India oldest trains: पटरियों पर आज भी सरपट दौड़ रही हैं आजादी के पहले की ये देश की सबसे पुरानी ट्रेनें
Indian Railways: इंडियन रेलवे में एक ऐसी अभी भी कई ट्रेन है जिसे बिट्रिश काल में शुरू किया गया था, ये ट्रेनें आज भी रेल की पटरियों पर फर्राटे से दौड़ रही हैं।

India's oldest train: भारतीय रेलवे के लिए बीता शुक्रवार ब्लैक फ्राइडे साबित हुआ। ओडिशा के बालासोर में हुए ट्रिपल ट्रेन हादसे में 288 यात्री मौत के आगोश मे समा गए और लगभग 900 यात्री घायल हो गए और इनमें से कई जिंदगी और मौत की जंग लड़ रहे हैं। इस हादसे ने भारतीय रेलवे के स्वर्णिम इतिहास को तार-तार कर धब्बा लगा दिया। भारतीय रेलवे जिसके रेल नेटवर्क की गिनती दुनिया में चौथे नंबर पर और एशिया में नंबर वन पर होती है, उसी देश में इतना बड़ा ट्रेन हादसा हमारे रेलवे विभाग के सालों के डेवलेपमेंट पर पानी फेर दिया है।

1 दिन पहले ही मनाया था 111 साल पुरानी ट्रेन ने अपना बर्थडे
ये वो इंडियन रेलवे हैं जिसने अपनी देश की आजादी से पहले की पुरानी ट्रेन को आज भी मेनटेन रखा है। देश की आजादी से भी पहले शुरू की गई ट्रेनें आज भी रेल की पटरियों पर सरपट दौड़ रही है। जी हां हम बात कर रहे हैं, भारत की सबसे बूढ़ी ट्रेनों की , जिसने से एक ट्रेन ने तो इस ट्रेन हादसे के ठीक एक दिन पहले अपनी सेवा के 111 साल पूरे किए हैं। आइए जानते हैं कौन सी हैं ये ट्रेने?
ये हैं भारत की सबसे पुरानी ट्रेनें, जो आज भी सरपट दौड़ रही हैं
- कालका मेल 1 जनवरी 1866 में शुरू हुई थी ये देश की सबसे पुरानी ट्रेन है। 2022 में इसने 156 साल पूरे किए है।
- बॉम्बे-पुणे मेल 1869 जो मुंबई और पुणे के बीच की पहली इंटरसिटी ट्रेन के तौर पर शुरू हुई थी।
- जीटी एक्सप्रेस या ग्रैंड ट्रंक एक्सप्रेस भी देश की सबसे बूढ़ी ट्रेनों में एक है। ग्रैंड ट्रंक एक्सप्रेस की शुरूआत 1 अप्रैल 1929 में हुई थी
- पंजाब मेल 1 जून 112 में जिसकी शुरूआत हुई थी और आज भी पटरियों पर दौड़ रही है और बलासोर हादसे के एक दिन पहले ही इसने अपना 111 वां जन्मदिन मनाया था।
111 साल पुरानी ट्रेन
भारतीय रेलवे की ये ट्रेनें 100 साल से भी अधिक समय बाद आ भी हजारों मुसाफिरों को उनके गंतव्य तक पहुंचा रही है। भारत की ये सबसे पुरानी ट्रेनों में पंजाब मेल शुमार है। पंजाब मेल जो कि फिरोजाबाद से मुंबई के बीच चलती है ये ट्रेन मुंबई से उत्तर भारत की ओर चलने वाली बेहतरीन ट्रेनों में से एक है। इस ट्रेन की शुरूआत बिट्रिश शासन में 1 जून 1912 में हुई थी। इस ट्रेन ने हादसे से एक दिन पहले अपना जन्मदिन बनाया है जो आइए जानते हैं इस ट्रेन के बारे में सबकुछ...
पंजाब मेल ट्रेन का रूट
अंग्रेजों के जमाने में जब ये ट्रेन शुरू हुई थी तब ये ट्रेन बल्लार्ड पियर रेलवे स्टेशन से पेशावर जो बंटवारे से पहले भारत वाले पाकिस्तान में था वहां तक जाती थी। वहीं अब ये मुंबई के छत्रपति शिवाजी टर्मिनल से पंजाब के फिरोजाबाद तक चलाई जा रही है।
अंग्रेजों ने इस वजह से शुरू की थी ये ट्रेन
भारत की इस सबसे बूढ़ी ट्रेन को अंग्रेजों ने अपने लिए शुरू किया था। अंग्रेज विदेश से समुद्री रास्ते से जहाज पर मुंबई आते थे और मुंबई से इसी ट्रेन से दिल्ली और पेशावर जाते थे।
केवल अंग्रेज ही करते थे सफर
इस ट्रेन की जब शुरूआत हुई तब ये वीआईपी ट्रेन मानी जाती थी, क्योंकि केवल अंग्रेज अफसर और उनकी फैमिली और बिट्रिश सरकार के प्रशासनिक अधिकारी इस पर यात्रा करती थे।
सालों बाद आम जनता को दी गई चढ़ने की परमीशन
1912 में जब ये शुरू हुई और 1930 में इसमें कोच बढ़ाए गए और इसमें थर्ड क्लास डिब्बे जोड़े गए और इस पर आम जन भी सवारी करने लगे।
पहले कोयले के इंजन से चलती थी, लकड़ी के थे डिब्बे
जब ये ट्रेन 111 साल पहले चलाई गई थी तो ये कोयले के इंजन से चलती थी। ट्रेन के डिब्बे लकड़ी के हुआ करते थे, लेकिन बाद में इस ट्रेन में आधुनिक इलेक्ट्रिक इंजन लगाए गए और ट्रेन के कोच भी समय-समय पर बदले गए। जब शुरू की गई तो ये 2496 किलोमीटर का सफर तय करती थी।
111 साल बाद भी रेलवे ट्रेक पर फर्राटे से दौड़ रही है ये ट्रेन
अंग्रेजों ने इस ट्रेन का नाम पंजाब लिमिटेड दिया था, कई सालों बाद इसका नाम बदलकर पंजाब मेल कर दिया गया। 1945 में पंजाब मेल में एसी कोच अटैच किए गए। देश की 111 साल पुरानी ये पंजाब मेल यात्रियों से भरे अपने 24 कोचों को लेकर 50 किलोमीटर प्रतिघंटा की रफ्तार से हर दिन 1930 किलोमीटर की यात्रा तय करने के लिए रेलवे ट्रेक पर इतराती हुई फार्राटे से दौड़ती है।












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