ठीक नहीं फिटनेस का ये खुमार! शाकाहारी डाइट के चक्कर में गंवाई जान, क्या कहते हैं एक्सपर्ट?
बीते दिनों अमेरिकन इंफ्लुएंसर्स की मौत एक खास तरह की डाइट फॉलो करने के बाद हुई थी। महिला एक वीगन डाइट को फॉलो कर रही थी। रूस की रहने वाली ज्हाना सैम्सोनोवा पिछले पांच सालों से कच्चा खाना खा रही थीं।
इतना ही नहीं, वे अपने फैंस को इसके फायदों के बारे में भी बताती रहती थीं। इन्फ्लुएंसर की मौत के बाद अब कच्ची सब्जियों को लेकर लोगों में डर सा बन गया है। ऐसे में चलिये बात करते हैं वीगन डाइट और कच्ची सब्जियों के सेवन के बारे में...
वेस्टर्न डाइट को लेकर लोगों में पागलपन
वीगन डाइट फॉलो करने का लोगों के बीच वैसे तो बहुत क्रेज देखने को मिल रहा है। स्लिम ट्रिम दिखने के लिए इंसान कितना कुछ करता है। कई बार बिना पूरी जानकारी के लोग खास डाइट को फॉलो करने लग जाते हैं। वे ये नहीं समझते कि उनके लिए क्या सही है और क्या गलत। अब इस तरह के मामले सामने आने के बाद भी लोग बिना किसी जानकारी के खौफ में आ जाते हैं। इसलिए ये समझना बेहद जरूरी है कि एक ही तरह की डाइट को फॉलो करने की वजह से शरीर को कितने नुकसान हो सकते हैं। यहां हम इस बात को आयुर्वेद की नजर से समझने की कोशिश करते हैं।

जानिये क्या कहते हैं एक्सपर्ट
आयुर्वेद के जाने-माने डॉक्टर प्रदीप बताते हैं कि आयुर्वेद के अनुसार मानव शरीर के लिए षड (6) रस जरूरी होतें हैं। ये छह रस आपने भोजन में जरूर शामिल होने चाहिए। ये रस हैं- मीठा, नमकीन, खट्टा, तीखा, कड़वा और कसैला। वात प्रकृति के जो लोग होते हैं इन्हें मीठा, खट्टा और नमकीन खाने की सलाह दी जाती है। वहीं कफ प्रकृति के लोगों को कड़वा, तीखा और कसैला तो इसके विपरीत पित्त प्रकृति के लोगों को हमेशा मीठा, तीखा और कसैला भोजन करने की सलाह दी जाती है।
वेस्टर्न कल्चर को कॉपी करने का नतीजा
अब इन्फुएंसर के मामले के बारे में बात करते हुए डॉक्टर प्रदीप ने बताया कि आजकल लोगों में फिटनेस के मामले में वेस्टर्न कल्चर को फॉलो करने का ट्रेंड कुछ ज्यादा ही बढ़ गया है। लेकिन लोग ये भूल जाते हैं कि विदेश और भारत के लोगों के शरीर में बेहद फर्क है। इसके साथ ही 24 घंटे फिटनेस का जो ट्रेंड चला है, वो भी शरीर के लिए बहुत खराब है।

24 घंटे फिटनेस ट्रेंड है बुरा
डॉक्टर बताते हैं कि विदेश और यहां के मौसम में जमीन आसमान का फर्क है। भारत में वेदर वेरियेशन देखने को मिलता है, जबकि विदेशों में एक ही तरह का मौसम रहता है। ऐसे में हमारे देश में आयुर्वेद लोगों को मौसम के हिसाब से खाना खाने की सलाह देता है। जैसे अकसर मानसून सीजन में लोगों को दही खाने से बचने की सलाह दी जाती है। इसी तरह विदेशों की बात करें तो वहां एक ही मौसम रहने के चलते लोग पिज्जा, बर्गर या कोई भी जंक फूड आसानी से पचा लेते हैं।

खाने में पांच रसों का रखें ध्यान
उन्होंने आगे बताया कि मान लीजिये आपको भूख लगी है और 500 ग्राम खाना खाना है। आप एक साथ एक ही तरह के भोजन को न करके अपने खाने में वैरायटी ऐड कर सकते हैं। जैसे कि 250 ग्राम सॉलिड फूड ले सकते हैं और 125 ग्राम लिक्विड अपनी डाइट में जोड़ सकते हैं। बाकी आप खाली पेट रह सकते हैं। इससे शरीर को जरूरी ऊर्जा भी मिलेगी और ओवरईटींग की आदत से भी निजाद मिलेगी। इस तरह शरीर में आयुर्वेद के बताए पांच रसों का तालमेल रहेगा और आप कभी बीमार नहीं पड़ेंगे।
प्रयास करें कच्चा पक्का एक साथ ना खाए, सलाद खाना हो तो केवल सलाद ले। उसके कुछ समय बाद ही कुछ ले।












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