14,000 किमी की दूरी तय कर लेने वाले विक्रमादित्य से चीन को भी होती है घबराहट
बैंगलोर। देश की सबसे बड़ी वॉरशिप आईएनएस विक्रमादित्य को बुधवार को कर्नाटक के कारवार में ऑपरेशनली डेप्लॉयड कर दिया गया।
नए नेवी प्रमुख रॉबिन धवन ने इस बात की जानकारी दी। विक्रमादित्य को मिग-29के कॉम्बेट एयरक्राफ्ट के साथ डेप्लॉय किया गया है। इस वॉरशिप का इंतजार पिछले कई वर्षों से हो रहा था।
आईएनएस विक्रमादित्य को आईएनएस गोर्शकोव के नाम से भी जाना जाता है। भारत से पहले रूस ने सन 1987 में इसे बाकू के नाम से कमीशंड किया था। 2.35 बिलियन डॉलर की डील के साथ भारत ने इसे रूस से खरीदा है।
आईएनएस विक्रमादित्य को भारत ने 20 जनवरी 2004 में खरीदा था। इस शिप ने जुलाई 2013 में अपने सभी ट्रायल्स को सफलतापूर्व पूरा कर लिया था। 16 नवंबर 2013 को सेवेरोडविंस्क, रूस में हुए एक समारोह में यह औपचारिक तौर पर इंडियन नेवी का हिस्सा बन गई।
नेवी सूत्रों के मुताबिक आईएनएस विक्रमादित्य हाल ही में वेस्टर्न नेवी की ओर से आयोजित एक वॉर गेम में सफलता पूर्वक हिस्सा ले चुका है। फिलहाल इस एयरक्राफ्ट कैरियर में भी एयर डिफेंस गन नहीं हैं लेकिन उम्मीद की जा रही है जल्द ही इसकी सुरक्षा के लिए इसे हथियारों से लैस कर दिया जाएगा।
आईएनएन विक्रमादित्य ने पड़ोसी मुल्क चीन की मुश्किलों को बढ़ा दिया है। भारत के पास इस समय दो एयरक्राफ्ट कैरियर्स हैं आईएनएस विक्रमादित्य और आईएनएस विराट। इसके साथ ही आईएनएस विक्रांत के भी वर्ष 2018 तक कमीशंड होने की उम्मीदें हैं।
इन दो एयरक्राफ्ट कैरियर्स के साथ ही भारत एशिया का अकेला ऐसा देश बन गया है जिसके पास दो एयरक्राफ्ट कैरियर्स हैं।
पिछले कुछ समय के दौरान आईएनएस सिंधुरत्न और आईएनएस सिंधुरक्षक के हादसों के बाद कमजोर हो चुकी इंडियन नेवी के लिए आईएनएस विक्रमादित्य का संचालित होना एक बड़ा कदम है।
आगे की स्लाइड्स में देखिए आईएनएस विक्रमादित्य की कुछ ऐसी खूबियां जो इसे एक बेहतरीन एयरक्राफ्ट कैरियर में तब्दील करती हैं।

बस सकता है एक छोटा शहर
आइएनएस विक्रमादित्य को करीब से देखने और जानने वाले विशेषज्ञ मानते हैं कि आइएनएस विक्रमादित्य किसी मिनी सिटी से कम नहीं है। इस पर सारी सुविधाएं मौजूद हैं और यह किसी भी दूसरी वॉरशिप को आसानी से टक्कर दे सकता है।

एक बार में 14,000 किमी
आइएनएस विक्रमादित्य करीब 8,000 टन ईधन के साथ संचालित होता है और यह एक बार में 14,000 किमी तक जा सकता है।

चार एयरबस ए380 को किया जा सकता है पार्क
आइएनएस विक्रमादित्य की लंबाई 284 मीटर है और इतनी लंबाई के बाद इस पर चार एयरबस ए-380 को आसानी से पार्क किया जा सकता है। अगर क्रिकेट क्रिकेट की पिच की इससे तुलना की जाए तो करीब 12 क्रिकेट पिच इस पर बनाई जा सकती हैं।

स्टैच्यू ऑफ लिबर्टी की ऊंचाई का 2/3
आईएनएस विक्रमादित्य की ऊंचाई 60 मीटर है और ऐसे में यह दुनिया के मशहूर स्टैच्यू ऑफ लिबर्टी की कुल ऊंचाई की करीब दो तिहाई ऊंचाई जितना लंबा है।

30 नॉटस की रफ्तार का बादशाह
आईएनएस विक्रमादित्य करीब 30 नॉट्स की रफ्तार तक समंदर में सेल कर सकता है। आपको बता दें कि कोई भी वॉरशिप सिर्फ इमरजेंसी की हालत में ही इस स्पीड पर सेल करते हैं।

एडमिरल गोर्शकोव का नया अवतार
आइएनएस विक्रमादित्य के साथ ही रूस के पुराने जहाज एडमिरल गोर्शकोव को एक नई पहचान मिल गई है। आइएनएस विक्रमादित्य का वजन 44,500 टन है।

500 किमी के दायरे में मौजूद खतरे को भांपने की ताकत
आइएनएस विक्रमादित्य में इंस्टॉल किया गया एयर सर्विलांस रडार सिस्टम इस वॉरशिप के आसपास एक सुरक्षा घेरा तैयार कर देता है। इस सर्विलांस रडार सिस्टम के बाद आइएनएस विक्रमादित्य 500 किमी के दायरे में मौजूद किसी भी खतरे को भांप सकता है।

मिग29के पर नहीं कोई खतरा
आईएनएस विक्रमादित्य पर इंडियन नेवी का कॉम्बेट जेट मिग29के आसानी से लैंड कर सकता है। इसके अलावा यह शिप नेटवर्क सेंट्रिक वॉरफेयर के लिए जरूरी सभी मॉर्डर्न कम्यूनिकेशन सिस्टम से भी लैस है।

एयर डिटेक्शन रडार से लैस आइएनएस विक्रमादित्य
आइएनएस विक्रमादित्य पर एयर डिटेक्शन रडार, एयरक्राफ्ट डायरेक्शन रूम, एयर ट्रैफिक और एयर नेविगेशन के लिए इंजीनियरिंग सिस्टम के साथ ही मॉर्डर्न सेंसर्स और सर्विलांस सिस्टम इंस्टॉल किया गया है। साथ ही आइएनएस विक्रमादित्य अकेली ऐसी वॉरशिप है जो माइक्रोवेव लैंडिग सिस्टम से लैस है।












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