INDIA Politics: नीतीश कुमार अब क्या करेंगे? 29 दिसंबर की जेडीयू बैठक ने बढ़ाया सस्पेंस

इंडिया ब्लॉक की चौथी बैठक में 19 दिसंबर को जो कुछ हुआ, उसने विपक्षी गठबंधन के सहयोगियों की दिल की धड़कनें बढ़ा दी हैं। उस दिन जिस अप्रत्याशित अंदाज में ममता बनर्जी ने पीएम उम्मीदवार के लिए मल्लिकार्जुन खड़गे का नाम बढ़ा दिया, उसने दिल्ली से बिहार तक की राजनीति में खलबली मचा दी है।

हालांकि, तथ्य यह है कि ममता के प्रस्ताव को सिर्फ दिल्ली के सीएम अरविंद केजरीवाल का ही समर्थन मिला, लेकिन तब से बिहार के मुख्यमंत्री नीतीश कुमार की नाराजगी की जो अटकलें शुरू हुई हैं, वह खत्म होने का नाम नहीं ले रही हैं।

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नीतीश की नाराजगी की अटकलों के बीच जेडीयू की बड़ी बैठक
कभी वह हिंदी वाले अपने भाषण के अनुवाद पर भड़कते बताए गए तो कभी इंडिया की जगह भारत नाम पर अड़ते नजर आए। जानकारी के मुताबिक ममता ने जिस अंदाज में राजनीति का चतुर खेल खेला, उसकी झलक नीतीश के चेहरे पर साफ नजर आ रह थी।

नीतीश को मनाने के लिए राहुल ने किया कॉल?
इंडिया ब्लॉक की इन अटकलाबाजियों को तब और हवा मिली, जब कांग्रेस नेता राहुल गांधी की ओर से जदयू सुप्रीमो से फोन पर बात करने की कोशिशों से संबंधित रिपोर्ट उजागर हुई। हालांकि, आधिकारिक तौर पर जेडीयू नेता नीतीश की नाराजगी की खबरों का खंडन कर रहे हैं, लेकिन तथ्य यह है कि पार्टी नीतीश को लंबे समय से इंडिया गठबंधन के पीएम उम्मीदवार के तौर पर प्रोजेक्ट कर रही है।

नीतीश कुमार अपनी पाला बदल राजनीति के लिए जाने जाते हैं। पिछले ढाई दशकों से भी ज्यादा समय से वह अधिकतर समय वहीं रहे हैं, जहां सत्ता रही है।

तथ्य यह भी है कि इंडिया ब्लॉक बनाने में उन्होंने जो मेहनत की है, अभी तक उन्हें उसका अपेक्षित ईनाम नहीं मिला है। कहते हैं कि उन्हें कम से कम संयोजक बनाने की पैरवी राजद सुप्रीमो लालू यादव भी कर रहे हैं, लेकिन गठबंधन के बाकी नेताओं की ओर से इसे गंभीरता से नहीं लिया गया है। लेकिन, जब उन्होंने दिल्ली में बैठक बुलाई है तो गठबंधन के नेताओं के कान खड़े हो गए हैं!

29 दिसंबर को नीतीश करेंगे कोई बड़ी घोषणा?
हालांकि, 29 दिसंबर को जेडीयू की दिल्ली में होने वाली जिस बैठक को लेकर चर्चाएं तेज हैं, वह पहले से ही निर्धारित है। लेकिन, पहले यह बैठक सिर्फ जेडीयू राष्ट्रीय कार्यकारिणी की थी, जिसमें 99 सदस्य हैं। नाराजगी की अटकलों के बीच नीतीश ने उसी दिन जेडीयू राष्ट्रीय परिषद की बैठक भी बुला ली है,जिसमें 200 सदस्य हैं और इसी की वजह उनके फैसले पर सबकी नजरें अटक गई हैं।

इसलिए कयास लगाए जा रहे हैं कि बिहार के मुख्यमंत्री उस दिन कोई चौंकाने वाला एलान कर सकते हैं। राजनीति के जानकार इसकी कुछ वाजिब वजहें बता रहे हैं। जिस तरह से बीजेपी का साथ छोड़ने के बाद उन्होंने विपक्षी दलों को एकजुट करने में अहम भूमिका निभाई है, उस हिसाब से वह जो अपने लिए राजनीतिक प्रासंगिकता खोजना चाहते थे, वह अबतक हो नहीं सका है।

उधर लालू यादव अपने बेटे तेजस्वी यादव को मुख्यमंत्री बनाने के लिए अब ज्यादा इंतजार के मूड में नहीं हैं। हाल में बिहार के उपमुख्यमंत्री तेजस्वी यादव ने कुछ सरकारी कार्यक्रमों में जिस तरह से मुख्यमंत्री से कन्नी काटी है, उससे दोनों दलों में जारी अंदरूनी खींचतान की भी चर्चाएं तेज हो चुकी हैं।

जानकारों का कहना है कि तेजस्वी के लिए जेडीयू सुप्रीमो मैदान खाली करें, यह तभी संभव है जब नीतीश को कोई राष्ट्रीय भूमिका मिले। नीतीश अपने डिप्टी को गद्दी सौंपने से पहले अपने लिए कोई सम्मानजक रोल चाहते हैं, जिससे वह अपने आधार वोटर बेस को अपने साथ जोड़े रह सकें। ऐसे में कम से कम इंडिया के संयोजक पद से भी काम चल सकता है।

जहां तक पीएम उम्मीदवार की बात है तो नीतीश के लिए अभी इंडिया ब्लॉक में जेडीयू के अलावा अन्य 27 दलों में कोई भी तैयार नजर नहीं आ रहा है। क्योंकि, जिस मंच पर ममता ने खड़गे का नाम आगे करके सनसनी पैदा कर दी, वहां लालू यादव भी नीतीश के नाम का शिगूफा छोड़ सकते थे!

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