पाकिस्तान से तनाव के बीच इंडियन आर्मी को मिले 12 शॉर्ट स्पैन ब्रिजिंग सिस्टम, जानिए कैसे सेना को होगा फायदा
नई दिल्ली, जुलाई 2। दुश्मन देशों से लगातार खतरे के बीच शुक्रवार को भारतीय सेना की ताकत में इजाफा हो गया। दरअसल, सेना ने स्वदेशी रूप से निर्मित 12 शॉर्ट स्पैन ब्रिजिंग सिस्टम को अपने बेडे़ में शामिल कर लिया। आपको बता दें कि इनका निर्माण पूरी तरह से मेक इन इंडिया मिशन के तहत किया गया है। इस सिस्टम के सेना में शामिल होने की जानकारी सेना प्रमुख एमएम नरवणे ने दी। एमएम नरवणे ने बताया कि कि यह शॉर्ट स्पैन ब्रिज पूरी तरह से मेड इन इंडिया है और ये आत्मानिर्भर भारत की ओर एक अहम कदम है।
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इस सिस्टम की खासियत
- आपको बता दें कि इस सिस्टम के जरिए पश्चिमी सीमाओं पर भारत अपने दुश्मन देशों से निपटने के लिए बड़े आराम से पुल का निर्माण कर सकेगा। खासकर पाकिस्तान पर किसी ऑपरेशन या फिर युद्ध की स्थिति में इस सिस्टम का बेहतर इस्तेमाल किया जा सकेगा। बता दें कि शॉर्ट स्पैन ब्रिजिंग सिस्टम के जरिए भारतीय सेना किसी भी ऑपरेशन के दौरान बाधा बनने वाली छोटी नदियों और नहरों को आसानी से पार कर पाएगी। 10-10 मीटर के ये 12 ब्रिजिंग सिस्टम DRDO प्रमुख डॉ.जी, सतीश रेड्डी और सेना प्रमुख एमएम नरवणे की मौजूदगी में सेना को सौंपे गए।
- आपको बता दें कि 492 करोड़ रुपये की लागत से इन 12 स्वदेशी शॉर्ट स्पैन ब्रिजिंग सिस्टम को विकसित किया गया है। एक सैन्य अधिकारी ने बताया कि शॉट ब्रिजिंग सिस्टम के जरिए किसी भी बाधा को दूर किया जा सकता है। यह पानी में 70 टन तक ले जाने में सक्षम है। यह सिस्टम कोर ऑफ इंजीनियर्स की मौजूदा ब्रिजिंग क्षमता को कई गुना बढ़ा देता है ।
This short span bridge is fully Made in India. Its production has been done by L&T & designed by DRDO. This is another step towards Aatmanirbhar Bharat. This bridge will boost the ability of the Army: Army Chief General MM Naravane during induction of short span bridge into Army pic.twitter.com/aOi4qZwJBa
— ANI (@ANI) July 2, 2021
DRDO के द्वारा इसके डिजाइन को किया गया तैयार
इस दौरान सेना प्रमुख जनरल एमएम नरवणे ने कहा, 'इसका उत्पादन एलएंडटी द्वारा किया गया है और डीआरडीओ द्वारा डिजाइन किया गया है। यह आत्मानिर्भर भारत की ओर एक और कदम है।' उन्होंने कहा कि यह सेना की क्षमता को और बढ़ाएगा।' वहीं सेना के इंजीनियर-इन-चीफ लेफ्टिनेंट जनरल हरपाल सिंह ने कहा कि ये हमारे विशेष ऑपरेशन के लिए एक बहुत बड़ी कामयाबी है। उन्होंने कहा कि पहले हमें विशेष ऑपरेशन को अंजाम देने के लिए बहुत सी तैयारियां करनी पड़ती थी, लेकिन इस तकनीक से हमें अब काफी फायदा होगा।












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