नागरिकता : Indian Passport क्यों छोड़ रहे भारतीय नागरिक, 2021 में 78 हजार लोग अमेरिका शिफ्ट हुए
दावे किए जा रहे हैं कि प्रधानमंत्री मोदी की अगुवाई में भारत की साख लगातार मजबूत हुई है, देश में नागरिकों के लिए पहले से बेहतर वातावरण है। हालांकि, लाखों लोग हर साल अपनी भारतीय नागरिकता छोड़ भी रहे हैं ? पढ़िए रिपोर्ट
नई दिल्ली, 20 जुलाई : 2021 में 1.6 लाख से अधिक भारतीयों ने अपनी नागरिकता (Indian citizenship) छोड़ दी। सरकार ने संसद के मानसून सत्र में ये जानकारी दी है। 2019, 2020 और 2021 में कुल 3,92,643 भारतीयों ने नागरिकता छोड़ दी। दुनिया भर में लोग नौकरियों और बेहतर अवसरों के लिए अपना जन्मस्थान या देशों को छोड़ देते हैं, लेकिन अलग-अलग देशों में और विभिन्न सामाजिक-आर्थिक समूहों के बीच भिन्न देश छोड़ने के कारण अलग-अलग होते हैं। भारत से क्यों इतनी बड़ी संख्या में लोग विदेश जाना पसंद कर रहे हैं, समझिए वनइंडिया हिंदी की इस विशेष रिपोर्ट में।

भारत छोड़ने वालों की संख्या 78,114 बढ़ी
केंद्र सरकार ने उत्तर प्रदेश के सहारनपुर से बसपा सांसद हाजी फजलुर रहमान (Haji Fazlur Rehman) के भारतीय नागरिकता त्यागने (Renunciations of Indian Citizenship) के सवाल पर बताया कि पिछले 3 साल में 3.9 लाख लोगों ने भारत की नागरिकता को छोड़ी है। ये लोग दुनिया के 103 देशों में गए और वहां की नागरिकता ले ली। 2021 में 1,63,370 लोगों ने भारतीय पासपोर्ट सरेंडर किया। 2020 की तुलना में 78,114 अधिक इंडियंस ने नागरिकता छोड़ी।

नागरिकता के सवाल पर गृह मंत्रालय
भारत छोड़कर दूसरे देशों की नागरिकता लेने वाले लोगों से जुड़े एक सवाल पर मंगलवार (19 जुलाई) को लोकसभा में एक प्रश्न का उत्तर देते हुए, गृह मंत्रालय ने बताया कि 2021 में 1.6 लाख से अधिक भारतीयों ने अपनी भारतीय नागरिकता छोड़ दी। कोरोना महामारी के दौरान साल 2020 में जितने लोगों ने भारतीय नागरिकता सरेंडर की थी, उससे कहीं ज्यादा संख्या में साल 2021 में लोगों ने दूसरे देशों की नागरिकता में दिलचस्पी दिखाई है। गृह मंत्रालय के मुताबिक 2020 में 85,256 लोगों ने अपनी भारतीय नागरिकता छोड़ी थी। ऐसे में 1.6 लोगों का भारतीय नागरिकता छोड़ना संख्या में तेज वृद्धि दिखाता है।

भारत छोड़कर अमेरिका गए लोग
गृह मंत्रालय ने बताया कि 2019 में 1.44 लाख भारतीयों ने अपने पासपोर्ट सरेंडर कर दूसरे देशों की नागरिकता ली थी। सरकारी आंकड़ों के अनुसार, 2021 में भारतीय नागरिकता छोड़ने वाले भारतीयों में सबसे अधिक लोगों ने अमेरिका (78,284) की नागरिकता ली है।

