International Day for Biological Diversity: कोरोना महामारी के बीच क्यों बढ़ गया है जैव विविधता का महत्व
International Day for Biological Diversity: कोरोना महामारी के बीच क्यों बढ़ गया है जैव विविधता का महत्व
नई दिल्ली, 22 मई: हर साल 22 मई को अंतरराष्ट्रीय जैव-विविधता दिवस मनाया जाता है। ऐसे में आज जैव-विविधता दिवस मनाया जा रहा है। इस साल इसके लिए थीम रखी गई है- वी आर पार्ट ऑफ सोल्यूशन। इस साल जैव-विविधता के बारे में बात करना और भी अहम हो जाता है। इस समय पूरी दुनिया और खासतौर से भारत, बुरी तरह से कोरोना की चपेट में है। कई विशेषज्ञों का ये मानना रहा है कि जिस तरह से इंसान ने प्रकृति को नुकसान किया है, उससे मौसम में तो कई तरह के बदलाव दिख ही रहे हैं। कई तरह की बीमारियां भी इससे आ रही हैं। कई जानलेवा वायरस भी पनप रहे हैं। कोरोना का भले इससे कोई सीधा संबंध ना हो लेकिन जिस तरह से पूरी मानवता पर कोरोना की वजह से एक संकट उसको देखते हुए हमें जैव-विविधता को लेकर ज्यादा गंभीरता से सोचना होगा।
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आज के समय में जंगलों की अंधाधुध कटाई और ग्लोबल वार्मिंग के चलते पर्यावरण में बदलाव हुए है, जिसके कई नुकसान हमको दिख रहे हैं। इसलिए पर्यावरण संरक्षण पर ज्यादा बल दिया जा रहा है। कई रिपोर्ट हैं जो कहती हैं कि पर्यावरण में जि तरह के बदलाव आए हैं, उससे पौधों और जानवरों की करीब 25 फीसदी प्रजातियां बीते कुछ दशकों में विलुप्त होने की कगार पर हैं। वहीं कई बीमारियां भी इंसान को घेर रही हैं, जिनके मूल में प्रकृति में आए बदलाव हैं।
पर्यावरण संतुलन बनाए रखने के लिए जैव विविधता बनाए रखना जरूरी
इंसान को ना सिर्फ प्रकृति और पर्यावरण का संतुलन बनाए रखने के लिए बल्कि खुद को बचाने के लिए भी जैव विविधता का संरक्षणबहुत जरूरी है। लोगों को जैव विविधता के बारे में जागरुक करने के लिए ही हर साल 22 मई को विश्व जैव विविधता संरक्षण दिवस मनाया जाता है। नैरौबी में 29 दिसंबर 1992 को जैव विविधता सम्मेलन आयोजित हुआ था। जिसमें अंतरराष्ट्रीय जैव विविधता दिवस मानने का फैसला लिया गया। जिसके बाद 22 मई को ये दिवस मनाया जाने लगा।












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