भारत का विदेश मंत्रालय बना लेखकों-कवियों का गढ़

नई दिल्ली (विवेक शुक्ला) अब लगता है कि भारत की विदेश नीति की दिशा तय करने वाले भारतीय विदेश सेवा के अफसर क्रिएटिव लेखन में भी निपुण होते जा रहे हैं। इधर के कई अफसर उपन्यास,कहानियां लिख रहे हैं और कविता कह रहे हैं। इनमें नए प्रवक्ता विकास स्वरूप, नवतेज सरना, पवन वर्मा खास नाम हैं।

Indian diplomats are also making waves as creative writers

'स्लमडॉग मिलियनेयर'

विदेश मंत्रालय के नए प्रवक्ता विकास स्वरूप ने मशहूर फिल्म 'स्लमडॉग मिलियनेयर' की कहानी लिखी थी। उन्हें कल ही प्रवक्ता के पद पर नियुक्त किया गया है। वे भारतीय विदेश सेवा के1986 बैच के अधिकारी हैं। ब्रिटेन, अमरीका और तुर्की में काम कर चुके विकास स्वरूप वर्तमान में संयुक्त राष्ट्र में हैं।

विदेश मंत्रालय के प्रवक्ता का पद बेहद अहम माना जाता है। इस पर किसी तेज-तर्रार अधिकारी की ही नियुक्ति होती है। उनके इस पद को संभालने के संभ करीब एक माह पहले वन इंडिया ने खबर दे दी थी। वे सैयद अकबरउद्दीन का स्थान लेंगे। मूलत: इलाहाबाद के रहने वाले विकास स्वरूप ने 2003 में लंदन में अपनी पोस्टिंग के दौरान अपना उपन्यास 'क्यू एंड ए' लिखा था।

कौन बनेगा करोड़पति

उस वक्त हिंदुस्तान में कौन बनेगा करोड़पति की बेहद चर्चा थी और उन्होंने महज दो महीने के भीतर अपने उपन्यास को पूरा कर लिया। स्वरूप के इस पहले ही उपन्यास 'क्यू एंड ए' का दुनिया की 36 भाषाओं में अनुवाद हुआ। बीबीसी ने इस पर एक रेडियो ड्रामा भी बनाया था।

और भी उपन्यास

विकास का दूसरा उपन्यास 'सिक्स सस्पेक्ट्स' प्रकाशित हो चुका है। बीबीसी इस उपन्यास पर भी फिल्म बना रही है। फिलहाल वे अपनी तीसरी किताब पर काम कर रहे हैं लेकिन इसकी पृष्ठभूमि में भारत नहीं होगा।

उनके उपन्यास 'क्यू एंड ए एक काफी चर्चित किताब रही है।बाद में किताब का शीर्षक बदलकर 'स्लमडॉग मिलियनेयर' कर दिया गया और किताब के कवर पर फ़िल्म की तस्वीर भी लगा दी गई।

कविता कहने वाले अफसर

विकास के अलावा काठमांडू में भारतीयदूतावास में अहम पद काम कर रहे के. अभय कविताएं लिखते हैं। उनका कहानी संग्रह ए सेडिक्शन आफ दिल्ली बाजार में हाल ही में आया है। वे 2001 बैच के आईएफएस अधिकारी हैं।

गालिब के लेखक

सीनियर आईएफएस अफसर नवतेज सरना भी कहानियां और उपन्यास लिखते हैं। वे पहले विदेश मंत्रालय में प्रवक्ता रहे हैं। कुछ समय पहले आईएफएस की नौकरी छोड़कर सियासत में आ गए पवन कुमार वर्मा भी बड़े लेखक हैं। उन्होंने गालिब और मिडिल क्लास पर भरपूर लेखन किया है।

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