Australia भी पसंदीदा देशों में एक
भारत छोड़ने के बाद यहां के नागरिकों की दूसरी पसंद ऑस्ट्रेलिया है। 23,533 लोगों ने भारतीय पासपोर्ट सरेंडर कर कंगारुओं के देश की सिटिजनशिप हासिल की। तीसरे नंबर पर कनाडा (21,597) और चौथे नंबर पर यूनाइटेड किंगडम (14,637) हैं।

भारतीय इटली और न्यूजीलैंड भी शिफ्ट हुए
भारतीय नागरिकता छोड़ने वालों में से सबसे कम संख्या (5,986) में लोग इटली गए। इंडियन पासपोर्ट सरेंडर करने के बाद न्यूजीलैंड में 2,643, सिंगापुर में 2,516, जर्मनी में 2,381, नीदरलैंड में 2,187, स्वीडन में 1,841 और स्पेन में 1,595 भारतीयों ने नागरिकता हासिल की।

दोहरी नागरिकता की अनुमति नहीं
बता दें कि भारत सरकार दोहरी नागरिकता की अनुमति नहीं देती। ऐसे में दूसरे देश की नागरिकता लेने से भारतीय नागरिकता खुद-ब-खुद रद्द हो जाती है। ऐसे में ये समझना रोचक है कि आखिर लोग इतनी बड़ी संख्या में भारत की नागरिकता क्यों छोड़ते हैं? इंडियन एक्सप्रेस की रिपोर्ट के मुताबिक नागरिकता छोड़ने के कारण अलग-अलग देशों में और सामाजिक-आर्थिक और जातीय समूहों के बीच व्यापक रूप से भिन्न होते हैं।

इन कारणों से 'भारत से मोहभंग' !
सामान्य तौर पर, दुनिया भर में, लोग अपने देशों को बेहतर नौकरियों और अच्छी लाइफ स्टाइल, स्टैंडर्ड ऑफ लिविंग में सुधार करने के मकसद से छोड़ते हैं। सोशल सिक्योरिटी और कानून व्यवस्था भी अहम कारक होते हैं। कुछ लोगों को जलवायु परिवर्तन या घर पर प्रतिकूल राजनीतिक परिस्थितियों के कारण भी नागरिकता छोड़ते देखा गया है।

भारतीय परिवार नई पीढ़ी के साथ !
गौरतलब है कि दुनिया भर में भारतीय प्रवासी नागरिकों (diaspora) की संख्या बढ़ रही है। इसी के साथ-साथ नई पीढ़ी के नागरिकों के पास खुद-ब-खुद दूसरे देशों की नागरिकता है। इस स्थिति में जिनके पास अन्य देशों के पासपोर्ट या नागरिकता है, उनसे जुड़े पुराने भारतीय (परिजन) विदेश में बसे परिवार के साथ रहने का विकल्प चुनते दिख रहे हैं।

भारत छोड़ने के कानूनी कारण
आर्थिक अपराध के मामले में भगोड़ा करार दिए गए जौहरी मेहुल चौकसी जैसे कुछ हाई-प्रोफाइल मामलों में, भारत छोड़ने का कारण कानून से भागना भी है। कथित अपराधों के लिए कानूनी कार्रवाई के डर से चोकसी जैसे लोग भारतीय पासपोर्ट सरेंडर करते या दूसरे देशों में नागरिकता / शरण लेते देखे गए हैं। नीरव मोदी, विजय माल्या, ललित मोदी जैसे हाईप्रोफाइल लोग भी दूसरे देशों में हैं। हालांकि, इनकी नागरिकता पर स्थिति स्पष्ट नहीं है, लेकिन भारत में लंबे समय तक रह रहे ये लोग फिलहाल यहां के कानून से भाग कर दूसरे देशों में रह रहे हैं।

