भारत के पास अगले 5-6 साल में होगी खुद की हाइपरसोनिक मिसाइल, रफ्तार रहेगी ध्वनि से 5 गुना तेज
नई दिल्ली: चीन और पाकिस्तान का भारत के साथ लंबे वक्त से विवाद चल रहा है। इस वजह से भारत खुद की रक्षा क्षमताओं को तेजी से बढ़ा रहा है। अब भारत-रूस डिफेंस ज्वाइंट वेंचर ब्रह्मोस एयरोस्पेस ने दावा किया कि वो हाइपरसोनिक मिसाइल बनाने में सक्षम है। आने वाले 5-6 सालों में भारत के पास अपनी हाइपरसोनिक मिसाइल होगी।

सीईओ ने कही ये बात
भारत की आजादी के 75 साल पूरे होने पर ब्रह्मोस एयरोस्पेस ने 'सिल्वर जुबली ईयर' समारोह (2022-2023) की शुरुआत की। इस दौरान ब्रह्मोस एयरोस्पेस के सीईओ और एमडी अतुल राणे ने कहा कि ब्रह्मोस एयरोस्पेस हाइपरसोनिक मिसाइल बनाने में सक्षम है। पांच से छह वर्षों में हम अपनी पहली हाइपरसोनिक मिसाइल बना लेंगे। ब्रह्मोस प्रोजेक्ट काफी सही चल रहा, उसने सबसे अच्छे, सबसे तेज और सबसे शक्तिशाली आधुनिक सटीक स्ट्राइक हथियार ब्रह्मोस का उत्पादन किया है।

हर साल 100 ब्रह्मोस सिस्टम का उत्पादन
ये 'रजत जयंती वर्ष' प्रोग्राम 12 फरवरी 2023 को 'ब्रह्मोस स्थापना दिवस' पर समाप्त होगा। इसके तहत कई प्रमुख कार्यक्रम, बैठकें और राष्ट्रीय स्तर के आयोजन होंगे। वहीं ब्रह्मोस एयरोस्पेस को उत्तर प्रदेश में 300 करोड़ रुपये के शुरुआती निवेश के साथ नए मैन्युफैक्चरिंग सेंटर की स्थापना के लिए लगभग 80 हेक्टेयर भूमि प्राप्त हुई है। कंपनी की योजना 2024 के मध्य तक नई सुविधा के लिए सभी निर्माण-संबंधी कार्यों को पूरा करने की है। शुरू होने के बाद ये यूनिट हर साल 80-100 ब्रह्मोस सिस्टम का उत्पादन करेगी।

क्या है हाइपरसोनिक मिसाइल की खासियत?
आपको बता दें कि हाइपरसोनिक मिसाइल को आम हथियार नहीं है। ये 5 मैक या उससे ज्यादा की रफ्तार से उड़ान भर सकती है। आम भाषा में कहें तो ये ध्वनि की गति से 5 गुना तेज रफ्तार से हमला करेगी। अभी ये मिसाइल अमेरिका, रूस और चीन के पास उन्नत चरण में हैं, तो वहीं भारत, फ्रांस, जर्मनी, जापान और ऑस्ट्रेलिया भी इसको विकसित कर रहे।












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