कोवैक्सीन की WHO मान्यता के लिए भारत सरकार गंभीर, प्रक्रिया में लाई जा रही तेजी
नई दिल्ली, 23 मई: हाल ही में विश्व स्वास्थ्य संगठन (WHO) ने भारतीय कंपनी भारत बायोटेक को एक झटका दिया था, यहां उसने कोवैक्सीन को अंतरराष्ट्रीय स्तर पर मंजूरी नहीं दी। इसके चलते वैक्सीन की डोज लेने वाले लोग आसानी से विदेश की यात्रा नहीं कर सकते हैं। हालांकि इस मुद्दे को भारत सरकार ने गंभीरता से लिया है। साथ ही ये सुनिश्चित किया जा रहा है कि WHO और यूरोपीय यूनियन जल्द ही इसे मान्यता दें।

सूत्रों के मुताबिक विदेश मंत्रालय के शीर्ष राजनयिक स्वदेशी वैक्सीन के लिए डब्ल्यूएचओ और यूरोपीय संघ से मान्यता सुनिश्चित करने के लिए मामले पर अध्ययन कर रहे हैं। साथ ही विदेश सचिव हर्षवर्धन श्रृंगला सोमवार को भारत बायोटेक के अधिकारियों से मिलेंगे। इस दौरान डब्ल्यूएचओ की मंजूरी प्रक्रिया में तेजी लाने पर चर्चा की जाएगी। मौजूदा वक्त में देश में दो करोड़ से ज्यादा लोगों को ये वैक्सीन लग चुकी है।
मामले में एक अधिकारी ने कहा कि अमेरिका, ब्रिटेन जैसे देशों में अनलॉक की प्रक्रिया शुरू होने वाली है। ऐसे में वहां पढ़ने और नौकरी करने वाले लोग जल्द ही वापसी करेंगे। जिस वजह से सरकार चाहती है कि कोवैक्सीन को मान्यता मिल जाए, ताकी उन्हें किसी तरह की दिक्कत ना हो। हालांकि कुछ देशों ने कोवैक्सीन को मंजूरी दे रखी है, जबकि कुछ इसका आयात कर रहे, ऐसे में वहां पर भी मंजूरी मिलने की पूरी संभावना है।
मौजूदा वक्त में डब्ल्यूएचओ ऑक्सफोर्ड एस्ट्राजेनेका, फाइजर और मॉडर्ना जैसे निर्माताओं के वैक्सीन को मान्यता दे चुका है। ऐसे में इसकी डोज लेने वाले लोग बिना रोक-टोक किसी भी देश में यात्रा कर सकते हैं। सूत्रों ने ये भी बताया कि यूरोपीय संघ से समर्थन प्राप्त करने के लिए एक अलग प्रक्रिया है, जिसमें ज्यादा वक्त लग सकता है।












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