दुश्मनों के लिए नई आफत INS Arighat, नौसेना को मिलेगी दूसरी पनडुब्बी, जानिए खास बातें
भारतीय नौसेना को आज दूसरी परमाणु ऊर्जा से चलने वाली बैलिस्टिक मिसाइल पनडुब्बी आईएनएस अरिघाट मिलने जा रहा है। रक्षा मंत्री राजनाथ सिंह आज इसे नौसेना के बेड़े में शामिल करेंगे। इस कार्यक्रम में नौसेना के प्रमुख दिनेश त्रिपाठी, भारतीय सामरिक कमान के प्रमुख वाइस एडमिरल सूरज बेरी सहित कई नौसेना के अधिकारी मौजूद रहेंगे।
परमाणु ऊर्जा से चलने वाली पनडुब्बी आईएनएस अरिघाट भारतीय नौसेना में शामिल होने के लिए तैयार है। यह उन्नत पोत 750 किलोमीटर से अधिक की रेंज वाली K-15 मिसाइलों को लॉन्च करने की क्षमता रखता है। इस पनडुब्बी के नौसेना में शामिल होने से भारत की समुद्री ताकत में उल्लेखनीय वृद्धि।

कई महीनों तक पानी के अंदर रह सकता
आईएनएस अरिघात को चुपके से काम करने के लिए डिज़ाइन किया गया है, जो अपने परमाणु ऊर्जा स्रोत के कारण महीनों तक पानी के अंदर रहने में सक्षम है। पारंपरिक डीजल-इलेक्ट्रिक पनडुब्बियों के विपरीत जिन्हें अक्सर सतह पर आना पड़ता है, अरिघात लंबे समय तक पानी के अंदर रह सकता है, जिससे इसका पता लगाना मुश्किल हो जाता है।
कहीं अधिक ताकतवर
अरिघात भारत में अपनी तरह की दूसरी पनडुब्बी है, जो INS अरिहंत के बाद आई है। दोनों ही जहाज भारत के 'परमाणु त्रय' का हिस्सा हैं, जो देश को जमीन, हवा और समुद्र से परमाणु हथियार लॉन्च करने की ताकत देता है। सेना के सूत्रों से पता चलता है कि अरिघात आकार में अरिहंत के समान है, लेकिन यह ज़्यादा K-15 मिसाइलें ले जा सकता है और इसकी क्षमताएं कहीं अधिकह हैं।
750 किलोमीटर तक कर सकता है हमला
INS अरिघाट पर K-15 मिसाइल सिस्टम है जो इसे 750 किलोमीटर दूर तक के लक्ष्यों पर हमला करने में सक्षम बनाता है। यह इसे दूर से दुश्मन के ठिकानों का पता लगाने और उन पर हमला करने में अत्यधिक प्रभावी बनाता है, जिससे भारत को रणनीतिक बढ़त मिलेगी।
INS अरिहंत और INS अरिघाट दोनों ही 83 मेगावाट के प्रेशराइज्ड लाइट वाटर रिएक्टर से संचालित होते हैं। यह तकनीक उन्हें ऑक्सीजन या बैटरी रिचार्जिंग के लिए सतह पर आए बिना लंबे समय तक पानी में रहने की अनुमति देती है।
जल्द ही मिलेगी तीसरी पनडुब्बी
भारत इस श्रृंखला में दो और पनडुब्बियों को शामिल करने की योजना बना रहा है। तीसरी पनडुब्बी, जिसका नाम INS अरिदमन है, माना जा रहा है कि अगले साल यह नौसेना के बेडे़ में शामिल हो सकता है। ये पनडुब्बियां हिंद महासागर में बढ़ती चीनी गतिविधियों के बीच भारत की नौसैनिक शक्ति को मजबूत देने का काम करेंगे।
90 हजार करोड़ का बजट
सरकार ने इन उन्नत पनडुब्बियों के निर्माण के लिए 90,000 करोड़ रुपये आवंटित किए हैं। यह निवेश भारत की अपनी समुद्री रक्षा क्षमताओं को बढ़ाने की प्रतिबद्धता को दर्शाता है।












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