खुशखबरी : 20 राज्यों में 9,27,991 घरों के निर्माण को मंजूरी, गरीबों को मिलेगा आशियाना
रास्तों पर आज भी गरीबी के किस्से आम तौर पर दिख जाते हैं। मजबूरी, बेबसी नुमाईश बनकर सड़क के बीच डिवाइडर को अपना आशियाना बना लेती है। घर न होने की वजह से जमीन को बिस्तर बनाया जाता है और खुले आसमां को छत मानने वाले कई लोग बेफिक्र होकर सो जाते हैं।
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कभी बारिश आधी रात में जगा देती है तो ठंड मौत के करीब ले जाती है। दरअसल इसकी वजह है आर्थिक कमजोरी। लेकिन केंद्र सरकार ने गरीबों को एक बहुत बड़ा तोहफा दिया है। पेश है ये रिपोर्ट-
बस्तियों का होगा पुनर्विकास
प्रधानमंत्री शहरी आवास योजना के तहत केंद्र सरकार ने गरीबों के लिए इस साल अप्रैल से 16,600 करोड़ रुपए की लागत से 2.4 लाख घरों के निर्माण को मंजूरी दी है। मंगलवार को जारी एक सरकारी सूचना में बताया गया कि शहरी गृह अभियान के तीन वर्गों के तहत 3,634 करोड़ रुपए की केंद्रीय सहायता से गृह निर्माण को मंजूरी दी गई है। इसमें 1,24,642 घर 'साझेदारी में सस्ता घर' के तहत बनेंगे। एक लाख 15,989 घर 'लाभार्थी से जुड़े निर्माण' और 3,636 घर 'मलिन बस्तियों के पुनर्विकास' के तहत बनेंगे। जिससे लोगों को आशियाना मिल सकेगा। आवास और शहरी गरीबी उपशमन मंत्रालय ने 11 राज्यों के शहरी गरीबों के हित में इस साल अप्रैल माह से इन प्रस्तावों को स्वीकार किया है।
कहां बनेंगे, कितने घर?
- महाराष्ट्र में इस तरह के एक लाख घरों के निर्माण को मंजूरी मिली है।
- इसके बाद त्रिपुरा में 42,896 घरों का निर्माण होगा।
- ओड़ीशा में 23,843 घर बनाए जाएंगे।
- बिहार में 21,474 घर बनाए जाएंगे।
- गुजरात में 17,838 घर बनाने को मंजूरी मिली है।
सच होगा खुद के आशियाने का ख्वाब, मिलेंगे ''सस्ते घर''
सरकारी सूत्रों के मुताबिक इस वित्त वर्ष के पहले चार महीनों में योजना के तहत शहरी गरीबों के लिए सस्ते आवास उपलब्ध करवाने के लिए 2,44,267 घरों के निर्माण के लिए केंद्र सरकार ने अतिरिक्त 16,641 करोड़ रुपए के निवेश की मंजूरी दी है। इन स्वीकृतियों के साथ आर्थिक रूप से कमजोर तबकों के लिए 20 राज्यों में इस योजना के तहत कुल 51,568 करोड़ रुपए की लागत से 9,27,991 घरों के निर्माण को मंजूरी दी गई है।
यूपी में भी लोगों को उम्मीद
वन इंडिया ने लखनऊ में कुछ लोगों से इस संदर्भ में बातचीत की तो उन्होंने कहा कि केंद्र सरकार की ये पहल वाकई सराहनीय है। ठंड की दस्तक के साथ ही एनजीओ द्वारा रैन बसेरे बनाए जाते हैं लेकिन लोगों की बड़ी तादाद के सामने वे नाकाफी हैं। लगभग हर मौसम में आम तौर पर कई बेसहारा, गरीब लोगों को आप सड़क के किनारे सोता हुआ पाएंगे। कई बार इसी चक्कर में दुर्घटनाएं भी हो जाती हैं। उत्तर प्रदेश के लिए भी केंद्र सरकार को सोचना चाहिए।












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