भारत में अवसरों की कमी !
ग्लोबल वेल्थ माइग्रेशन रिव्यू (Global Wealth Migration Review- GWMR) की 2020 में आई एक रिपोर्ट में कहा गया है कि दुनिया भर में ऐसे लोग जिनके पास बड़ी व्यक्तिगत पूंजी है (high net worth individuals) ऐसे व्यक्ति जो जन्म के समय प्राप्त नागरिकता का त्याग कर देते हैं। अपराध दर बढ़ने या घर पर (देश / गृह राज्य में) व्यापार के अवसरों की कमी के कारण भी ऐसे लोग भारत की नागरिकता छोड़कर दूसरे देशों में जाने का फैसला लेते हैं।

पहले ऐसे लोग छोड़ते हैं देश
GWMR 2020 की रिपोर्ट में कहा गया है कि बड़ी संख्या में नागरिकता छोड़ना आने वाली बुरी चीजों का संकेत भी हो सकता है। रिपोर्ट में बुरी चीजों के संकेत पर लिखा गया है कि जिन लोगों के पास देश छोड़ने या पूंजी की ताकत होती है वे सबसे पहले किसी सुरक्षित देश में जाते हैं। वहां की नागरिकता हासिल करते हैं। इन लोगों की तुलना में मध्यम वर्ग के नागरिकों के पास नागरिकता छोड़ने के लिए साधनों का अभाव होता है।

ऐसे कारणों से भी छूटता है देश
ग्लोबल वेल्थ माइग्रेशन रिव्यू की रिपोर्ट में कई अन्य कारणों को भी सूचीबद्ध किया गया है। इनसे पता लगता है कि लोग जन्मभूमि छोड़कर दूसरे देशों की नागरिकता लेने का निर्णय क्यों लेते हैं ? इससे पता चलता है कि कौन से ऐसे देश हैं जहां लोग प्रवास करने को प्रीफरेंस देते हैं। देश छोड़ने / दूसरे देशों की नागरिकता चुनने के पीछे के कुछ प्रमुख कारण देखिए-
- महिलाओं और बच्चों की सुरक्षा
- जलवायु और प्रदूषण जैसे जीवन शैली से जुड़े कारक

करों सहित वित्तीय चिंताएं
भारत के संदर्भ में अधिक टैक्स / समुचित आयकर और GST चुकाने के बावजूद स्टैडर्ड ऑफ लिविंग में कोई सुधार नहीं होने से लोगों के बीच असंतोष देखा गया है। वित्तीय चिंताओं में पैसों का उचित रिटर्न न मिलना या करप्शन के कारण काम पूरा करने के लिए 'अनिवार्य' घूस देने जैसी परिस्थितियों के कारण भी हताशा जैसे हालात भी देखे गए हैं।

बच्चों को बेहतर जिंदगी देने का सपना
परिवारों के लिए बेहतर स्वास्थ्य देखभाल और बच्चों के लिए शानदार शैक्षिक अवसर की तलाश में भी लोग दूसरे देशों का रूख करते हैं। दमनकारी सरकारों से बचने के लिए भी लोग नागरिकता सरेंडर कर दूसरे देशों की कथित तौर पर 'उदार' व्यवस्था को चुनते हैं। द इंडियन एक्सप्रेस की रिपोर्ट में प्रोफेसर डॉ अतनु महापात्र के हवाले से कहा गया, भारत के वैश्विक प्रवासी आंदोलनों का विश्लेषण स्वतंत्रता पूर्व और स्वतंत्रता के बाद के दृष्टिकोण से किया जाना चाहिए।

कई स्तरों पर देश छोड़ते हैं लोग
गुजरात के केंद्रीय विश्वविद्यालय में सेंटर फॉर डायस्पोरा स्टडीज (Centre for Diaspora Studies) में प्रोफेसर डॉ अतनु महापात्र ( Dr Atanu Mohapatra) बताते हैं कि आजादी के बाद प्रवासी समुदाय नौकरियों और उच्च शिक्षा के लिए भारत से बाहर जा रहा है। उन्होंने कहा कि नौकरी की तलाश में जाने वाले लोग अकुशल (unskilled), अर्धकुशल (semi-skilled) या कुशल श्रमिक (skilled labour) हो सकते हैं।

