बुलीइंग का शिकार हुईं, जॉब ना मिलने पर करने वाली थीं आत्महत्या, कौन हैं भारत की सबसे युवा CEO राधिका गुप्ता
बुलीइंग का शिकार हुई, जॉब ना मिलने पर करने वाली थीं आत्महत्या, कौन हैं भारत की सबसे युवा CEO राधिका गुप्ता
नई दिल्ली, -7 जून: एडलवाइज ग्लोबल एसेट मैनेजमेंट लिमिटेड की सीईओ (मुख्य कार्यकारी अधिकारी) राधिका गुप्ता भारत की सबसे क्रम उम्र में की सीईओ हैं। बुलीइंग,आत्महत्या और कई उतार-चढ़ाव से राधिका गुप्ता की जिंदगी भरी हुई है। टेढ़ी गर्दन के साथ पैदा हुई राधिक गुप्ता 33 साल की उम्र में एडलवाइज ग्लोबल एसेट मैनेजमेंट लिमिटेड की सीईओ बन गई थीं। बुली किए जाने से लेकर सबसे कम उम्र की सीईओ बनने तक, राधिका गुप्ता ने एक लंबा सफर तय किया है। 'ह्यूमन्स ऑफ बॉम्बे' की एक नवीनतम पोस्ट में राधिका गुप्ता ने अपनी प्रेरक कहानी साझा की है।

टेढ़ी गर्दन की वजह से बना मजाक
इंस्टाग्राम पोस्ट में राधिका ने लिखा, "मैं टेढ़ी गर्दन के साथ पैदा हुई थी। इसको लेकर बचपन से ही मेरा मजाक बनाया गया है। मेरा टेढ़ी गर्दन के साथ पैदा होना, मुझे घर से बाहर करने के लिए पर्याप्त नहीं थी। मैं स्कूल में हमेशा से सबके लिए अनजान और नई बच्ची थी। पिताजी एक राजनयिक थे। नाइजीरिया आने से पहले मैं पाकिस्तान, न्यूयॉर्क और दिल्ली में रहती थी। मेरे इंडियन एक्सेंट को देखकर, मेरा नाम स्कूल में अपू' रख दिया गया था, जो सिम्पसन्स का एक पात्र था।''

'मां से तुलना कर कहा जाता था बदसूरत'
राधिका गुप्ता आगे बताती हैं, ''मेरे स्कूल में हमेशा मेरी तुलना मेरी मां से की जाती थी, वह एक बहुत ही सुंदर और तेजस्वी महिला थी। मुझे उनके मुकाबले कहा जाता था कि मैं उनकी तुलना में कितनी बदसूरत दिखती हूं। स्कूल में मेरा आत्मविश्वास हमेशा कम ही रहा।''

नौकरी ना मिलने पर 22 की उम्र में करने वाली थीं आत्महत्या
राधिका गुप्ता ने आगे कहा, ''जब 22 साल की उम्र में मुझे मेरी 7वीं नौकरी से भी रिजेक्ट कर दिया गया था। तो मैंने खिड़की से बाहर देखा और कहा, 'मैं कूद कर अपनी दान दे दूंगी।' मेरे दोस्त ने मदद के लिए फोन किया और मुझे एक मनोरोग वार्ड में ले जाया गया, जहां पता चला कि मैं अपनी जिंदगी से बहुत निराश हूं। लेकिन उन्होंने मुझे वहां से जल्दी ही जाने दिया क्योंकि मेरी नौकरी के लिए एक आखिरी इंटरव्यू बचा हुआ था। इसके बाद उस दिन मुझे वो नौकरी मिल गई थी।''

बताया कैसे आई भारत?
राधिका गुप्ता ने आगे कहा, ''मेरी जिंदगी में सबकुछ सही चल रहा था, सब ट्रैक पर था। लेकिन 3 साल बाद 2008 में वित्तीय संकट से बचने के बाद, मैंने भारत आने का फैसला किया। इसलिए 25 साल की उम्र में मैं भारत आई और अपने पति और दोस्त के साथ मिलकर अपनी खुद की संपत्ति प्रबंधन फर्म शुरू की।"'

एडलवाइज एमएफ ने बदली जिंदगी
राधिका ने आगे कहा, ''कुछ साल बाद, हमारी कंपनी को एडलवाइज एमएफ ने अधिग्रहण कर लिया। मैं सफलता की सीढ़ी चढ़ने लगी थी। मैं अवसरों के लिए हाथ उठाना चाहती थी। फिर भी, जब एडलवाइज एमएफ में एक नए सीईओ को नियुक्त करने की बात शुरू हुई, तो मुझे हिचकिचाहट हुई, लेकिन मेरे पति ने मुझे प्रोत्साहित किया और कहा कि 'आप नौकरी के लिए सबसे परफेक्ट हो!'

'मैंने अपने मालिक से कहा- मैं CEO बनना चाहती हूं...'
राधिका गुप्ता ने आगे कहा, ''मैंने अपने मालिक से कहा, 'मैं सीईओ बनना चाहती हूं। मेरे पास भेल ही अनुभव की कमी है, लेकिन मैं जुनून से काम करने वालों में से हूं। मैंने ये बोलकर सीईओ के लिए अप्लाई कर दिया। और कुछ महीने बाद, 33 साल की उम्र में, मैं भारत में सबसे कम उम्र के सीईओ में से एक बन गई और मैं बहुत खुश थी।''

'लोग मुझे 'टूटी हुई गर्दन वाली लड़की' के नाम से जानते हैं...'
राधिका गुप्ता ने आगे कहा, '' मेरे सीईओ बनते ही अगले साल, मुझे एक कार्यक्रम में बोलने के लिए आमंत्रित किया गया- मैंने अपनी बचपन की असुरक्षा और आत्महत्या के प्रयास को साझा किया। मैंने वहां सबकुछ दिल खोलकर बोला, मेरी बातों से लोग प्रेरित हुए। मुझे 'टूटी हुई गर्दन वाली लड़की' के रूप में जाना जाने लगा। लोगों ने मेरे साथ अपनी कहानियां साझा कीं। इसने मुझे अपनी 'खामियों' को पूरी तरह से अपनाने का विश्वास दिलाया। और पिछले 4 वर्षों में, मैंने अपनी कहानी के बारे में सबको बताया है। मैंने एक किताब भी लिखी थी- LIMITLESS!''

'CEO बनना नहीं, मेरी लाइफ की सबसे उपलब्धि खुद को स्वीकार करना है...'
राधिका गुप्ता ने आगे कहा, '' लेकिन मेरी सबसे बड़ी उपलब्धि किसी कंपनी में सीईओ बनना नहीं है, बल्कि मेरी सबसे बड़ी उपलब्धि खुद को अपूर्ण लेकिन सुंदर के रूप में स्वीकार करना है। इसलिए अब, जब मुझे अपने रूप-रंग पर टिप्पणियां मिलती हैं, तो मैं बस इतना कहती हूं, 'हां, मेरी आंखों में भेंगापन है, और गर्दन टूट गई है। आपमें ऐसा क्या अनोखा है?''












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