी साल अप्रैल माह में दो नाबालिगों को गुप्त तरीके से फांसी पर लटकाया गया था। इस बात को दुनिया के सामने सबसे पहले मानव अधिकारों की रक्षा करने वाले समूह एमनेस्टी इंटरनेशनल लेकर आया था।

मानवाधिकार संगठन ने क्या कहा?

मानवाधिकार संगठन ने क्या कहा?

इस संगठन ने कहा था कि ईरान ने गुप्त रूप से दो नाबालिग लड़कों को दुष्कर्म के कई आरोपों के चलते मौत की सजा दी है। एमनेस्टी ने इस बात के लिए ईरान की निंदा की थी और कहा था कि उसने अंतरराष्ट्रीय कानून और बच्चों के अधिकारों की अवहेलना की है।

15 साल की उम्र में गिरफ्तार

15 साल की उम्र में गिरफ्तार

ब्रिटेन स्थित इस अधिकार समूह ने कहा था कि मृतक लड़कों को 15 साल की उम्र में गिरफ्तार किया गया था। दोनों के नाम मेहदी सोहरबिफर और अमीन सेगाघाट थे। संगठन ने बताया कि इन दोनों को अनुचित ट्रायल के दौरान मौत की सजा सुनाई गई और फिर फांसी पर लटका दिया गया।

कोड़े भी मारे गए

कोड़े भी मारे गए

इस बात की जानकारी देते हुए एमनेस्टी ने ये भी कहा था कि इन लड़कों को मारने से पहले कोड़े मारे गए थे। एमनेस्टी के मध्यपूर्व और उत्तरी अफरीका के निदेशक फिलिप लूथर ने कहा था, 'ईरानी अधिकारियों ने एक बार फिर साबित किया है कि वे बच्चों को मौत के घाट उतारने के लिए तैयार हैं, अंतरराष्ट्रीय कानून की अवहेलना करते हैं।' उन्होंने कहा था, 'लड़कों को मौत की सजा को लेकर दो साल तक अंधेरे में रखा गया, जीवन के अंतिम क्षणों में इन्हें प्रताड़ित किया गया और फिर गुप्त रूप से फांसी पर चढ़ा दिया।'

चीन दूसरे नंबर पर है

चीन दूसरे नंबर पर है

नाबालिगों को फांसी देने के मामले में ईरान के बाद दूसरा स्थान चीन का है। माना जाता है कि इन देशों में हर साल हजारों नाबालिगों को मौत की सजा दी जाती है। एमनेस्टी का दावा है कि साल 1990 से 2018 के बीच ऐसे 97 नाबालिग कैदी थे जिन्हें मौत की सजा दी गई है।

क्या है हैदराबाद मामला?

क्या है हैदराबाद मामला?

इस घटना के चारों ही आरोपी 10 दिन की पुलिस रिमांड पर थे। मामले की सुनवाई के लिए 4 दिसंबर को फास्ट ट्रैक कोर्ट का भी गठन किया गया था। पुलिस ने इन सभी चार आरोपियों को महिला डॉक्टर के साथ गैंगरेप के बाद उसकी हत्या के आरोप में गिरफ्तार किया था। दरअसल 27 नवंबर को जब महिला डॉक्टर हाइवे एनएच 44 पर रात को अस्पताल से लौट रही थी तो उसकी गाड़ी पंक्चर हो गई थी, इसी दौरान इन आरोपियों ने महिला डॉक्टर के साथ गैंगरेप किया और उसे जिंदा जला दिया था।

उन्नाव मामला क्या है?

उन्नाव मामला क्या है?

उत्तर प्रदेश के उन्नाव में जिस गैंगरेप पीड़िता को आरोपियों ने जिंदा जला दिया था, उसकी बीती रात मौत हो गई है। पीड़िता को पहले जिला अस्पताल से लखनऊ ट्रामा सेंटर रेफर किया गया था, बाद में हालत बिगड़ती देख उसे गुरुवार की रात दिल्ली के सफदरजंग अस्पताल लाया गया था। 90 फीसदी तक जली पीड़िता की शुक्रवार रात कार्डिक अरेस्ट से मौत हो गई है।

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