रेल बजट: रेल मंत्री सदानंद गौड़ा को भी नहीं भाई 'सिमरन'?

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नई दिल्‍ली। हेडलाइन पढ़कर चौंकिये नहीं। सिमरन किसी लड़की का नाम नहीं। असल में सिमरन रेलवे की वो योजना है, जो अगर आ जाये तो रेलवे करोड़ों का नुकसान होने से बच सकती है। हर वर्ष रेल बजट आता है और हर वर्ष सुरक्षा के वही रटे-रटाए दावे किए जाते हैं।

एक बार‍ फिर से रेल बजट आया और एक बार फिर से शायद सुरक्षा के वही दावे और वादे किए गए लेकिन इस बीच एक बार फिर से उन साॅफ्टवेयर के बारे में कोई बात नहीं की गई जिनकी वजह से रेल का सफर सुरक्षित और सुविधाजनक हो सकता है।

शायद ही लोगों को मालूम हो कि देश में ही एक नहीं बल्कि दो ऐसे सॉफ्टवेयर तैयार किए जा चुके हैं, जिन्‍हें इंस्‍टॉल करने के बाद घने से घने कोहरे में भी ट्रेनें सरपट दौड़ सकती हैं और समय पर पहुंच सकती हैं। ऐसे सॉफ्टवेयर जिनकी मदद से आप ट्रेनों के रनिंग स्‍टेटस पर रियल टाइम के मुताबिक नजर रख सकते हैं।

पांच करोड़ की वजह से रुक गया सिमरन

आईआईटी कानपुर और रिसर्च डिजाइन एंड स्‍टैंडर्ड ऑर्गनाइजेशन (आरडीएसओ) की ओर से सिमरन यानी सैटेलाइट इमेजिंग फॉर रेल नेविगेशन वाला एक सॉफ्टवेयर जिसे सिमरन के नाम से भी जाना जाता है, को कुछ समय पहले इंडियन रेलवे ने इंस्‍टॉल किया लेकिन इंस्‍टॉलेशन सिर्फ कुछ ही ट्रेनों तक सिमट रह गया। वर्ष 2005 में रेलवे मंत्रालय की ओर से कहा गया था कि इस सॉफ्टवेयर को देश की हर ट्रेन में लगाया जाएगा।

आईआईटी कानपुर की ओर से तैयार इस सॉफ्टवेयर की मदद से यात्रियों को ट्रेनों के बारे में सही जानकारी मिल सकती थी।

पिछले वर्ष फरवरी में आईआर्इटी कानपुर से जुड़े एक सूत्र की ओर से जानकारी दी गई कि उसे देश की सभी ट्रेनों में इस सॉफ्टवेयर को इंस्‍टॉल करने के लिए पांच करोड़ रुपए की जरूरत है। जब आईआईटी कानपुर को जब इससे जुड़ा एक एमओयू साइन करने के लिए बुलाया गया तो उसे जानकारी दी गई कि इस प्रोजेक्‍ट में अब उनके शामिल होने की कोई जरूरत नहीं है।

आईआईटी कानपुर 36 अहम ट्रेनों में सिमरन के जरिए रियल टाइम इंफॉर्मेशन देने पर काम कर रहा था लेकिन रेलवे के निर्णय के बाद उसे प्रोजेक्‍ट को बंद करना पड़ गया। रेलवे की ओर से जानकारी दी गई कि उनके पास पहले से ही एक ऐसा सॉफ्टवेयर मौजूद है जो कि बिल्‍कुल सिमरन की ही तरह है।

कोहरे में भी ट्रेनों पर नहीं पड़ेगा कोई असर

नागपुर के श्री रामदेओबाबा कॉलेज ऑफ इंजीनियरिंग एंड मैनेजमेंट की ओर से जीरो विजिबिलिटी नेविगेशन फॉर इंडियन रेलवे नाम से एक सिस्‍टम तैयार किया गया। आपको जानकर हैरानी होगी कि हर वर्ष ट्रेनों के कैंसिल होने की वजह से रेलवे को एक लाख करोड़ रुपए का नुकसान होता है। इसी बात को ध्‍यान में रखकर नागपुर के इस इंस्‍टीट्यूट ने यह प्रोजेक्‍ट शुरू किया था।

यह नेविगेशन सिस्‍टम लेसर सिग्निलिंग सिस्‍टम, एंबडेड सिस्‍टम, डिजिटल कम्‍यूनिकेशन सिस्‍टम जैसे विजुअल ग्राफिक्‍स और एनीमेशन सिस्‍टम पर आधारित है। इस सिस्‍टम को लागू करने के बाद ट्रेनें घने से घने कोहरे में भी फर्रार्ट से दौड़ सकती हैं। लेकिन आज तक न तो इस सिस्‍टम के बारे में किसी ने कोई सुध ली है और न ही इसे इंस्‍टॉल करने की बात का ख्‍याल भी कभी किसी के मन में आया है।

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