चुशुल में 15 घंटे तक चली कोर कमांडर मीटिंग में चीन से क्या बात हुई, सेना ने बताया
नई दिल्ली। भारत और चीन के मिलिट्री कमांडर्स 14 जुलाई को एक बार फिर पूर्वी लद्दाख में जारी टकराव को खत्म करने के लिए कोर कमांडर वार्ता हुई। लाइन ऑफ एक्चुअल कंट्रोल (एलएसी) के हालातों को सामान्य करने के लिए मंगलवार को जो वार्ता हुई वह करीब 15 घंटे तक चली है। सेना की तरफ से इस चौथे दौर की वार्ता पर आधिकारिक बयान दिया गया है।
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डिसइंगेजमेंट एक लंबी और जटिल प्रक्रिया
सेना के प्रवक्ता कर्नल अमन आनंद ने कहा, ' भारत और चीन, स्थापित मिलिट्री और राजनयिक चैनलों के माध्यम से वार्ता कर रहे हैं ताकि एलएसी की स्थिति को बहाल किया जा सके। चुशुल में भारत और पीपुल्स लिब्रेशन आर्मी (पीएलए) के कमांडर्स के बीच 14 जुलाई को चौथे दौर की वार्ता हुई है।' सेना ने आगे कहा है कि भारत और चीन दोनों ही पूरी तरह से डिसइंगेजमेंट के लक्ष्य को हासिल करने को लेकर प्रतिबद्ध हैं। यह प्रक्रिया लंबी होने के साथ ही साथ जटिल भी है और इसके लिए लगातार वैरिफिकेशन की जरूरत है। सेना प्रवक्ता के मुताबिक लगातार राजनयिक और सैन्य स्तर पर मीटिंग्स के जरिए चीन इसे आगे बढ़ा रहा है। सूत्रों की ओर से 14 जुलाई की मीटिंग को लेकर बताया गया है कि चीनी जवान पैंगोंग त्सो के फिंगर 4 से फिंगर 8 तक के इलाके को पूरी तरह से हटने के लिए तैयार नहीं हैं।

सेना हटाना ही आखिरी विकल्प
पीएलए फिंगर 8 पर भी अपनी कुछ मौजूदगी चाहता है। भारत ने भी साफ कर दिया है कि इन इलाकों से पूरी तरह से सेना हटाना ही आखिरी विकल्प है। भारत का दावा है कि एलएसी की सीमा फिंगर आठ तक है लेकिन वह फिंगर 4 तक के इलाके को ही नियंत्रित करती है। फिंगर 8 पर चीन की बॉर्डर पोस्ट्स हैं। जबकि वह मानती है कि एलएसी फिंगर 2 से गुजरती है। करीब छह साल पहले चीन की सेना ने फिंगर 4 पर स्थायी निर्माण की कोशिश की थी। इसे बाद में भारत की तरफ से हुए कड़े विरोध के बाद गिरा दिया गया था। पांच जुलाई को भारत और चीन के स्पेशल रिप्रजेंटेटिव्स के बीच पूर्ण रूप से डिसइंगेजमेंट पर चर्चा हुई थी।

स्टडी ग्रुप ने लिया स्थिति का जायजा
सीनियर कमांडर्स ने डिसइंगेजमेंट के पहले चरण के लागू होने की प्रक्रिया का जायजा लिया और प्रक्रिया को पूरा करने के लिए जरूरी कदम उठाने पर चर्चा की। भारत और चीन के बीच 14 जुलाई को 15 घंटे तक चली मीटिंग में कई मुद्दों पर विस्तार से बातचीत हुई है। भारत ने पीएलए को साफ कर दिया है कि उसे पैंगोंग झील और देपसांग एरिया से अपने सैनिकों को हटाना ही पड़ेगा। दोनों देशों के बीच मंगलवार सुबह 11:30 बजे वार्ता शुरू हुई थी जो कि बुधवार को तड़के देर रात दो बजे तक जारी रही। बुधवार को सरकार की तरफ से बनाए गए ताकतवर चाइना स्टडी ग्रुप (सीएसजी) ने पूर्वी लद्दाख के हालातों का जायजा लिया है।

अब होगी पांचवीं मीटिंग
माना जा रहा है कि लेह स्थित 14 कोर के कमांडर लेफ्टिनेंट जनरल हरिंदर सिंह और पीएलए के साउथ शिनजियांग मिलिट्री डिस्ट्रीक्ट के कमांडर मेजर जनरल ल्यू लिन की पांचवी मुलाकात जल्दी हो सकती है। भारत और चीन के बीच अब तक चार दौर की कोर कमांडर स्तर की वार्ता हो चुकी है। पहली वार्ता छह जून को हुई थी। उसके बाद 15 जून को गलवान घाटी में हुई हिंसा के एक हफ्ते बाद यानी 22 जून को मीटिंग हुई और फिर 30 जून को कोर कमांडर वार्ता हुई।












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