कतर में 8 पूर्व नौसैनिकों को मौत की सजा का मामला, समाधान खोजने में चुपचाप जुटा भारत

कतर की एक अदालत द्वारा आठ पूर्व भारतीय नौसेना कर्मियों को मौत की सजा सुनाए जाने के मुद्दे का समाधान खोजने के लिए भारत ने चुपचाप प्रयास शुरू कर दिए हैं। हालांकि, दोनों देशों के अधिकारी शुक्रवार को इस मामले पर चुप्पी साधे रहे।

कतर के अधिकारियों ने इस मामले पर पूरी तरह से चुप्पी बनाए रखी। जिसका देश की मीडिया में कोई उल्लेख नहीं हुआ। मामले से परिचित लोगों ने कहा कि कतर की प्रथम दृष्टया अदालत के फैसले की प्रति अभी तक भारतीय पक्ष को औपचारिक रूप से प्राप्त नहीं हुई है।

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विदेश मंत्रालय द्वारा गुरुवार को एक बयान जारी कर कतर की अदालत के फैसले पर गहरा आघात व्यक्त करने और सभी कानूनी विकल्पों पर विचार करने का वादा करने के बाद भी भारतीय पक्ष की ओर से कोई टिप्पणी नहीं की गई। लोगों ने कहा कि मामले का समाधान खोजने के लिए राजनयिक और आधिकारिक चैनलों के माध्यम से शांत प्रयास शुरू किए गए हैं।

जिन संभावनाओं पर विचार किया जा रहा है, उनमें फैसले के खिलाफ अपील दायर करना या दोषी कैदियों के स्थानांतरण के लिए 2015 में भारत और कतर द्वारा हस्ताक्षरित समझौते का उपयोग करना है। ताकि, वे अपने गृह देश में अपनी सजा पूरी कर सकें। सजा पाए व्यक्तियों के हस्तांतरण पर समझौते को उसी वर्ष कतर पक्ष द्वारा अनुमोदित किया गया था, और यह कतर के अमीर शेख तमीम बिन हमद अल थानी द्वारा भारत की राजकीय यात्रा के दौरान हस्ताक्षरित छह समझौतों में से एक था।

इंटरनेशनल कोर्ट का दरवाजा खटखटाने की संभावना
अंतरराष्ट्रीय न्यायालय का दरवाजा खटखटाने की भी संभावना है। जैसा कि पूर्व नौसेना अधिकारी कुलभूषण जाधव के मामले में किया गया था। जिन्हें 2016 में पाकिस्तानी अधिकारियों ने हिरासत में लिया था और बाद में कथित जासूसी के आरोप में एक सैन्य अदालत ने मौत की सजा सुनाई थी।

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