परिणाम आने से पहले ही भाजपा में सीएम पद के लिये उठापटक
पटना (मुकुंद सिंह)। बिहार विधानसभा चुनाव खत्म हो गया है। अभी तक चुनाव का परिणाम नही आये हैं, लेकिन भाजपा खेमे मे मुख्यमंत्री पद को लेकर उठापटक शुरू हो गई है। बीजेपी खेमे मे मुख्यमंत्री के लिए जिन नामों पर चर्चा की जा रही है, उनमें सुशील कुमार मोदी, प्रेम कुमार, राजेन्द्र सिंह और रामेश्वर चौरसिया प्रमुख हैं।
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आपको बताते चलें कि राजेन्द्र सिंह रोहतास के दिनारा से चुनाव लड़ रहे हैं। पार्टी गलियारों में उन्हें बिहार का मनोहर लाल खट्टर बताया जा रहा है। राजेंद्र सिंह भी मनोहर लाल खट्टर की तरह ही संघ के पूर्णकालिक प्रचारक हैं और झांरखंड के संगठन मंत्री हैं।
राजेंद्र सिंह को हराने की रणनीति
वहीं बीजेपी के सूत्रों का दावा है कि एक सीनियर नेता ने राजेन्द्र सिंह को हराने के लिये खास रणनीति बनाई थी। स्थानीय जनप्रतिनिधियों को बाकायादा ये समझाया गया कि अगर राजेन्द्र जीत जाते हैं, तो मुख्यमंत्री पद तक पहुंचना उनके लिए मुश्किल होगा। दिनारा के वैश्य समाज से आने वाले जिला पार्षद राजू प्रधान को इसकी जवाबदेही दी गई थी। हालांकि स्वतंत्र रूप से इसकी पुष्टि नहीं की जा सकी।
राजेन्द्र सिंह के कुशल नेतृत्व के चलते झारखंड में भाजपा ने विधानसभा चुनाव और लोकसभा चुनाव में बढ़िया परफार्म किया था। राजेन्द्र सिंह झारखंड में संगठन महामंत्री थे, लिहाजा उन्हें जितवाने के लिए पूरा झारखंड मंत्रिमंडल लगा था, खुद मुख्यमंत्री तीन बार दिनारा आये और सभाएं कीं।
प्रेम कुमार
दूसरे प्रमुख उम्मीदवार प्रेम कुमार हैं। वो 1990 से आजतक कोई भी चुनाव नहीं हारे हैं। अत्यन्त पिछड़ा वर्ग से आने वाले प्रेम कुमार को भी हराने के लिये षडयंत्र किया गया। उनके समर्थन में उस बड़े नेता ने गया में एक भी चुनावी सभा नहीं किया। वैश्य समाज से आने वाले उम्मीदवार राजू वर्णवाल को भी पिछले दरवाजे से मैदान में उतारा गया।
नंद किशोर यादव
तीसरे प्रमुख उम्मीदवार नंद किशोर यादव हैं। नंदकिशोर यादव पटना पश्चिम सीट से चुनाव लड़ रहे थे। सिटी इलाके में वैश्य वोटरों की संख्या ज्यादा है और चुनाव के दिन मारूफगंज इलाके में वैश्व वोटरों में भारी उदासीनता देखी गयी। उस इलाके में भाजपा के उस बडे नेता ने सिर्फ नामांकन में हिस्सा लिया, उसके बाद एक बार भी नहीं गए।
नोखा विधानसभा से बीजेपी प्रत्याशी रामेश्वर चौरसिया का नाम भी मुख्यमंत्री के दावेदारों में चल रहा है। चौरसिया भी उस भाजपा नेता के निशाने पर थे। रामेश्वर चुनाव न जीतें इसके लिये चक्रव्यूह की रचना की गयी। भाजपा और रालोसपा के शीर्ष नेता ने मिलकर रोडमेप बनाया। योजना के तहत कुशवाहा वोट में सेंधमारी करने के लिये रालोसपा के महिला मोर्चा के प्रदेश अध्यक्ष यशोदा कुशकहा को निर्दलीय उम्मीदवार के तौर पर मैदान में उतारा गया।
दूसरी तरफ सुशील कुमार मोदी ने विधानसभा चुनाव नहीं लड़ा है और वो विधानपरिषद के सदस्य हैं। ऐसे में बीजेपी बिहार का चुनाव जीतती है तो ये देखना खासा अहम हो जाएगा कि पार्टी आलाकमान किसके सिर पर अपना हाथ रखती है। हालांकि ये और बात है कि सुशील मोदी खुद को सीएम के रेस में सबसे आगे देख रहे हैं।













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