गायब हुए एएन-32 में इस माह आई थीं तीन तकनीकी खामियां!
नई दिल्ली। शुक्रवार को चेन्नई से पोर्ट ब्लेयर के लिए रवाना हुआ इंडियन एयर फोर्स का ट्रांसपोर्ट एयरक्राफ्ट एएन-32 कहां चला गया है किसी को कुछ पता नहीं लग रहा है। 29 लोगों को लेकर चेन्नई के लिए रवाना हुए इस एयरक्राफ्ट के मिलने की दुआएं लोग कर रहे हैं। इस बीच एक खबर आ रही है कि इस माह की शुरुआत में इस एयरक्राफ्ट तीन तकनीकी खामियां पाई गई थीं।

पिछले वर्ष सितंबर में हुई थी मरम्मत
टाइम्स ऑफ इंडिया की खबर के मुताबिक पिछले वर्ष सितंबर में इस एयरक्राफ्ट को अपग्रेड किया गया और इसकी ओवरहॉलिंग की गई थी। वहीं इस पूरे मसले पर एयरफोर्स के अधिकारियों का कहना है कि जो भी खामियां थीं वह बहुत हल्की थीं और जब किसी भी एयरक्राफ्ट को क्लीयरेंस नहीं मिलता है उसे फ्लाइंग के लिए सिग्नल नहीं दिया जाता है।
खामियों का सामना करने को मजबूर
वहीं एएन-32 खराब उपयोगिता, धीमे रखरखाच और ओवरहॉलिंग में देरी की वजह के अलावा कुछ स्पेयर पार्ट्स जैसी खामियों का सामना करने को मजबूर है। इसकी वजह से इस एयरक्राफ्ट को सबसे ज्यादा बार जमीन पर ही रहना पड़ा है। गायब हुआ एएन-32 एयरफोर्स की 33वीं स्क्वाड्रन का हिस्सा था जो कि सुलूर में है।
यह एयरक्राफ्ट उसी 50 मिडियम-लिफ्ट टैक्टिकल एयरक्राफ्ट अपग्रेड में शामिल था जिन्हें हवा में और ताकत दी गई थी और साथ ही कुछ नए उपकरण फिट किए गए थे।
यूक्रेन से अपग्रेडेशन का करार
वर्ष 2009 में यूक्रेन से इस अपग्रेडेशन के लिए करार हुआ था और इसकी कीमत अब 1965 करोड़ तक पहुंच गई है।
भारत ने वर्ष 1984 से 1991 तक सोवियन यूनियन से 101 एएन-32 की डील की थी। इनमें से 40 एयरक्राफ्ट को यूक्रेन में तैयार किया गया था। फिलहाल 61 एएन-32 को कानपुर स्थित बेस रिपेयर डिपो में अपग्रेड किया जा रहा है।
एक अधिकारी के मुताबिक एएन-32 को फिलहाल उच्च श्रेणी के वॉर्निंग सिस्टम, मौसम से जुड़े नए रडार और एडवांस्ड जीपीएस से लैस किया जा रहा है।
कितनी होती है टोटल लाइफ
एयरफोर्स के पास मौजूद 70% एएन-32 एयरक्राफ्ट की ऑपरेशपल लाइफ वर्ष 2009 से 2012 के बीच ही खत्म हो चुकी है। एक एएन-32 की कुल टेक्निकल लाइफ 20,000 फ्लाइंग ऑवर्स या फिर 25 वर्ष होती है जिसमें 15,000 बार लैडिंग्स भी शामिल होती हैं।












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