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अबकी बार महिलाओं पर मार, सबसे ज्यादा हुईं बेरोजगार- रिपोर्ट

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नई दिल्ली- एक निजी संस्था सेंटर फॉर मॉनिटरिंग इंडियन इकोनॉमी (CMIE) ने पिछले साल देश में 1 करोड़ रोजगार खत्म होने की बात कही है, जिसमें 90 लाख महिलाएं बताई जा रही हैं। ऐसे समय में जब नरेंद्र मोदी अपने काम के आधार पर सत्ता में वापसी के लिए हाथ-पैर मार रहे हैं, यह डाटा उनके लिए शुभ नहीं माने जा सकते।

महिलाओं का रोजगार जाना है बड़ा मुद्दा

महिलाओं का रोजगार जाना है बड़ा मुद्दा

लाइवमिंट ने महाराष्ट्र की कुछ महिलाओं से बातचीत के आधार पर दावा किया है कि खेती में मशीनों का इस्तेमाल बढ़ने से उनका रोजगार छिन चुका है। अखबार को एक महिला ने कहा है कि," मोदी सरकार ने इस क्षेत्र में रोजगार पैदा करने के लिए कुछ नहीं किया। हम उस पार्टी को वोट देना चाहेंगे जो फैक्ट्रियां लगाए और रोजगार पैदा करे।" अखबार ने दावा किया है कि इसी के चलते मोदी सरकार ने विवादित रोजगार डाटा को रिलीज करने में देरी की। इसी अखबार ने दूसरे न्यूज पेपर के हवाले से बताया है कि 2017-18 में देश में महिला श्रमिकों की सहभागिता सिर्फ 23.3 प्रतिशत दर्ज की गई थी, जो 2011-12 से 8 फीसदी कम है। जबकि, सेंटर फॉर मॉनिटरिंग इंडियन इकोनॉमी (CMIE)के मुताबिक तो मई से अगस्त 2018 के बीच यह केवल 10.7% ही दर्ज किया गया था।

रोजगार जाने का सबसे बड़ा कारण

रोजगार जाने का सबसे बड़ा कारण

कुछ अर्थशास्त्रियों का दावा है कि आर्थिक मोर्चे पर मोदी सरकार के दो बड़े फैसलों ने महिला श्रमिकों को सबसे ज्यादा नुकसान पहुंचाया है। ये हैं नोटबंदी और जीएसटी। क्योंकि, असंगठित और असुरक्षित क्षेत्रों में ही ज्यादा महिलाएं कार्यरत थीं और इन दोनों फैसलों के बाद रोजगार के अवसर घटने का सबसे ज्यादा नुकसान महिलाओं को ही उठाना पड़ा। इसके लिए फिर से एकबार मुंबई स्थित एशिया के सबसे बड़े स्लम एरिया धारावी की एक महिला फरजाना बेगम से बात की गई, जिसने बताया कि जीएसटी के कारण बटन लगाने का उसका रोजगार चला गया। इसी तरह कोलकाता के पास एक गांव की महिला ने बताया कि पहले तो नोटबंदी के कारण उसकी साड़ियों में कारीगरी के काम की आमदनी हर हफ्ते 700 रुपये से घटकर 300 रुपये पर आ गई थी, बाद में जीएसटी से वह भी बंद हो गया। नुरेन निसा नाम की उस महिला ने बताया कि वह उस नेता को वोट देगी, जो उसकी आमदनी बढ़ाने और रोजगार दिलाने में मदद करेंगे।

संगठित क्षेत्र में महिलाओं को रोजगार में दिक्कत

संगठित क्षेत्र में महिलाओं को रोजगार में दिक्कत

अखबार ने कुछ कारोबारियों से बातचीत के आधार पर बताया कि संगठित क्षेत्रों में कई बार महिलाएं इसलिए नौकरी नहीं करना चाहतीं, क्योंकि वे घरों से दूर काम करना पसंद नहीं करतीं। इसी तरह कुछ कारोबारी महिलाओं को रोजगार इसलिए नहीं देना चाहते कि उन्हें उनके लिए अलग से शौचालय बनाने पड़ेंगे और रात के समय ट्रांसपोर्ट का इंतजाम करना पड़ेगा। कई बार महिलाएं अपनी सुरक्षा के मद्देजर भी घर से बाहर जाकर काम नहीं करना चाहतीं। इस सबका असर सामाजिक ताने-बाने पर भी पड़ रहा है, जहां स्वरोजगार में लगी महिलाओं को लाचार होकर घर पर खाली बैठना पड़ रहा है।

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English summary
Indian women on sharp end of jobs crisis
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