मजदूरी की मजबूरी
आजादी के पहले भारत की नागरिकता छोड़ने के कारणों पर डॉ महापात्र ने बताया, स्वतंत्रता के पहले का प्रवासी आंदोलन पूरी तरह से अलग था। आजादी के पहले जबरन और ठेका श्रम देखा गया। उन्होंने भारतीय उपमहाद्वीप से जाने वाले गिरमिटिया श्रमिकों की ओर इशारा किया। उन्होंने कहा, विशेष रूप से 19 वीं शताब्दी के दौरान, बड़ी संख्या में भारतीय नागरिकों को मजबूर किया गया था। उन्हें बंधुआ बना लिया गया था। श्रम और दासता के कारण औपनिवेशिक सरकार ने भारतीय नागरिकों को मॉरीशस, ला रीयूनियन, स्ट्रेट सेटलमेंट्स, फिजी, नेटाल, दक्षिण अफ्रीका, ब्रिटिश गुयाना, त्रिनिदाद, सूरीनाम, ग्वाडेलोप, मार्टीनिक, फ्रेंच गुयाना, जमैका, बेलीज, सेंट लूसिया और सेंट विंसेंट और ग्रेनेडा, जैसे स्थानों पर भेजा।

इन कारणों से भी रास आता है विदेश
आजादी के बाद जब लोग भारत छोड़ते हैं तो कुछ विशिष्ट देशों को ही क्यों चुनते हैं ? इसका कोई सटीक, 'वन लाइन' या ब्लैक एंड व्हाइट जवाब नहीं हो सकता, लेकिन ग्लोबल वेल्थ माइग्रेशन रिव्यू के वैश्विक डेटा में बताए गए कुछ कारक विशेष रूप से भारतीयों पर भी लागू हो सकते हैं। सामान्य तौर पर, ऐसे देश जहां भारतीय लंबे समय से प्रवास कर रहे हैं इन देशों के मामले में 'देश छोड़ने के कारण' समझे जा सकते हैं। जिन देशों में भारतीय लोगों के परिवार या दोस्त हैं, वे अधिक आसान और प्रीफरेंस वाले विकल्प होंगे। कागजी कार्रवाई आसान होने के साथ-साथ फेवरेवल सामाजिक और जातीय वातावरण मिलेंगे ऐसे विचारों के कारण लोग भारत छोड़कर ऐसे देशों में जाना चुन सकते हैं।

प्रवासियों की संख्या लगातार बढ़ने के कारण
ग्लोबल वेल्थ माइग्रेशन रिव्यू रिपोर्ट में ऑस्ट्रेलिया की वैश्विक लोकप्रियता का जिक्र है। इस देश में प्रवासियों की संख्या लगातार बढ़ रही है। रिपोर्ट में कहा गया है कि ऑस्ट्रेलिया को लोकप्रिय गंतव्य बनाने में इसकी अंक-आधारित आव्रजन प्रणाली शामिल है। इस कारण डॉक्टरों, वकीलों, इंजीनियरों और एकाउंटेंट जैसे धनी और उच्च कमाई वाले पेशेवर इस देश में जाते हैं। रिपोर्ट के मुताबिक, ऑस्ट्रेलिया अपनी स्वास्थ्य सेवा प्रणाली के अलावा, अंग्रेजी भाषा होने के कारण भी शीर्ष विकल्प हो सकता है। अमेरिका के विपरीत ऑस्ट्रेलिया में हाई नेटवर्थ वाले वृद्ध व्यक्तियों के लिए स्वास्थ्य सेवाएं उतनी जटिल या महंगी नहीं हैं। रिपोर्ट में सिंगापुर को एशिया में उभरते हुए शीर्ष धन प्रबंधन केंद्र के रूप में दिखाया गया है।












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